Hindi Advisory Committee Meeting : नई दिल्ली, 20 जनवरी। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की पुनर्गठित हिंदी सलाहकार समिति की पहली बैठक मंगलवार को इंदिरा पर्यावरण भवन, नई दिल्ली में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय पर्यावरण मंत्री Bhupender Yadav ने की। इस बैठक में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, सांसदों और हिंदी के प्रतिष्ठित विद्वानों ने भाग लिया।
बैठक का आयोजन तीस्ता सभागार में किया गया, जहां हिंदी के प्रचार-प्रसार और सरकारी कामकाज में उसके प्रभावी उपयोग को लेकर गहन चर्चा हुई। मंत्री ने स्पष्ट कहा कि मंत्रालय की योजनाएं और नीतियां तब तक आम जनता तक सही ढंग से नहीं पहुंच सकतीं, जब तक भाषा सरल और सहज न हो।
सरल हिंदी अपनाने पर दिया गया जोर
समिति के सदस्यों को संबोधित करते हुए मंत्री Bhupender Yadav ने कहा कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि आम जनता से बेहतर संवाद का माध्यम है। उन्होंने मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों से अपील की कि वे जटिल शब्दों से बचें और सरल हिंदी का प्रयोग करें, ताकि आम लोग मंत्रालय की योजनाओं और नीतियों को आसानी से समझ सकें।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति के हस्ताक्षर उसके व्यक्तित्व को दर्शाते हैं और इसलिए अधिकारियों को हिंदी में हस्ताक्षर करने की आदत डालनी चाहिए। मंत्री ने सुझाव दिया कि अधिकारी महीने में कम से कम एक टिप्पणी हिंदी में लिखें, ताकि धीरे-धीरे हिंदी में कार्य करने की संस्कृति विकसित हो सके।
सांसदों और विद्वानों की रही सक्रिय भागीदारी
बैठक में संसद के दोनों सदनों के सांसद Mithilesh Kumar, Maya Narolia और Kamlesh Jangde शामिल हुए। इनके अलावा हिंदी भाषा के प्रतिष्ठित विद्वानों ने भी अपने विचार रखे और मंत्रालय में हिंदी के प्रयोग को और प्रभावी बनाने के लिए सुझाव दिए।
हिंदी को जनसंपर्क का मजबूत माध्यम बनाने की कोशिश
समिति के सदस्यों ने सुझाव दिया कि मंत्रालय और उसके अधीनस्थ कार्यालयों में हिंदी के उपयोग को केवल औपचारिकता तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसे जनसंपर्क और नीति संप्रेषण का मुख्य साधन बनाया जाए। इससे पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी योजनाओं की जानकारी आम नागरिकों तक बेहतर ढंग से पहुंच सकेगी।
सचिव का आश्वासन, सुझावों पर होगा अमल
बैठक के अंत में मंत्रालय के सचिव ने समिति के सदस्यों का धन्यवाद किया और आश्वासन दिया कि बैठक में दिए गए सभी सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मंत्रालय अपने दैनिक कार्यों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए हर संभव प्रयास करेगा।
विश्लेषण (Analysis): क्यों अहम है यह बैठक
सरकारी कामकाज में हिंदी के प्रयोग पर जोर केवल भाषा का सवाल नहीं है, बल्कि यह पारदर्शिता और जनभागीदारी से भी जुड़ा है। जब मंत्रालय की नीतियां सरल भाषा में होंगी, तो आम नागरिक न सिर्फ उन्हें समझ पाएंगे, बल्कि पर्यावरण संरक्षण जैसे अहम मुद्दों में सक्रिय भागीदारी भी कर सकेंगे। यह बैठक उसी दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है।
जानें पूरा मामला
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति का पुनर्गठन हाल ही में किया गया था। 20 जनवरी 2026 को हुई यह पहली बैठक मंत्रालय में हिंदी को कार्यभाषा के रूप में मजबूत करने पर केंद्रित रही।
मुख्य बातें (Key Points)
- हिंदी सलाहकार समिति की पहली बैठक नई दिल्ली में आयोजित
- मंत्री भूपेंद्र यादव ने सरल हिंदी के प्रयोग पर दिया जोर
- अधिकारियों को हिंदी में हस्ताक्षर और टिप्पणी करने की सलाह
- सांसदों और हिंदी विद्वानों ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव








