Himachal Pradesh Entry Tax को लेकर उत्तर भारत की राजनीति में भूचाल आ गया है। हिमाचल प्रदेश सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से दूसरे राज्यों से आने वाली गाड़ियों पर एंट्री टोल टैक्स में भारी बढ़ोतरी कर दी है। प्राइवेट गाड़ियों पर यह टैक्स ₹70 से बढ़ाकर सीधे ₹170 कर दिया गया है। इस फैसले से नाराज पंजाब सरकार ने पलटवार करते हुए धमकी दी है कि वे हिमाचल से आने वाली गाड़ियों पर 100-200 नहीं, बल्कि सीधे ₹1000 का टैक्स लगा देंगे। इस टकराव से पंजाब, हरियाणा और हिमाचल के बीच एक पूरी “टैक्स वॉर” छिड़ गई है, जिसका सीधा असर लाखों टूरिस्ट, डेली कम्यूटर्स और ट्रांसपोर्टर्स पर पड़ रहा है।
कितना बढ़ा Himachal Pradesh Entry Tax: जानें नए रेट्स
हिमाचल प्रदेश में एंट्री टैक्स की शुरुआत हिमाचल प्रदेश टोल एक्ट 1975 के तहत हुई थी, जो उस वक्त सिर्फ कमर्शियल वाहनों पर लागू था। साल 2003 में इसे प्राइवेट वाहनों पर भी लागू कर दिया गया और तब यह टैक्स मात्र ₹30 था।
इसके बाद पिछली बीजेपी सरकार ने इसे बढ़ाकर ₹40 किया और साथ ही यह छूट दी कि हिमाचल में रजिस्टर्ड गाड़ियों को एंट्री टैक्स नहीं देना होगा। मौजूदा कांग्रेस सरकार ने पहले इसे ₹70 किया और अब 1 अप्रैल 2026 से ₹170 कर दिया है।
नए रेट्स के मुताबिक प्राइवेट गाड़ियों पर Himachal Pradesh Entry Tax ₹70 से बढ़कर ₹170, मिनी बसों पर ₹180 से बढ़कर ₹320, बसों पर ₹320 से बढ़कर ₹600 और हैवी गुड्स व्हीकल्स पर ₹720 से बढ़कर ₹900 हो गया है। कुछ कैटेगरी में तो उछाल ₹280 तक का है।
सीएम सुखू ने बताई टैक्स बढ़ाने की वजह
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू ने इस बढ़ोतरी का बचाव करते हुए कहा कि सरकार एंट्री फी सिस्टम को “रैशनलाइज” कर रही है। उन्होंने कई कारण गिनाए: पहला, नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के FASTag बेस्ड टोल कलेक्शन सिस्टम की वजह से फी कलेक्शन का पूरा मैकेनिज्म बदल गया है, जिसके चलते रेट्स में बदलाव जरूरी था।
दूसरा और सबसे बड़ा कारण यह बताया गया कि केंद्र सरकार ने रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) बंद कर दी है। यह वो ग्रांट होती है जो केंद्र किसी राज्य को उसकी आमदनी और रोजमर्रा के खर्चों के बीच के अंतर को पूरा करने के लिए देती है। हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य के लिए यह ग्रांट वित्तीय रूप से बेहद अहम थी और इसके बंद होने से राज्य के खजाने पर दबाव बढ़ गया है।
हिमाचल प्रदेश में 50 से ज्यादा टोल बैरियर्स हैं और सरकार को उम्मीद है कि अगले वित्तीय वर्ष में Himachal Pradesh Entry Tax से ₹170 करोड़ से ज्यादा की कमाई होगी।
पंजाब ने दी ₹1000 टैक्स लगाने की धमकी
हिमाचल के इस फैसले पर पंजाब सरकार ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने इस कदम का जोरदार विरोध किया और साफ कहा कि अगर हिमाचल ने यह टैक्स वापस नहीं लिया, तो पंजाब भी जवाबी कार्रवाई करेगा। उनकी चेतावनी बिल्कुल सीधी थी: “हम 100-200 रुपये नहीं, सीधा ₹1000 का टैक्स लगाएंगे उन गाड़ियों पर जो हिमाचल प्रदेश में रजिस्टर्ड हैं।”
कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक पंजाब सरकार इस टैक्स की वैधानिकता को चुनौती देने के लिए केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटा सकती है। विपक्षी दलों का तर्क है कि नेशनल हाईवेज पर इस तरह का टैक्स लगाना अंतरराज्यीय आवाजाही की स्वतंत्रता के सिद्धांत का उल्लंघन है।
बॉर्डर पर भड़का विरोध: सड़कें जाम, टोल बूथ ब्लॉक
इस फैसले का सबसे ज्यादा असर बॉर्डर इलाकों में दिख रहा है। रोपड़, नंगल और श्री आनंदपुर साहिब में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन हुए हैं। 31 मार्च की शाम और 1 अप्रैल की सुबह कई टोल पॉइंट्स पर भारी जाम लगा रहा।
विरोध कर रहे संगठनों ने धमकी दी है कि वे रूपनगर जिले के 11 एंट्री पॉइंट्स और पंजाब भर के 33 एंट्री पॉइंट्स को ब्लॉक करेंगे। इनमें किरतपुर साहिब-मनाली नेशनल हाईवे और कन्नौली-भरतगढ़ रोड जैसे अहम रूट शामिल हैं।
नूरपुर बेदी, किरतपुर साहिब और अनंतपुर साहिब क्षेत्र की टैक्सी यूनियनों ने भी 1 अप्रैल को हिमाचल बॉर्डर पर सड़कें ब्लॉक करने का ऐलान किया। रूपनगर जिले के कन्नौली इलाके में कई किसानों ने रोपड़-नालागढ़ रोड को जाम भी कर दिया।
इसके अलावा भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड ने बिलासपुर के डिप्टी कमिश्नर को पत्र लिखकर मांग की है कि स्टेट बॉर्डर पर उनकी रोड से टैक्स हटाया जाए।
बीजेपी ने भी खोला मोर्चा, 8 से 11 अप्रैल तक आंदोलन का ऐलान
राजनीतिक मोर्चे पर भी यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है। बीजेपी ने हिमाचल प्रदेश सरकार के इस फैसले के खिलाफ 8 से 11 अप्रैल तक आंदोलन करने की घोषणा की है। पार्टी का कहना है कि यह टैक्स आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ डाल रहा है और सरकार को इसे तुरंत वापस लेना चाहिए।
किसे होगा सबसे ज्यादा नुकसान
इस Himachal Pradesh Entry Tax बढ़ोतरी का सीधा असर कई वर्गों पर पड़ेगा। सबसे पहले तो टूरिस्ट प्रभावित होंगे, क्योंकि हिमाचल प्रदेश टूरिज्म पर भारी निर्भर है। गुजरात, दक्षिण भारत और उत्तर भारत के कई राज्यों से लोग हिमाचल के धार्मिक स्थलों के दर्शन करने आते हैं और अब उन पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
दूसरा बड़ा वर्ग ट्रांसपोर्टर्स और टैक्सी ऑपरेटर्स का है जो पंजाब और हरियाणा से हिमाचल में रोज आते-जाते हैं। उनके लिए यह बढ़ा हुआ टैक्स सीधे उनकी कमाई पर चोट करेगा।
तीसरा और सबसे ज्यादा प्रभावित वर्ग बॉर्डर एरिया के निवासियों का है। पंचकूला का इंसान जो बद्दी में काम करता है, या नंगल से कोई अपने रिश्तेदार से मिलने हिमाचल जा रहा है, उन सबके लिए यह रोजमर्रा का खर्च बढ़ा देगा।
क्या होगा इस टैक्स वॉर का अंजाम
यह मामला अब सिर्फ एक साधारण टैक्स बढ़ोतरी तक सीमित नहीं रहा। जब दो पड़ोसी राज्य एक-दूसरे के वाहनों पर जवाबी टैक्स लगाने की धमकी देने लगें, तो यह स्थिति न सिर्फ व्यापार और पर्यटन को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि अंतरराज्यीय संबंधों में भी दरार डालती है। पंजाब अगर सचमुच ₹1000 का जवाबी टैक्स लगा देता है, तो हिमाचल के उन हजारों लोगों पर भी मार पड़ेगी जो रोजाना पंजाब आते-जाते हैं। इस टकराव में अंततः सबसे ज्यादा नुकसान आम जनता का ही होगा, फिर चाहे वो किसी भी राज्य की हो।
सीएम सुखू ने दिया बॉर्डर इलाकों के लिए आश्वासन
बढ़ते विरोध को देखते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू ने कुछ राहत का संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार पंजाब से लगने वाले बॉर्डर इलाकों की चिंताओं का ध्यान रखेगी। सीएम ने यह भी भरोसा दिलाया कि बॉर्डर के दोनों तरफ 2 किलोमीटर से 5 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों के लिए राहत की व्यवस्था की जाएगी। हालांकि जब तक यह राहत जमीन पर नहीं दिखती, तब तक बॉर्डर इलाकों में तनाव बना रहेगा।
फिलहाल जो लोग पंजाब या हरियाणा से हिमाचल जा रहे हैं या हिमाचल से इन राज्यों में आ रहे हैं, उन्हें घर से निकलने से पहले लोकल न्यूज जरूर चेक कर लेनी चाहिए, क्योंकि कई टोल पॉइंट्स पर विरोध प्रदर्शन और जाम की स्थिति बनी हुई है।
मुख्य बातें (Key Points)
- हिमाचल प्रदेश ने 1 अप्रैल 2026 से दूसरे राज्यों की प्राइवेट गाड़ियों पर Himachal Pradesh Entry Tax ₹70 से बढ़ाकर ₹170 कर दिया है, जबकि बसों पर यह ₹320 से बढ़कर ₹600 हो गया है।
- पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने जवाबी कार्रवाई की धमकी देते हुए हिमाचल रजिस्टर्ड गाड़ियों पर ₹1000 टैक्स लगाने की बात कही है।
- रोपड़, नंगल और आनंदपुर साहिब में भारी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, टैक्सी यूनियनों और किसानों ने सड़कें जाम करने की धमकी दी है।
- सीएम सुखू ने बॉर्डर के 2-5 किलोमीटर दायरे में रहने वालों को राहत देने का आश्वासन दिया है, लेकिन जमीनी स्तर पर अभी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।











