Anti Sacrilege Bill एक बार फिर संसद में जोरदार तरीके से गूंजा। शिरोमणी अकाली दल की वरिष्ठ नेता और बठिंडा से सांसद हरसिमरत कौर बादल ने गुरुवार, 2 अप्रैल को संसद में बोलते हुए केंद्र सरकार से पूर्ववर्ती अकाली दल सरकार द्वारा 2016 में पंजाब विधानसभा में पारित बेअदबी विरोधी विधेयक (Anti Sacrilege Bill) को तत्काल मंजूरी देने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने 30 साल से जेल में बंद भाई बलवंत सिंह राजोआणा की तुरंत रिहाई की भी मांग उठाई।
‘इंदिरा गांधी को मां कहने वाले राजा वड़िंग ने बेअदबी पर कभी नहीं मांगा न्याय’
संसद में बोलते हुए हरसिमरत कौर बादल ने कांग्रेस और उसके प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि राजा वड़िंग पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को अपनी मां कहकर बुलाते हैं, जबकि इंदिरा गांधी ने श्री दरबार साहिब (स्वर्ण मंदिर) पर सैनिक कार्रवाई करवाई थी।
बीबा बादल ने इस हमले को “जघन्य बेअदबी” करार दिया और कहा कि इस कार्रवाई में सैकड़ों पवित्र ग्रंथ तबाह हो गए। लेकिन इतनी बड़ी बेअदबी के बावजूद राजा वड़िंग ने इस मुद्दे पर कभी न्याय की मांग करना तो बहुत दूर की बात, हमेशा चुप्पी साधे बैठे रहे। यह बात पंजाब की धार्मिक भावनाओं से गहराई से जुड़ी हुई है और इसीलिए Anti Sacrilege Bill की मंजूरी और भी जरूरी हो जाती है।
‘AAP सरकार में बेअदबी की घटनाएं तेजी से बढ़ीं’
हरसिमरत कौर बादल ने आम आदमी पार्टी (AAP) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि AAP समाज में अशांति पैदा करने और बंटवारा करने के लिए पवित्र ग्रंथों की बेअदबी के लिए जिम्मेदार है। उन्होंने विस्तार से बताया कि पंजाब में AAP के सत्ता में आते ही धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी की घटनाओं में तेजी आई।
बीबा बादल ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि कांग्रेस और AAP सरकारों के कार्यकाल में पिछले दस सालों में पंजाब में बेअदबी के कुल 597 मामले दर्ज हुए, लेकिन इनमें से केवल 44 लोगों को ही दोषी ठहराया गया। इसका मतलब है कि दोषसिद्धि की सफलता दर मात्र 7 फीसदी है, जो बेहद चिंताजनक और शर्मनाक है। ये आंकड़े बताते हैं कि Anti Sacrilege Bill के बिना बेअदबी जैसे संवेदनशील अपराधों पर प्रभावी कार्रवाई संभव नहीं है।
‘भाई बलवंत सिंह राजोआणा को तुरंत रिहा करो: हरसिमरत बादल’
Anti Sacrilege Bill के साथ-साथ हरसिमरत कौर बादल ने 30 साल से जेल में बंद भाई बलवंत सिंह राजोआणा की रिहाई की भी जोरदार मांग की। उन्होंने केंद्र सरकार को याद दिलाया कि गृह मंत्रालय (MHA) ने श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के अवसर पर मानवीय पहल के रूप में भाई राजोआणा की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदलने की मंजूरी पहले ही दे दी थी।
बीबा बादल ने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र सरकार से भाई राजोआणा की रिहाई पर तुरंत फैसला लेने का आग्रह किया था। उन्होंने सवाल उठाया कि जब गृह मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है और सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है, तो फिर उनकी रिहाई में और देरी क्यों की जा रही है। यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि लाखों सिख परिवारों की भावनाओं से भी जुड़ा हुआ है।
‘बेअदबी का मुद्दा: पंजाब की राजनीति की सबसे संवेदनशील नस’
Anti Sacrilege Bill और भाई राजोआणा की रिहाई दोनों ही ऐसे मुद्दे हैं जो पंजाब की धार्मिक और राजनीतिक भावनाओं की सबसे गहरी नस को छूते हैं। 2016 में अकाली दल सरकार ने यह विधेयक पंजाब विधानसभा में पारित किया था, लेकिन आज तक केंद्र सरकार ने इसे मंजूरी नहीं दी है। पंजाब में बेअदबी की घटनाएं हमेशा से कानून-व्यवस्था और सामाजिक सद्भाव के लिए बड़ी चुनौती रही हैं।
बेअदबी के 597 मामलों में सिर्फ 7 फीसदी दोषसिद्धि दर इस बात को साफ तौर पर रेखांकित करती है कि मौजूदा कानूनी ढांचा इस गंभीर अपराध से निपटने में कितना अपर्याप्त है। ऐसे में Anti Sacrilege Bill की मंजूरी न सिर्फ कानूनी बल्कि सामाजिक जरूरत बन चुकी है। वहीं भाई राजोआणा का मामला भी एक ऐसा विषय है जिस पर राजनीतिक सहमति बनना बाकी है, और यह मांग अब संसद के पटल तक पहुंच गई है।
मुख्य बातें (Key Points)
- हरसिमरत कौर बादल ने संसद में 2016 के Anti Sacrilege Bill को केंद्र सरकार से तुरंत मंजूरी देने की मांग की।
- 30 साल से जेल में बंद भाई बलवंत सिंह राजोआणा की रिहाई की भी मांग उठाई।
- पिछले 10 सालों में पंजाब में बेअदबी के 597 मामले दर्ज हुए, सिर्फ 44 में दोषसिद्धि: सफलता दर मात्र 7%।
- गृह मंत्रालय ने पहले ही भाई राजोआणा की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदलने की मंजूरी दी थी, सुप्रीम कोर्ट ने भी जल्द फैसले का आग्रह किया था।













