Harish Rana Passive Euthanasia: गाजियाबाद के हरीश राणा की लाइफ सपोर्ट सिस्टम अब हटा दी गई है। करीब 13 सालों से कोमा में पड़े हरीश राणा को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उनके घर से दिल्ली एम्स (AIIMS) में शिफ्ट किया गया है, जहां डॉक्टरों की एक विशेष टीम पैसिव यूथेनेसिया की प्रक्रिया पूरी कर रही है। इस बीच सोशल मीडिया पर हरीश राणा से जुड़ा 22 सेकंड का एक बेहद भावुक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें उन्हें इस दुनिया से विदा करने की तैयारियां दिखाई जा रही हैं। इस वीडियो ने लाखों लोगों की आंखें नम कर दी हैं।
A final farewell to Harish Rana, who had been in a coma in Ghaziabad for 13 years!
Harish has now arrived at AIIMS Delhi Here, his life support systems will be withdrawnand he will be granted the right to a dignified death. In this entire country, no one was able to cure Harish. pic.twitter.com/yE2jA3x9ND— Ankur Shukla (@AnkurSh50380788) March 15, 2026
13 साल से बिस्तर पर बेसुध पड़े थे Harish Rana
Harish Rana Passive Euthanasia का यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। हरीश राणा लगभग 13 सालों से बिस्तर पर बेसुध अवस्था में पड़े थे। इतने लंबे समय से कोमा में रहने के बाद डॉक्टरों ने साफ कह दिया था कि उनके ठीक होने की कोई उम्मीद नहीं बची है। न वे बोल सकते थे, न चल सकते थे और न ही किसी से कोई संवाद कर सकते थे। उनका पूरा अस्तित्व केवल मशीनों के सहारे टिका हुआ था।
13 साल तक एक इंसान का इस तरह बिस्तर पर पड़े रहना सिर्फ मरीज के लिए ही नहीं, बल्कि उसके पूरे परिवार के लिए भी अकल्पनीय पीड़ा है। हर रोज उम्मीद और निराशा के बीच झूलते रहना, यह दर्द शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। इसी पीड़ा से राहत पाने के लिए हरीश राणा के परिवार ने यूथेनेसिया की अर्जी लगाई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने AIIMS की रिपोर्ट के आधार पर दिया था ऐतिहासिक फैसला
Harish Rana Passive Euthanasia को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एम्स दिल्ली की मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर अपना फैसला सुनाया। एम्स के डॉक्टरों ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर कहा था कि हरीश राणा के ठीक होने की कोई मेडिकल संभावना शेष नहीं है। इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर सुप्रीम कोर्ट ने यूथेनेसिया याचिका पर फैसला सुनाया और निर्देश दिया कि हरीश राणा की अंतिम चिकित्सा प्रक्रियाएं एम्स में सम्मानजनक ढंग से पूरी की जाएं।
कोर्ट के इस आदेश के बाद हरीश राणा को उनके गाजियाबाद स्थित घर से दिल्ली एम्स में स्थानांतरित किया गया। वहां डॉक्टरों की एक विशेष टीम ने पैसिव यूथेनेसिया की प्रक्रिया शुरू की और उनकी लाइफ सपोर्ट सिस्टम को हटा दिया गया। यह भारत में पैसिव यूथेनेसिया का एक बेहद संवेदनशील और चर्चित मामला बन गया है।
क्या होती है Passive Euthanasia: समझें आसान भाषा में
Harish Rana Passive Euthanasia के इस मामले को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि यूथेनेसिया आखिर होती क्या है। जब कोई व्यक्ति किसी गंभीर और लाइलाज बीमारी से पीड़ित होता है और उसे असहनीय पीड़ा से गुजरना पड़ रहा होता है, तब उसके जीवन-रक्षक उपचार को वापस लेने की प्रक्रिया को यूथेनेसिया कहा जाता है।
यूथेनेसिया दो प्रकार की होती है: एक्टिव (सक्रिय) और पैसिव (निष्क्रिय)। पैसिव यूथेनेसिया में मरीज को कोई दवा देकर मारा नहीं जाता, बल्कि उसके इलाज और लाइफ सपोर्ट सिस्टम को धीरे-धीरे हटा दिया जाता है, ताकि मरीज कुदरती तरीके से इस दुनिया से विदा हो सके। भारत में सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में पैसिव यूथेनेसिया को कुछ शर्तों के साथ कानूनी मान्यता दी थी। हरीश राणा का मामला उसी कानूनी ढांचे के तहत आगे बढ़ा है।
22 सेकंड का वह वीडियो जिसने सबकी आंखें नम कर दीं
Harish Rana Passive Euthanasia से जुड़ा सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा 22 सेकंड का वीडियो हर किसी के दिल को छू गया है। इस छोटे से वीडियो में हरीश राणा बिस्तर पर लेटे दिखाई दे रहे हैं, उनकी नजरें ऊपर की ओर टिकी हुई हैं। उनकी आंखों में 13 साल की पीड़ा साफ झलक रही है, लेकिन साथ ही उनके चेहरे पर एक अजीब सी शांति भी दिखाई देती है, मानो उन्हें एहसास हो रहा हो कि अब वे उस असहनीय दर्द से आखिरकार मुक्त होने वाले हैं।
वीडियो में एक महिला हरीश के माथे पर चंदन का तिलक लगाती दिखाई देती हैं। वे बड़े प्यार से उनके सिर को सहलाती हैं और भावुक होकर कहती हैं: “सारों को माफ करते हुए… सारों से माफी मांगते हुए अब जाओ…”
ये शब्द सुनकर वीडियो देखने वाला हर शख्स भावुक हो उठा। सिर्फ 22 सेकंड का यह वीडियो इतना दर्दनाक और मार्मिक है कि इसे देखने के बाद हर किसी की आंखें भर आईं। सोशल मीडिया पर लोग इस वीडियो को शेयर करते हुए हरीश राणा की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।
जीवन और मृत्यु के बीच का सबसे कठिन फैसला
Harish Rana Passive Euthanasia का यह मामला हमारे समाज के सामने कई गहरे सवाल खड़े करता है। एक तरफ जीवन का अधिकार है जो हर इंसान का मूलभूत अधिकार माना जाता है, तो दूसरी तरफ सम्मान के साथ मरने का अधिकार भी उतना ही अहम है। जब कोई व्यक्ति 13 साल तक बिना किसी चेतना के, बिना किसी उम्मीद के सिर्फ मशीनों के सहारे जिंदा रहता है, तो उसके परिवार के लिए हर गुजरता दिन एक नई तकलीफ लेकर आता है।
हरीश राणा के परिवार ने जो फैसला लिया, वह शायद दुनिया का सबसे मुश्किल फैसला है। अपने ही अपनों को जाने देने की इजाजत देना कोई आसान बात नहीं है। लेकिन कभी-कभी प्यार का मतलब होता है किसी को उसकी पीड़ा से मुक्त करना, भले ही इसके लिए अपना दिल तोड़ना पड़े। यह मामला पूरे देश को यह सोचने पर मजबूर करता है कि जिंदगी का असली मतलब सिर्फ सांसें चलते रहना नहीं, बल्कि सम्मान और चेतना के साथ जीना है।
पूरे देश में चर्चा का विषय बना यह मामला
Harish Rana Passive Euthanasia को लेकर पूरे देश में बहस छिड़ गई है। एक तरफ कुछ लोग इसे मानवता का सबसे संवेदनशील कदम मान रहे हैं, तो वहीं कुछ लोगों का कहना है कि जब तक सांस चल रही है तब तक उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। लेकिन मेडिकल साइंस की नजर से देखें तो 13 साल तक कोमा में रहने के बाद रिकवरी की संभावना लगभग शून्य हो जाती है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में बहुत सावधानी बरती है। एम्स जैसे देश के सबसे प्रतिष्ठित अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर ही यह फैसला लिया गया है, ताकि किसी भी तरह की चिकित्सकीय लापरवाही की गुंजाइश न रहे। अंतिम प्रक्रिया भी एम्स में ही सम्मानजनक तरीके से पूरी किए जाने का निर्देश दिया गया, जो दर्शाता है कि अदालत ने हरीश राणा की गरिमा का पूरा ध्यान रखा है।
मुख्य बातें (Key Points)
- हरीश राणा गाजियाबाद के रहने वाले थे और लगभग 13 सालों से कोमा में बिस्तर पर बेसुध पड़े थे, डॉक्टरों ने ठीक होने की कोई उम्मीद नहीं जताई थी।
- सुप्रीम कोर्ट ने AIIMS दिल्ली की मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर पैसिव यूथेनेसिया की याचिका पर फैसला सुनाया और लाइफ सपोर्ट हटाने का आदेश दिया।
- सोशल मीडिया पर वायरल 22 सेकंड के भावुक वीडियो में एक महिला हरीश के माथे पर तिलक लगाते हुए कहती हैं: “सारों को माफ करते हुए… अब जाओ”, जिसने लाखों लोगों को रुला दिया।
- पैसिव यूथेनेसिया में मरीज की लाइफ सपोर्ट धीरे-धीरे हटाकर उसे कुदरती तरीके से विदा होने दिया जाता है, भारत में इसे सुप्रीम कोर्ट ने शर्तों के साथ कानूनी मान्यता दी है।







