Cigarette Tobacco GST Changes : 1 फरवरी 2026 से तंबाकू और इससे जुड़े उत्पादों पर GST की गणना का तरीका पूरी तरह बदलने जा रहा है। अब टैक्स पैकेट पर लिखे Retail Sale Price (RSP) यानी MRP के आधार पर तय होगा। इसका मतलब है कि कंपनियां कितने में बेच रही हैं, कितनी छूट दे रही हैं या नेगोशिएटेड प्राइस क्या है — इन सबका टैक्स पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
सरकार ने जारी किया नोटिफिकेशन
सरकार ने 31 दिसंबर 2025 को नोटिफिकेशन 19/2025 और 20/2025 जारी किया। इसके जरिए निम्नलिखित उत्पादों को RSP मॉडल में शामिल किया गया है:
| उत्पाद | HSN कोड |
|---|---|
| पान मसाला | 2106 |
| बिना मैन्युफैक्चर वाला तंबाकू | 2401 |
| सिगरेट | 2402 |
| सिगार | 2403 |
| निकोटिन-आधारित इनहेलेशन प्रोडक्ट्स | 2404 |
RSP मॉडल क्या है?
इस नए मॉडल में GST की गणना सीधे पैकेट पर छपी MRP से होगी। पहले टैक्स कंपनी की बिक्री कीमत पर लगता था, लेकिन अब चाहे कंपनी कितनी भी छूट क्यों न दे, टैक्स RSP से ही कैलकुलेट होगा।
इससे तंबाकू उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी होने की संभावना है क्योंकि कंपनियां अब टैक्स बचाने के लिए डिस्काउंट का तरीका नहीं अपना पाएंगी।
सिस्टम में आई बड़ी समस्या
लेकिन एक बड़ी समस्या सामने आई है। GST का पूरा सिस्टम — e-Invoice, e-Way Bill और GSTR-1 — अभी भी पुराने मॉडल पर टिका हुआ है। पुराने सिस्टम में नियम है कि Taxable Value + Tax मिलाकर Invoice Value से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
RSP मॉडल में कई बार RSP से निकली Deemed Taxable Value असली बिक्री कीमत से काफी ज्यादा होती है। ऐसे में:
- सिस्टम इनवॉइस को रिजेक्ट कर देता है
- e-Way Bill नहीं बनता
- रिटर्न फाइलिंग में एरर आने लगते हैं
इंडस्ट्री में डर था कि फरवरी 2026 के बाद कामकाज ठप पड़ सकता है।
GSTN ने जारी की एडवाइजरी
इसी समस्या को देखते हुए GSTN (GST Network) ने कंपनियों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है। कानून को बदले बिना सिस्टम को चलाने के लिए यह तरीका अपनाने के लिए कहा गया है:
- Taxable Value में असली सेल प्राइस रिपोर्ट करें (जो कीमत कंपनी ने वाकई में ली है)
- GST की गणना RSP वाले फॉर्मूले से ही करें (क्योंकि कानून यही कहता है)
- Invoice Value = असली सेल प्राइस + RSP से निकला टैक्स
- जरूरत हो तो GSTR-1 में टैक्स को मैनुअल एडिट करें ताकि RSP मॉडल से मैच हो सके
सिर्फ तंबाकू उत्पादों के लिए है यह नियम
GSTN ने साफ किया है कि यह तरीका सिर्फ तंबाकू वाले नोटिफाइड HSN कोड्स के लिए है। यह कानून को बदलने के लिए नहीं है, बल्कि सिस्टम मिसमैच को रोकने के लिए किया गया है।
आम आदमी पर क्या असर?
इस बदलाव से सिगरेट, पान मसाला और तंबाकू उत्पादों की कीमतें बढ़ सकती हैं। अब तक कई कंपनियां डिस्काउंट देकर कम टैक्स चुकाती थीं, लेकिन अब ऐसा संभव नहीं होगा।
हालांकि सरकार का मकसद तंबाकू उत्पादों पर टैक्स चोरी रोकना और इनकी खपत कम करना है।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- 1 फरवरी 2026 से तंबाकू उत्पादों पर GST पैकेट पर लिखे RSP (MRP) से तय होगा
- पान मसाला, सिगरेट, सिगार, निकोटिन प्रोडक्ट्स पर लागू होगा नया नियम
- डिस्काउंट या नेगोशिएटेड प्राइस का टैक्स पर कोई फायदा नहीं मिलेगा
- GSTN ने सिस्टम मिसमैच रोकने के लिए एडवाइजरी जारी की








