Govt Job Scam ED Raid को लेकर देशभर में हड़कंप मच गया है। हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय ने सरकारी नौकरी के नाम पर चल रहे एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा करते हुए बिहार समेत छह राज्यों में एकसाथ छापेमारी की। शुरुआती जांच में यह मामला रेलवे तक सीमित माना जा रहा था, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, यह घोटाला 40 से ज्यादा सरकारी विभागों तक फैला हुआ सामने आया। यह कार्रवाई ऐसे वक्त हुई है, जब देश में सरकारी नौकरी की तलाश में लाखों युवा सक्रिय हैं।
रेलवे से शुरू हुआ, लेकिन दायरा बेहद बड़ा
जांच एजेंसी के मुताबिक, इस फर्जीवाड़े की जड़ें पहले रेलवे से जुड़ी दिखाई दीं, लेकिन बाद में सामने आया कि यह एक संगठित नेटवर्क है। इस गिरोह ने सरकारी विभागों के नाम पर फर्जी नियुक्ति पत्र जारी किए और लोगों को नौकरी का झांसा दिया। सबसे खतरनाक बात यह रही कि फर्जी ईमेल आईडी को इस तरह तैयार किया गया, जो हूबहू असली सरकारी ईमेल जैसी लगती थी।
नकली नियुक्ति, असली भरोसा
ठगों ने उम्मीदवारों को यह यकीन दिलाया कि उनकी नियुक्ति रेलवे या अन्य सरकारी विभागों में हो चुकी है। कई मामलों में भरोसा बढ़ाने के लिए कुछ लोगों को रेलवे सुरक्षा बल, टिकट चेकर या टेक्नशियन जैसे पदों पर काम करता हुआ भी दिखाया गया। यहां तक कि शुरुआती 2 से 3 महीने की सैलरी भी दी गई, ताकि किसी को शक न हो।
भरोसा बनते ही वसूली
जैसे ही उम्मीदवारों को लगने लगा कि नौकरी पक्की है, उनसे मोटी रकम वसूल ली जाती थी। इसके बाद धीरे-धीरे संपर्क खत्म कर दिया जाता था। कई पीड़ितों को तब सच्चाई का एहसास हुआ, जब न नौकरी रही और न ही ठगों का कोई पता चला।
रेलवे क्लेम घोटाले का भी खुलासा
ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि यह गिरोह सिर्फ फर्जी नौकरियों तक सीमित नहीं था। रेलवे क्लेम के नाम पर भी बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया। हादसों में घायल या मृत लोगों के नाम पर फर्जी क्लेम दाखिल किए गए, यहां तक कि उन लोगों के नाम पर भी मुआवजा लिया गया, जो कभी किसी रेलवे हादसे का शिकार ही नहीं हुए थे। इससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।
छह राज्यों में 15 ठिकानों पर छापेमारी
इस पूरे मामले में ईडी ने बिहार के मुजफ्फरपुर और मोतिहारी, पश्चिम बंगाल के कोलकाता, केरल, तमिलनाडु, गुजरात और उत्तर प्रदेश में कुल 15 ठिकानों पर छापेमारी की है। जांच एजेंसी को बड़ी मात्रा में दस्तावेज, डिजिटल सबूत और लेनदेन से जुड़े अहम सुराग मिलने की उम्मीद है।
40 से ज्यादा विभागों के नाम का दुरुपयोग
जांच में साफ हुआ है कि फर्जी नियुक्तियां केवल रेलवे तक सीमित नहीं थीं। वन विभाग, आयकर विभाग, उच्च न्यायालय, लोक निर्माण विभाग (PWD) और बिहार सरकार के नाम पर भी फर्जी नियुक्ति दिखाकर लोगों को ठगा गया।
विश्लेषण: युवाओं के सपनों से खिलवाड़
यह घोटाला सिर्फ आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं के भरोसे के साथ धोखा है, जो सरकारी नौकरी को सुरक्षित भविष्य मानते हैं। ईडी की यह कार्रवाई एक कड़ा संदेश देती है कि सरकारी नौकरी और मुआवजे के नाम पर होने वाली वित्तीय धोखाधड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और बड़े खुलासे होने की संभावना है।
मुख्य बातें (Key Points)
- ईडी ने छह राज्यों में एकसाथ छापेमारी की
- रेलवे से शुरू हुआ घोटाला 40 से ज्यादा विभागों तक फैला
- फर्जी नियुक्ति पत्र और नकली सरकारी ईमेल का इस्तेमाल
- रेलवे क्लेम में भी करोड़ों का फर्जीवाड़ा सामने आया








