Pakistani citizenship government job : उत्तर प्रदेश के Rampur जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक महिला ने पाकिस्तानी नागरिकता होते हुए भी खुद को भारतीय बताकर बेसिक शिक्षा विभाग में वर्षों तक सरकारी शिक्षिका के रूप में काम किया। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने फर्जी दस्तावेजों के आरोप में जांच शुरू कर दी है।
कौन है आरोपी महिला
आरोपी महिला की पहचान Mahira Akhtar उर्फ फरजाना के रूप में हुई है। वह थाना अजीमनगर क्षेत्र के राम कमरिया प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका के पद पर तैनात थी।
कैसे सामने आया फर्जीवाड़ा
जांच में सामने आया कि 1969 में पाकिस्तानी नागरिक से शादी के बाद महिला पाकिस्तानी नागरिक बन गई थी। तलाक के बाद वह फरजाना नाम से पाकिस्तानी पासपोर्ट पर भारत लौटी और 1985 में रामपुर में दूसरी शादी की। बाद में उसने अपनी पुरानी भारतीय पहचान का इस्तेमाल कर शिक्षा विभाग में नौकरी हासिल कर ली।
फर्जी दस्तावेज और कानूनी धाराएं
महिला पर भारतीय दंड संहिता की 318, 336, 338 और 340 जैसी धाराओं में धोखाधड़ी और कूट रचना का अभियोग दर्ज किया गया है। आरोप है कि उसने फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनवाकर सरकारी नौकरी हासिल की।
प्रशासन और विभाग की कार्रवाई
पाकिस्तानी नागरिकता का राज खुलते ही शिक्षा विभाग ने पहले महिला को निलंबित किया और फिर बर्खास्त कर दिया। विभागीय रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। फिलहाल गिरफ्तारी नहीं हुई है और साक्ष्य संकलन की प्रक्रिया जारी है।
आम लोगों पर असर
इस मामले ने सरकारी भर्ती प्रक्रिया और दस्तावेज सत्यापन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम लोगों में यह चिंता है कि अगर समय रहते जांच न हो तो ऐसे फर्जीवाड़े लंबे समय तक छिपे रह सकते हैं।
क्या है पृष्ठभूमि
आरोपी महिला की शिक्षा और बीटीसी प्रशिक्षण रामपुर से ही हुआ था। 1991 में तत्कालीन जिला अधिकारी द्वारा जारी निवास प्रमाण पत्र के आधार पर वह लंबे समय तक सरकारी सेवा में बनी रही। अब उसी प्रमाण पत्र की वैधता जांच के घेरे में है।
मुख्य बातें (Key Points)
- पाकिस्तानी नागरिकता वाली महिला वर्षों तक सरकारी शिक्षिका रही।
- फर्जी निवास प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी का आरोप।
- शिक्षा विभाग ने निलंबन और बर्खास्तगी की कार्रवाई की।
- पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की।








