प्राइवेट अस्पतालों में होगा फ्री में इलाज! सरकार करने जा रही है ये बड़ा बदलाव?

नई दिल्ली, 19 अगस्त (The News Air)

PM Ayushman Bharat Scheme: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना आयुष्मान भारत स्कीम (Ayushman Bharat Scheme) में प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी बढ़ाने के लिए बड़े बदलाव की तैयारी है. हमारे सहयोगी चैनल Zee Business के मुताबिक़ आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना में अलग-अलग इलाज की दरें तय है और दरों में बदलाव नहीं होने की वजह से प्राइवेट सेक्टर के हॉस्पिटल इस योजना में बढ़-चढ़कर भाग नहीं लेते हैं. इसके चलते सरकार इलाज की दरों में बदलाव करने जा रही है. आयुष्‍मान भारत योजना (प्रधानमंत्री ज़न आरोग्‍य योजना) में प्रत्येक परिवार को सालाना 5 लाख रुपये का फ्री हेल्थ इंश्योरेंस कवर दिया जाता है.

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निजी अस्पतालों की बढ़ेगी भागीदारी- आपको बता दें कि नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (NHA) आयुष्मान भारत योजना की दरें तय करती है. NHA जल्द ही इलाज की दरों में बदलाव कर सकती हैं जिससे प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी भी बढ़े. हॉस्पिटल की दरों का स्टैंडर्डाइजेशन इस तरह से होगा कि अस्पताल ज़्यादा मुनाफ़ा नहीं कमाए, क्योंकि ज़न आरोग्य की इस योजना में वॉल्यूम काफ़ी बड़े स्तर पर होता है. इसके अलावा सरकार क्लेम सेटलमेंट की प्रक्रिया को भी तेज़ करने के लिए एक मॉडल तैयार कर रही है जिससे हॉस्पिटल का भुगतान तुरंत किया जा सके. आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत 2 करोड़ लोगों का इलाज हुआ है.

इलाज की दरें होंगी वाज़िब- नेशनल हेल्थ अथॉरिटी से जुड़ी एक अधिकारी ने जी बिजनेस को बताया कि इलाज की दरें वाज़िब नहीं होने की वजह से प्राइवेट हॉस्पिटल आयुष्मान भारत स्कीम से जुड़ना नहीं चाहते हैं. जबकि, दूसरी तरफ़ सरकारी हॉस्पिटल के लिए भी कुछ ट्रीटमेंट तय दरों से ज़्यादा हैं, लेकिन सरकारी हॉस्पिटल में बाक़ी इलाज मुफ़्त होता है इसलिए सरकारी हॉस्पिटल को ज़्यादा दिक्क़त नहीं है. आयुष्‍मान भारत योजना से जुड़े 23,000 हॉस्पिटल में फ़िलहाल प्राइवेट सेक्टर की हिस्सेदारी 40% के क़रीब है.

सरकारी-प्राइवेट हॉस्पिटल के रेट में काफ़ी अंतर- सरकारी अस्‍पतालों और प्राइवेट अस्‍पतालों के रेट में काफ़ी अंतर है. नेशनल हेल्थ अथॉरिटी का इलाज दरों में स्टैंडर्डाइजेशन का विचार कर रही है. सरकार के इस क़दम से आयुष्मान भारत में प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी बढ़ने की उम्‍मीद है. वहीं, प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी बढ़ने से आम लोगों को फ़ायदा होगा. मरीज़ों को ज़्यादा से ज़्यादा प्राइवेट अस्‍पतालों में 5 लाख रुपये तक का फ्री इलाज हो सकेगा.

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