Fungal Nail Infection यानी नाखूनों में फंगस लगना एक ऐसी समस्या है जिसे ज्यादातर लोग नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन अगर समय पर ध्यान न दिया जाए तो यह गंभीर रूप ले सकती है। त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रिया पूजा (त्वचा विशेषज्ञ एवं क्षेत्रीय चिकित्सा प्रमुख, काया लिमिटेड) के मुताबिक गीले जूते पहनना, नाखूनों को लंबे समय तक गीला रखना और सार्वजनिक जगहों पर नंगे पैर चलने जैसी रोजमर्रा की गलतियां इस संक्रमण की बड़ी वजह बनती हैं। इसी के साथ बॉलीवुड अभिनेता वरुण धवन ने खुलासा किया कि उनकी बेटी लारा को डेढ़ साल की उम्र में डीडीएच (डेवलपमेंटल डिस्प्लेजिया ऑफ द हिप) डायग्नोस हुआ था। वहीं डीमार्ट के हल्दी और लाल मिर्च पाउडर क्वालिटी टेस्ट में बुरी तरह फेल हो गए हैं।
1. Fungal Nail Infection: रोजमर्रा की गलतियां और घरेलू इलाज
क्या है Fungal Nail Infection और यह क्यों होता है
Fungal Nail Infection यानी नाखूनों में फंगस का बढ़ना एक ऐसी समस्या है जिसमें फंगस नामक सूक्ष्म जीव का संक्रमण हो जाता है। डॉ. प्रिया पूजा के मुताबिक यह समस्या ज्यादातर पैरों के नाखूनों में देखी जाती है, हालांकि हाथों के नाखूनों में भी यह हो सकती है। फंगस सिर्फ ब्रेड या रोटी पर ही नहीं लगता, बल्कि यह आपके नाखूनों पर भी लग सकता है और धीरे-धीरे गंभीर संक्रमण कर सकता है।
इसके मुख्य कारणों की बात करें तो पहला कारण है गीले या पसीने वाले जूते पहनना। दूसरा, लंबे समय तक नाखूनों को गीला रखना। तीसरा, सार्वजनिक जगहों जैसे स्विमिंग पूल या जिम में नंगे पैर चलना। और चौथा कारण है साफ-सफाई की कमी।
किन लोगों को Fungal Nail Infection का खतरा ज्यादा है
Fungal Nail Infection का खतरा सबको बराबर नहीं होता। डॉ. प्रिया पूजा ने बताया कि कुछ लोगों में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है। जिन लोगों को मधुमेह यानी डायबिटीज की बीमारी है, उनमें यह संक्रमण सबसे ज्यादा पाया जाता है। इसके अलावा जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है, बुजुर्ग लोग, जो लोग बहुत कसे हुए या टाइट जूते पहनते हैं और जिनके नाखूनों में पहले से कोई चोट या कट है, उन सभी में फंगस का संक्रमण होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
ऐसे पहचानें कि नाखूनों में Fungal Nail Infection हो गया है
Fungal Nail Infection के लक्षणों को पहचानना बहुत जरूरी है ताकि समय पर इलाज हो सके। डॉ. प्रिया पूजा ने इसके प्रमुख लक्षण बताए हैं। पहला लक्षण यह है कि नाखून का रंग जो आमतौर पर गुलाबी होता है, वह बदलकर पीला, भूरा या सफेद हो सकता है। कभी-कभी नाखून पर पीले, भूरे या सफेद रंग के धब्बे भी दिखाई दे सकते हैं।
दूसरा लक्षण है नाखून का मोटा और कठोर हो जाना। कभी-कभी नाखून बहुत जल्दी टूटने या बिखरने भी लगते हैं। नाखून का आकार बिगड़ सकता है और नाखून के नीचे गंदगी जैसी चीज जमा होने लगती है। अगर काफी दिनों तक फंगल संक्रमण बना रहे तो नाखूनों में दर्द होना और उनसे बदबू आना भी शुरू हो सकता है।
Fungal Nail Infection से बचाव और घरेलू इलाज
Fungal Nail Infection से बचाव के लिए डॉ. प्रिया पूजा ने कई अहम सुझाव दिए हैं। अगर आप काफी समय तक जूते पहनते हैं और उनमें पसीना आता है तो जूते पहनने से पहले पाउडर का छिड़काव जरूर करें। काफी देर तक पैर और नाखूनों को भीगा न रखें।
अगर शुरुआती दौर में नाखून में संक्रमण हो चुका है तो टी ट्री ऑयल दिन में एक या दो बार लगाने से फायदा हो सकता है। नारियल के तेल में भी फफूंदरोधी गुण होते हैं, इसलिए शुरुआती दौर में नारियल का तेल लगाने से भी लाभ मिल सकता है।
हालांकि अगर Fungal Nail Infection काफी दिनों से है तो सिर्फ घरेलू नुस्खों से काम नहीं चलेगा और त्वचा विशेषज्ञ से मिलना जरूरी हो जाता है। डॉ. प्रिया पूजा ने बताया कि आधुनिक चिकित्सा में एक बहुत अच्छी लेजर तकनीक उपलब्ध है जो 1064 नैनोमीटर एनडीवाईएजी लेजर पर काम करती है। इसमें लेजर की किरणें गहराई तक पहुंचकर फंगस पर नियंत्रित गर्मी डालती हैं, जिससे फंगस की कोशिकाएं और उसकी झिल्ली नष्ट हो जाती है। इससे दोबारा फंगस का विकास नहीं हो पाता और आसपास की सामान्य त्वचा भी सुरक्षित रहती है।
2. Varun Dhawan की बेटी को हुआ DDH: क्या है यह कंडीशन
वरुण धवन ने बताई बेटी लारा की मेडिकल कंडीशन
बॉलीवुड अभिनेता वरुण धवन ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में खुलासा किया कि उनकी बेटी लारा को डेढ़ साल की उम्र में DDH यानी डेवलपमेंटल डिस्प्लेजिया ऑफ द हिप डायग्नोस हुआ था। लारा अभी दो साल की होने वाली हैं।
वरुण ने बताया कि DDH में कूल्हे का जोड़ अपनी जगह से खिसक जाता है। एक पैर दूसरे से लंबा हो जाता है जिससे चलना बहुत मुश्किल हो जाता है। ठीक से दौड़ नहीं सकते, ठीक से चल नहीं सकते और गठिया या स्लिप डिस्क जल्दी हो सकता है। वरुण ने कहा कि पश्चिमी देशों में इसका जन्म के समय ही अच्छी तरह पता लगा लिया जाता है, लेकिन भारत में ऐसा हमेशा नहीं होता।
वरुण ने आगे बताया कि लारा की रिकवरी में समय पर पहचान और सही इलाज ने अहम भूमिका निभाई। लारा को सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ी, लेकिन उसे करीब ढाई महीने तक स्पाइका कास्ट (प्लास्टर) में रहना पड़ा जो बहुत मुश्किल होता है। इसी के जरिए डॉक्टर लारा का कूल्हे का जोड़ वापस अपनी जगह पर ला सके। अब लारा का कास्ट हट चुका है, वह ब्रेस में है और धीरे-धीरे रिकवर कर रही है।
क्या है DDH और इसके लक्षण कैसे पहचानें
DDH के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए शारदा केयर हेल्थ सिटी के अस्थि रोग विभाग के निदेशक एवं यूनिट प्रमुख डॉ. पुष्कर चावला ने बताया कि डेवलपमेंटल डिस्प्लेजिया ऑफ द हिप एक ऐसी कंडीशन है जिसमें बच्चे के कूल्हे का जोड़ सही से विकसित नहीं होता। इसमें कूल्हे का जोड़ या तो ढीला हो सकता है या अपनी जगह से खिसका हुआ हो सकता है।
कई बार बच्चे इस कंडीशन के साथ पैदा होते हैं तो कभी-कभी उनमें जन्म के बाद यह विकसित होती है। यह कंडीशन एक या दोनों कूल्हों पर असर डाल सकती है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि अक्सर माता-पिता को बच्चों में DDH होने का पता नहीं चलता क्योंकि इसमें आमतौर पर दर्द नहीं होता और दर्द न होने की वजह से बच्चा रोता नहीं है। ऐसे में जब तक दिक्कत का पता चलता है, कंडीशन आगे बढ़ चुकी होती है।
DDH के प्रमुख लक्षणों में बच्चे के एक या दोनों पैरों की लंबाई अलग दिखना, बच्चे को पैर खोलने में दिक्कत होना, जांघ या कूल्हे पर त्वचा की सिलवटें असमान होना, बच्चे का लंगड़ाकर चलना या उसे चलने में देरी होना शामिल हैं। ऐसा कोई भी लक्षण दिखे तो बच्चे को तुरंत डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए, जहां अल्ट्रासाउंड या एक्सरे से इस कंडीशन का पता लगाया जा सकता है।
किन बच्चों को DDH का खतरा ज्यादा और इलाज कैसे होता है
डॉ. पुष्कर चावला ने बताया कि वैसे तो किसी भी बच्चे को DDH हो सकता है, लेकिन कुछ बच्चों में इसका खतरा ज्यादा होता है। जो बच्चे ब्रीच पोजीशन (उल्टी स्थिति) में पैदा होते हैं, जिनके परिवार में पहले किसी को यह समस्या रही हो, जो अपने माता-पिता का पहला बच्चा हो या लड़की हो, उनमें DDH का खतरा अधिक रहता है।
इलाज तीन तरीकों से किया जाता है। पहला तरीका है ब्रेस लगाना, जो पट्टे जैसा होता है और बच्चे के कंधों और पैरों में लगाया जाता है। यह कूल्हे को सही स्थिति में रखकर जोड़ को धीरे-धीरे सही तरीके से विकसित होने में मदद करता है। छोटे बच्चों में यह सबसे आम और कारगर इलाज है।
दूसरा तरीका है प्लास्टर लगाना। अगर ब्रेस से पूरा फायदा नहीं होता तो बच्चे की कमर से लेकर पैरों तक प्लास्टर लगाया जाता है ताकि जोड़ हिले नहीं और सही जगह पर बना रहे। तीसरा तरीका है सर्जरी। अगर दिक्कत ज्यादा गंभीर हो या देर से पता चले तो डॉक्टर ऑपरेशन करके जोड़ को सही जगह पर सेट करते हैं। डॉक्टर किस तरीके से इलाज करेंगे, यह बच्चे की उम्र और DDH की गंभीरता पर निर्भर करता है। इसीलिए जन्म के बाद बच्चे का नियमित चेकअप होते रहना बेहद जरूरी है।
3. DMart Spices Quality Test Fail: हल्दी-मिर्च में मिले खतरनाक बैक्टीरिया
डीमार्ट के हल्दी और लाल मिर्च पाउडर क्वालिटी टेस्ट में फेल
DMart Spices की क्वालिटी पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। डीमार्ट के हल्दी पाउडर और लाल मिर्च पाउडर क्वालिटी टेस्ट में फेल हो गए हैं। यह टेस्टिंग ट्रस्टिफाइड नाम के एक यूट्यूब चैनल ने कराई थी। इस चैनल ने 29 मार्च 2026 को एक वीडियो पोस्ट कर इसकी जानकारी दी।
चैनल ने कई स्तरों पर हल्दी और लाल मिर्च पाउडर का क्वालिटी टेस्ट कराया। DMart Spices के हल्दी पाउडर में भारी धातुएं (हैवी मेटल्स), अल्फा टॉक्सिंस, सिंथेटिक वॉटर सॉल्यूबल डाइज और कीटनाशक सुरक्षित सीमा के अंदर मिले। लेकिन सूक्ष्मजैविक परीक्षण (माइक्रोबायोलॉजिकल टेस्टिंग) में यह उत्पाद बुरी तरह फेल हो गया।
एफएसएसएआई की सुरक्षित सीमा से कई गुना ज्यादा मिले बैक्टीरिया
DMart Spices के हल्दी पाउडर की टेस्ट रिपोर्ट चौंकाने वाली है। इसमें एंटेरोबैक्टीरियेसी बैक्टीरिया एफएसएसएआई की सुरक्षित सीमा से 2.3 गुना ज्यादा मिला। टोटल प्लेट काउंट (टीपीसी) 8.7 गुना ज्यादा पाया गया। सबसे चौंकाने वाला यह रहा कि यीस्ट और मोल्ड एफएसएसएआई की सुरक्षित सीमा से 36 गुना ज्यादा मिले।
DMart Spices के लाल मिर्च पाउडर का हाल और भी बुरा रहा। इसमें भी हैवी मेटल्स, अल्फा टॉक्सिंस, सिंथेटिक डाइज और कीटनाशक सुरक्षित सीमा में थे, लेकिन सूक्ष्मजैविक परीक्षण में यह भी फेल हो गया। लाल मिर्च पाउडर में एंटेरोबैक्टीरियेसी बैक्टीरिया एफएसएसएआई की सुरक्षित सीमा से 21 गुना ज्यादा मिला। टीपीसी डेढ़ गुना और यीस्ट व मोल्ड 27 गुना ज्यादा पाए गए।
इन बैक्टीरिया का सेहत पर क्या खतरनाक असर होता है
DMart Spices में मिले इन बैक्टीरिया के खतरों के बारे में नारायणा हॉस्पिटल गुरुग्राम के यकृत प्रत्यारोपण एवं एचपीबी सर्जरी के निदेशक डॉ. संजय गोजा ने विस्तार से बताया।
डॉ. संजय गोजा ने कहा कि एंटेरोबैक्टीरियेसी बैक्टीरिया की एक बड़ी परिवार है। इसके अंदर ईकोलाई, साल्मोनेला और क्लेब्सिएला जैसे कई तरह के बैक्टीरिया आते हैं। ये बैक्टीरिया हमारी आंत में रहते हैं और आमतौर पर नुकसान नहीं करते, लेकिन अगर किसी उत्पाद में ये ज्यादा मात्रा में मिलें तो इसका मतलब है कि उस उत्पाद को बनाते समय साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखा गया। ऐसा उत्पाद लगातार ज्यादा मात्रा में खाने से दस्त, पेट दर्द, उल्टी, फूड पॉइजनिंग और पेट के संक्रमण हो सकते हैं। खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों के लिए यह ज्यादा खतरनाक है।
टीपीसी यानी टोटल प्लेट काउंट से उत्पाद में मौजूद कुल बैक्टीरिया की मात्रा का पता चलता है। अगर किसी उत्पाद में यह ज्यादा मिला है तो इसका मतलब है कि उसमें बैक्टीरिया की संख्या बहुत ज्यादा है। यह खराब स्वच्छता, गलत भंडारण या प्रसंस्करण के दौरान हुई गड़बड़ी की ओर इशारा करता है।
मोल्ड से कैंसर तक का खतरा, ऐसे करें बचाव
डॉ. संजय गोजा ने बताया कि अगर किसी उत्पाद में यीस्ट या मोल्ड ज्यादा है तो इसका मतलब उत्पाद को सही से भंडारित नहीं किया गया और अब वह खाने योग्य नहीं रहा। ज्यादा यीस्ट मोल्ड वाला उत्पाद लगातार काफी समय तक खाने से पेट खराब हो सकता है, उल्टी-दस्त लग सकते हैं और फूड पॉइजनिंग भी हो सकती है।
मोल्ड से जुड़ा एक और बड़ा खतरा यह है कि कुछ मोल्ड विषैले तत्व बनाते हैं जो यकृत (लिवर) को नुकसान पहुंचा सकते हैं। लंबे समय में ये कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की वजह भी बन सकते हैं। उल्लेखनीय है कि कुछ समय पहले एवरेस्ट के चार मसाले भी क्वालिटी टेस्ट में फेल हुए थे।
मसालों को सुरक्षित रखने के लिए क्या करें
डॉक्टरों ने मसालों को सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल करने के लिए कई सुझाव दिए हैं। अगर बाहर से मसाला खरीद रहे हैं तो उसे सूखा भूनकर इस्तेमाल करें। मसाले हमेशा सूखी और ठंडी जगह पर रखें। खुले मसाले कम खरीदें और सिर्फ एक ही ब्रांड पर निर्भर न रहें। सबसे अच्छा यह है कि घर पर ही साबुत मसाला खरीदकर पीस लें। साथ ही खाने को अच्छी तरह पकाएं, इससे कई बैक्टीरिया अपने आप कम हो जाएंगे।
एफएसएसएआई को चाहिए कि वह सभी उत्पादों की क्वालिटी टेस्टिंग कराए। जिस भी उत्पाद में गड़बड़ी निकले, उसे तुरंत बाजार से हटाया जाए और जिम्मेदार कंपनी पर कड़ी कार्रवाई हो।
मुख्य बातें (Key Points)
- Fungal Nail Infection गीले जूते पहनने, नाखून गीले रखने और सार्वजनिक जगहों पर नंगे पैर चलने से होता है। शुरुआती दौर मेंटी ट्री ऑयल और नारियल तेल से राहत मिल सकती है, गंभीर होने पर लेजर तकनीक से इलाज संभव है।
- वरुण धवन की बेटी लारा को डेढ़ साल की उम्र में DDH (कूल्हे के जोड़ का सही से विकसित न होना) डायग्नोस हुआ। ढाई महीने प्लास्टर में रहने के बाद अब वह धीरे-धीरे ठीक हो रही है।
- डीमार्ट के हल्दी पाउडर में यीस्ट-मोल्ड 36 गुना और लाल मिर्च पाउडर में एंटेरोबैक्टीरियेसी बैक्टीरिया 21 गुना ज्यादा मिले, दोनों क्वालिटी टेस्ट में फेल हुए।
- डॉक्टरों ने चेतावनी दी कि दूषित मसालों के लगातार सेवन से फूड पॉइजनिंग, पेट के संक्रमण और लंबे समय में लिवर डैमेज तथा कैंसर
तक का खतरा हो सकता है।






