FSSAI Milk Licence को लेकर केंद्र सरकार ने एक ऐसा बड़ा फैसला लिया है जो देश के हर दूध उत्पादक और दूध विक्रेता को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने दूध उत्पादन और बिक्री को लेकर एक नई एडवाइजरी जारी की है, जिसके तहत अब कोई भी व्यक्ति या संस्था बिना लाइसेंस के दूध का कारोबार नहीं कर पाएगी। गाय, भैंस या बकरी पालकर दूध उत्पादन करने वाले हों या गलियों में दूध बेचने वाले दूधिए, सभी को FSSAI से अनिवार्य तौर पर लाइसेंस लेना होगा। यह फैसला देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
दूध में मिलावट की बढ़ती घटनाओं ने मजबूर किया सरकार को
FSSAI Milk Licence का यह फैसला ऐसे वक्त में आया है जब देश भर में दूध, पनीर और मावा में मिलावट की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। दिल्ली एनसीआर से लेकर देश के दूर-दराज के हिस्सों तक मिलावटी दूध और दुग्ध उत्पादों से लोग परेशान हैं। ग्राहकों के सामने शुद्ध दूध की पहचान करने का कोई पुख्ता तरीका नहीं है और वे मजबूरी में मिलावटी दूध, पनीर और मावा खरीद रहे हैं।
स्थिति कितनी गंभीर है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में बीते 22 फरवरी को कथित तौर पर मिलावटी दूध पीने से 13 लोगों की मौत हो गई थी और 11 अन्य लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। इस तरह की दर्दनाक घटनाओं ने सरकार को कड़ा कदम उठाने पर मजबूर किया।
किन लोगों को लेना होगा FSSAI Milk Licence
FSSAI ने अपनी एडवाइजरी में साफ कर दिया है कि यह नियम उन सभी पर लागू होगा जो दूध के कारोबार से जुड़े हैं। चाहे कोई गाय पालकर दूध उत्पादन करता हो, भैंस या बकरी का दूध बेचता हो, या फिर गलियों और मोहल्लों में घर-घर जाकर दूध की सप्लाई करता हो, सबको अनिवार्य तौर पर FSSAI से रजिस्ट्रेशन कराना होगा और लाइसेंस हासिल करना होगा।
सबसे अहम बात यह है कि यह नियम सिर्फ नया काम शुरू करने वालों पर ही नहीं, बल्कि पहले से दूध का कारोबार कर रहे दूधियों पर भी लागू होगा। यानी जो लोग सालों से बिना किसी रजिस्ट्रेशन के दूध बेच रहे थे, उन्हें भी अब FSSAI Milk Licence लेना अनिवार्य हो गया है।
डेयरी सहकारी समितियों के सदस्यों को राहत
हालांकि सरकार ने इस नियम में एक बड़ी छूट भी दी है। जो किसान या पशुपालक किसी रजिस्टर्ड डेयरी सहकारी समिति से जुड़े हुए हैं और अपना दूध उस समिति को देते हैं, उन्हें व्यक्तिगत तौर पर अलग से लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं होगी। ऐसे किसानों और पशुपालकों को इस नए नियम से कोई परेशानी नहीं होगी क्योंकि उनकी सहकारी समिति पहले से ही पंजीकृत होती है।
लेकिन जो दूध उत्पादक या विक्रेता किसी सहकारी समिति से नहीं जुड़े हैं और स्वतंत्र रूप से दूध का कारोबार करते हैं, उनके लिए FSSAI से लाइसेंस लेना अब अनिवार्य है। बिना लाइसेंस के दूध बेचना अब कानूनी रूप से गलत माना जाएगा।
राज्यों के खाद्य आयुक्तों को दिए सख्त निर्देश
FSSAI ने इस एडवाइजरी को लागू कराने के लिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के राज्य खाद्य आयुक्तों को सीधे निर्देश जारी किए हैं। एजेंसी ने कहा है कि पंजीकरण और लाइसेंसिंग की जरूरतों का सख्ती से पालन कराया जाए। जो लोग बिना पंजीकरण या लाइसेंस के दूध का कारोबार कर रहे हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
राज्यों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में विशेष रजिस्ट्रेशन अभियान चलाने का भी निर्देश दिया गया है ताकि ज्यादा से ज्यादा दूध उत्पादक और विक्रेता जल्द से जल्द अपना पंजीकरण करा लें। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाही की चेतावनी भी दी गई है।
दूध के भंडारण और शीतलन उपकरणों की भी होगी जांच
FSSAI Milk Licence के इस नए नियम के साथ ही प्राधिकरण ने एक और अहम निर्देश दिया है। समय-समय पर दूध ठंडा करने वाले उपकरणों का निरीक्षण करने का आदेश भी जारी किया गया है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि दूध का सही भंडारण तापमान बना रहे और दूध खराब होने से बचे। खराब दूध लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है और अक्सर बीमारियों का कारण बनता है।
गौरतलब है कि पिछले साल दिसंबर में भी राज्य खाद्य आयुक्तों को नियमित आधार पर दूध और दूध उत्पादकों के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया गया था। लेकिन अब FSSAI ने इसे और सख्त बनाते हुए लाइसेंस को ही अनिवार्य कर दिया है।
त्योहारों के सीजन में बड़े पैमाने पर होती है मिलावट
देश में दूध और दुग्ध उत्पादों में मिलावट का सबसे बड़ा खतरा त्योहारों के सीजन में देखने को मिलता है। जब होली, दीवाली या अन्य बड़े त्योहार आते हैं, तो बाजारों में बड़े पैमाने पर मिलावटी पनीर, खोवा, दही और दूध बिकने लगता है। हर बार सरकार की तरफ से छापेमारी अभियान चलाए जाते हैं और बड़ी मात्रा में मिलावटी सामान पकड़ा जाता है। लेकिन अब तक इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया था।
FSSAI के इस नए फैसले से उम्मीद जगी है कि लाइसेंस अनिवार्य होने के बाद दूध की गुणवत्ता पर बेहतर नियंत्रण रखा जा सकेगा। जब हर दूध उत्पादक और विक्रेता रजिस्टर्ड होगा तो उसकी जवाबदेही भी तय होगी और मिलावट करने वालों पर शिकंजा कसना आसान हो जाएगा।
आम लोगों को क्या फायदा होगा इस फैसले से
FSSAI Milk Licence के इस नए नियम का सबसे बड़ा फायदा आम उपभोक्ताओं को मिलेगा। जब हर दूध बेचने वाले के पास एक वैध लाइसेंस होगा तो ग्राहक को यह भरोसा मिलेगा कि उसे जो दूध मिल रहा है, वह एक पंजीकृत विक्रेता से आ रहा है। मिलावट पकड़े जाने पर अब सीधे लाइसेंस रद्द किया जा सकेगा और कानूनी कार्रवाई तेजी से हो सकेगी। आंध्र प्रदेश जैसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए यह कदम बेहद जरूरी था, जहां मिलावटी दूध ने 13 लोगों की जान ले ली थी। अब देखना यह है कि राज्य सरकारें इस एडवाइजरी को जमीनी स्तर पर कितनी सख्ती से लागू करती हैं, क्योंकि असली चुनौती नियम बनाने में नहीं बल्कि उसे गांव-गांव और गली-गली तक पहुंचाने में है।
मुख्य बातें (Key Points)
- FSSAI ने नई एडवाइजरी जारी कर दूध उत्पादन और बिक्री के लिएलाइसेंस अनिवार्य कर दिया है, बिना लाइसेंस दूध बेचना अब कानूनी अपराध होगा।
- गाय, भैंस, बकरी का दूध बेचने वाले सभी दूधियों को FSSAI से रजिस्ट्रेशन कराना होगा, यह नियम पुराने और नए दोनों कारोबारियों पर लागू है।
- रजिस्टर्ड डेयरी सहकारी समितियों के सदस्यों को अलग से लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं होगी।
- आंध्र प्रदेश में मिलावटी दूध से 13 लोगों की मौत जैसी घटनाओं के बाद सरकार ने यह सख्त कदम उठाया है।








