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The News Air - Breaking News - 70 साल में पहली बार इतनी कम राष्ट्रीय पार्टियां, 14 से घटकर इतनी हुई संख्या

70 साल में पहली बार इतनी कम राष्ट्रीय पार्टियां, 14 से घटकर इतनी हुई संख्या

The News Air Team by The News Air Team
गुरूवार, 21 मार्च 2024
in Breaking News, NEWS-TICKER, राष्ट्रीय, सियासत
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70 साल में पहली बार इतनी कम राष्ट्रीय पार्टियां,14 से घटी संख्या
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नई दिल्ली, 21 मार्च (The News Air) देश में अप्रैल के महीने में लोकसभा चुनाव होने वाले है . इसी बीच एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है जो बताती है कि साल 1951 में जब पहला लोकसभा चुनाव हुआ था तो उस समय 53 राजनीतिक दलों ने चुनाव लड़ा था. आज अगर देखा जाए तो राजनीतिक दलों की संख्या 2,500 से ज्यादा है. हालांकि, सात दशकों में राष्ट्रीय पार्टियों की तादाद 14 से घटकर 6 हो गई है.

लोकसभा चुनाव में इस बार छह राष्ट्रीय पार्टियां मैदान में उतरेंगी. लोकतंत्र के इतने सालों में कई पार्टियां बनी और बिखर गई.पहला चुनाव कुल 53 राजनीतिक दलों ने लड़ा, जिनमें से 14 ही “राष्ट्रीय पार्टियां” बनीं वहीं बाकी को “राज्य” पार्टी माना गया. भारत के चुनाव आयोग द्वारा प्रकाशित किताब “लीप ऑफ फेथ” के अनुसार, 1953 के चुनावों से पहले 29 राजनीतिक दलों ने राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा लेने की मांग की थी. किताब में लिखा है कि उनमें से केवल 14 को ही दर्जा देने का निर्णय लिया गया था. हालांकि, उनमें से केवल चार को राष्ट्रीय दर्जा बरकरार रखने की इजाजत दी गई.

1953 तक चार राष्ट्रीय पार्टी : 1953 तक चार राष्ट्रीय पार्टियां थीं कांग्रेस, प्रजा सोशलिस्ट पार्टी (सोशलिस्ट पार्टी और किसान मजदूर पार्टी के विलय के बाद बनी), सीपीआई और जनसंघ. जिन पार्टियों ने अपना राष्ट्रीय टैग खो दिया वे अखिल भारतीय हिंदू महासभा (एचएमएस), अखिल भारतीय भारतीय जनसंघ (बीजेएस), रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी), ऑल इंडिया शेड्यूल्ड कास्ट्स फेडरेशन (एससीएफ), ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक (मार्क्सवादी समूह) थे. (एफबीएल-एमजी) और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक (रुईकर समूह) (एफबीएल-आरजी), कृषक लोक पार्टी (केएलपी), बोल्शेविक पार्टी ऑफ इंडिया (बीपीआई), और रिवोल्यूशनरी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (आरसीपीआई). सोशलिस्ट पार्टी और किसान मजदूर पार्टी ने पहला चुनाव अलग-अलग लड़ा था और बाद में उनका विलय होकर प्रजा सोशलिस्ट पार्टी बन गई.1957 में दूसरे चुनाव में जब चार राष्ट्रीय पार्टियां मैदान में रहीं तो राजनीतिक दलों की संख्या घटकर 15 रह गयी. हालांकि, 1962 के अगले चुनावों में 27 पार्टियां चुनाव लड़ रही थीं और सोशलिस्ट (एसओसी) और स्वतंत्र (एसडब्ल्यूए) पार्टियों के चुनाव लड़ने के साथ राष्ट्रीय पार्टियों की संख्या बढ़कर छह हो गई.

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कांग्रेस का लंबा इतिहास : पहले आम चुनाव के बाद कांग्रेस लंबे समय तक कायम रही, साल 2014 के बाद से भाजपा का माहौल बनने से पहले कांग्रेस ने 2014 तक 14 चुनावों में से 11 में जीत हासिल की. 1951 के चुनावों के बाद अगले दो लोकसभा चुनावों में सीपीआई प्रमुख विपक्ष बनी. सोशलिस्ट पार्टी की जड़ें कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी में थीं, जो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भीतर एक वामपंथी गुट था, जिसका गठन जयप्रकाश नारायण, राम मनोहर लोहिया और आचार्य नरेंद्र देव ने किया था. उस समय, नारायण भी पीएसपी से पीछे हट गए और 70 के दशक के मध्य में एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश किया जब उन्होंने इंदिरा गांधी के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व किया, जिनकी सरकार पर उन्होंने आरोप लगाया था कि वह भ्रष्ट और अलोकतांत्रिक थी. बाद में नारायण ने 1975 में आपातकाल की घोषणा से पहले गांधी की अयोग्यता के आह्वान का नेतृत्व किया, जिसके लिए उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. जेल से रिहा होने पर, नारायण और अन्य पीएसपी नेताओं ने भारतीय लोक दल बनाने के लिए कई समूहों के साथ हाथ मिलाया, जिसने 1977 में आपातकाल के बाद, देश में व्यावहारिक रूप से पूरे विपक्ष के साथ मिलकर विरोध करने के लिए जनता पार्टी का गठन किया. गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस.

1992 में सात राष्ट्रीय पार्टी : अब तक सबसे कम संख्या में पार्टियां 1992 के लोकसभा चुनावों में सात राष्ट्रीय पार्टियों – बीजेपी, कांग्रेस, सीपीआई, सीपीएम, जनता दल, जनता पार्टी और लोक दल के साथ चुनाव लड़ रही थीं. ईसीआई की रिपोर्ट के अनुसार, 1996 के आम चुनावों में 209 राजनीतिक दलों शामिल हुए. जिनमें राष्ट्रीय टैग वाले आठ दल शामिल थे – कांग्रेस (आईएनसी), ऑल इंदिरा कांग्रेस (तिवारी), बीजेपी, सीपीआई, सीपीएम, जनता दल, जनता पार्टी और समता पार्टी। . 1998 के चुनावों में, सात राष्ट्रीय दलों – कांग्रेस, भाजपा, बसपा, जनता दल, सीपीआई, सीपीएम और समता पार्टी सहित 176 राजनीतिक दल भाग ले रहे थे, 1999 में, सात राष्ट्रीय दलों – भाजपा सहित 160 राजनीतिक दल चुनाव मैदान में थे. 2014 में, 464 राजनीतिक दलों ने चुनाव में हिस्सा लिया, जिनमें से छह राष्ट्रीय थे.

टीएमसी बनी राष्ट्रीय पार्टी : अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) को 2016 में एक राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा प्राप्त हुआ और उसने 2019 का चुनाव लड़ा. 2019 के चुनावों में, सात राष्ट्रीय दलों ने चुनाव लड़ा – भाजपा, कांग्रेस, बसपा, सीपीआई, सीपीआई (एम), एनसीपी और एआईटीसी. कुल 674 पार्टियों ने चुनाव लड़ा था. हालांकि, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) दोनों ने अपनी राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा खो दिया था.

2023 में आप बनी राष्ट्रीय पार्टी : पिछले साल, चुनाव आयोग ने आम आदमी पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी के रूप में मान्यता दी, जिससे इसे 2024 से पहले एक बड़ी चुनावी ताकत हासिल हुई. जबकि टीएमसी, एनसीपी और सीपीआई ने राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा खो दिया. बता दें, देश में अब छह राष्ट्रीय पार्टियां हैं – भाजपा, कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी, सीपीआई (एम), नेशनल पीपुल्स पार्टी और आप. 543 लोकसभा सीटों के लिए मतदान सात चरणों में होगा, 19 अप्रैल को पहले चरण में 102 सीटों पर मतदान शुरू होगा. वोटों की गिनती 4 जून को होगी.

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