New GST Rates Impact: कुछ समय पहले जीएसटी दरों में कटौती के बाद जहां साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट और खाने का तेल जैसी रोजमर्रा की वस्तुएं सस्ती हो गई थीं, वहीं अब यह राहत पूरी तरह खत्म होने जा रही है। एफएमसीजी (FMCG) कंपनियों ने इनपुट लागत (कच्चे माल की कीमत) में वृद्धि और रुपये के कमजोर होने के चलते इन वस्तुओं की कीमतों में 5 प्रतिशत तक का इजाफा कर दिया है। इससे आम आदमी की जेब पर एक बार फिर महंगाई का बोझ बढ़ गया है।
डाबर इंडिया (Dabur India) के सीईओ मोहित मल्होत्रा (Mohit Malhotra) ने स्पष्ट किया है कि कंपनी ने चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में अपने उत्पादों की कीमतों में 2 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की है। वहीं, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स (Tata Consumer Products) ने भी चाय की कीमतों में मामूली वृद्धि की है। सबसे बड़ी एफएमसीजी कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर (Hindustan Unilever) ने भी साबुन और शैंपू जैसी रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि की योजना बनाई है।
क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस महंगाई की कई वजहें हैं। सबसे बड़ी वजह डॉलर के मुकाबले रुपये का लगातार गिरना है। 30 जनवरी 2023 को रुपया डॉलर के मुकाबले 92.02 के निचले स्तर पर पहुंच गया था। रुपये की इस गिरावट का सीधा असर नाश्ते के अनाज, ओट्स और बादाम जैसे आयातित उत्पादों की कीमतों पर पड़ा है, जिससे उनकी लागत बढ़ गई है।
इसके अलावा, कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में हुई वृद्धि ने सल्फर और एन-पैराफिन जैसे औद्योगिक कच्चे माल की लागत को बढ़ा दिया है। वहीं, घरेलू बाजार में नारियल तेल की कीमतों में पिछले एक साल में दोगुनी वृद्धि हुई है, जिसका असर साबुन और अन्य ब्यूटी प्रोडक्ट्स की कीमतों पर देखने को मिल रहा है।
क्या है पृष्ठभूमि?
बता दें कि जीएसटी दरों में कटौती के बाद एफएमसीजी कंपनियों पर एंटी-प्रॉफिटियरिंग (मुनाफाखोरी रोकने) के नियम लागू थे, जिसके तहत उन्हें कीमतें स्थिर रखनी थीं। कंपनियों ने उस समय अपने उत्पादों की कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश भी की, लेकिन अब लगातार बढ़ती इनपुट लागत और रुपये पर बढ़ते दबाव के कारण कंपनियों के पास कीमतें बढ़ाने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है।
महंगाई का दौर लौटा
जीएसटी दरों में कटौती के बाद मिली राहत अब पूरी तरह खत्म हो गई है। रुपये की गिरावट और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है। डाबर, टाटा और हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसी दिग्गज कंपनियों का कीमतें बढ़ाना यह संकेत है कि आने वाले दिनों में और भी कंपनियां इसी राह पर चल सकती हैं। साबुन, शैंपू, तेल और चाय जैसी रोजमर्रा की चीजों के महंगा होने से आम परिवार का मासिक खर्च बढ़ना तय है। हालांकि, यह भी सच है कि कंपनियां भी बढ़ती लागत के दबाव में हैं और उनके पास फिलहाल कोई और विकल्प नहीं है।
मुख्य बातें (Key Points)
जीएसटी दरों में कटौती के बाद मिली राहत खत्म, एफएमसीजी कंपनियों ने कीमतें बढ़ाईं।
डाबर (Dabur) ने 2% की बढ़ोतरी की, टाटा कंज्यूमर (Tata Consumer) ने चाय महंगी की।
हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) ने साबुन-शैंपू के दाम बढ़ाने की योजना बनाई।
रुपये की गिरावट (92.02 के निचले स्तर पर) और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें मुख्य वजह।
नारियल तेल के दाम दोगुने होने से भी घरेलू उत्पाद महंगे हुए।








