किसान आंदोलन ख़त्म, ऐसे बनी सहमति, औपचारिक ऐलान बाक़ी, देखें केंद्र का आधिकारिक पत्र


The News Air- (चंडीगढ़) दिल्ली बॉर्डर पर एक साल 14 दिन से चल रहा किसान आंदोलन ख़त्म कर दिया गया है। किसान नेता बलबीर राजेवाल ने कहा कि अहंकारी सरकार को झुकाकर जा रहे हैं। हालांकि यह मोर्चे का अंत नहीं है। हमने इसे स्थगित किया है। 15 जनवरी को फिर संयुक्त किसान मोर्चा की फिर मीटिंग होगी। जिसमें आंदोलन की समीक्षा करेंगे। आंदोलन ख़त्म सिंघु बॉर्डर पर किसानों ने टेंट उखाड़ने शुरू कर दिए हैं। इसके अलावा वापसी की तैयारी भी शुरू कर दी गई है।

वहीं, आंदोलन की अगुआई करने वाले पंजाब के 32 किसान संगठनों ने अपना कार्यक्रम भी बना लिया है। जिसमें 11 दिसंबर को दिल्ली से पंजाब के लिए फ़तेह मार्च होगा। सिंघु और टिकरी बॉर्डर से किसान एकसाथ पंजाब के लिए वापस रवाना होंगे। 13 दिसंबर को पंजाब के 32 संगठनों के नेता अमृतसर स्थित श्री दरबार साहिब में मत्था टेकेंगे। उसके बाद 15 दिसंबर को पंजाब में क़रीब 116 जगहों पर लगे मोर्चे ख़त्म कर दिए जाएंगे। हरियाणा के 28 किसान संगठन भी अलग से रणनीति बना चुके हैं।

पंजाब और हरियाणा के किसान संगठनों के अलावा सभी नेता अपने संगठनों के साथ मीटिंग कर आंदोलन ख़त्म करने की बात कह चुके हैं। हालांकि, इस पर संयुक्त किसान मोर्चे की मुहर लगनी बाक़ी है। इसके लिए मीटिंग शुरू हो गई है। जिसमें केंद्र सरकार से आया किसानों की मांग क़बूलने वाला आधिकारिक लेटर भी दिखाया जाएगा।
संयुक्त किसान मोर्चा की 5 मेंबरी हाई पावर कमेटी के सदस्य अशोक धावले ने कहा कि हमें केंद्र सरकार से मांग मंज़ूर करने वाला आधिकारिक लेटर मिल चुका है। अब इस पर SKM की मीटिंग में फ़ैसला होगा।

इन मुद्दों पर बनी सहमति

MSP : केंद्र सरकार कमेटी बनाएगी, जिसमें संयुक्त किसान मोर्चा के प्रतिनिधि लिए जाएंगे। अभी जिन फ़सलों पर MSP मिल रही है, वह जारी रहेगी। MSP पर जितनी ख़रीद होती है, उसे भी कम नहीं किया जाएगा।

केस वापसी : हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकार केस वापसी पर सहमत हो गई है। दिल्ली और अन्य केंद्रशासित प्रदेशों के साथ रेलवे द्वारा दर्ज़ केस भी तत्काल वापस होंगे।

मुआवज़ा : मुआवज़े पर भी उत्तर प्रदेश और हरियाणा में सहमति बन गई है। पंजाब सरकार की तरह ही यहां भी 5 लाख का मुआवज़ा दिया जाएगा। किसान आंदोलन में 700 से ज़्यादा किसानों की मौत हुई है।

बिजली बिल : बिजली संशोधन बिल को सरकार सीधे संसद में नहीं ले जाएगी। पहले उस पर किसानों के अलावा सभी संबंधित पक्षों से चर्चा होगी।

प्रदूषण क़ानून : प्रदूषण क़ानून को लेकर किसानों को सेक्शन 15 से आपत्ति थी। जिसमें किसानों को क़ैद नहीं, लेकिन जुर्माने का प्रावधान है। इसे केंद्र सरकार हटाएगी।

ऐसे बनी सहमति

केंद्र सरकार ने इस बार सीधे संयुक्त किसान मोर्चा की 5 मेंबरी हाई पावर कमेटी से मीटिंग की। हाई पावर कमेटी के मेंबर बलबीर राजेवाल, गुरनाम चढ़ूनी, अशोक धावले, युद्धवीर सिंह और शिवकुमार कक्का नई दिल्ली स्थित ऑल इंडिया किसान सभा के ऑफ़िस पहुंचे, जहां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के अफ़सर भी जुड़े। सबसे बड़ा पेंच केस पर फंसा था, जिसे तत्काल वापस लेने पर केंद्र राज़ी हो गया।


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