Fake Ghee Ban India : उत्तर प्रदेश में 21 जनवरी 2026 को एक बड़ी खाद्य सुरक्षा कार्रवाई सामने आई। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने प्रयोगशाला जांच के बाद तीन ब्रांड के घी को सब-स्टैंडर्ड और असुरक्षित घोषित करते हुए उनकी बिक्री, भंडारण और वितरण पर तत्काल रोक लगा दी। कार्रवाई राज्यभर में लिए गए नमूनों की रिपोर्ट के आधार पर की गई, जिनमें दूध और दूध वसा के अलावा अन्य तत्व पाए गए।
क्यों लगाया गया प्रतिबंध
एफएसडीए के अनुसार विशेष प्रवर्तन अभियान के दौरान अलग-अलग जिलों से घी के नमूने उठाए गए थे। लैब रिपोर्ट में यह साफ हुआ कि ये नमूने तय मानकों पर खरे नहीं उतरे। इसी आधार पर इन्हें असुरक्षित घोषित किया गया और बाजार से तुरंत हटाने के निर्देश दिए गए।
किन-किन ब्रांड पर कार्रवाई
प्रतिबंधित ब्रांड हैं—हरियाणा फ्रेश, रत्नागिरी और बृजवासी। आदेश के मुताबिक दुकानदारों, थोक विक्रेताओं और सप्लायर्स को 48 घंटे के भीतर मौजूद स्टॉक की जानकारी देनी होगी, ताकि उत्पादों को वापस मंगाया जा सके और उपभोक्ताओं तक दोबारा न पहुंचें।
जांच में क्या निकला
- हरियाणा फ्रेश ब्रांड के दो अलग-अलग सैंपल असफल पाए गए।
- यह घी गिरधर मिल्क फूड्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा तैयार बताया गया, जिसकी यूनिट पानीपत में स्थित है।
- रत्नागिरी और बृजवासी ब्रांड के नमूने लखनऊ, बहराइच और अयोध्या से लिए गए थे।
- इन ब्रांड्स का निर्माण सूरत और राजकोट में होने की जानकारी सामने आई।
- सभी नमूनों में दूध/दूध वसा के अलावा अन्य पदार्थ मिले, जो खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हैं।
स्वास्थ्य पर क्या खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक लंबे समय तक नकली घी का सेवन दिल से जुड़ी बीमारियों का जोखिम बढ़ा सकता है। इसमें बैड कोलेस्ट्रॉल और ट्रांस फैट्स पाए जाने की आशंका रहती है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है। पाचन तंत्र पर भी इसका उल्टा असर पड़ता है—गैस, ब्लोटिंग, कब्ज और जलन जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। इसके अलावा शरीर में टॉक्सिन्स जमा होकर लिवर और किडनी पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं, वजन बढ़ सकता है और त्वचा से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं।
प्रशासन की सख्ती और निगरानी
एफएसडीए ने सभी जिलों के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को कड़ी निगरानी के निर्देश दिए हैं। लक्ष्य साफ है—प्रतिबंधित घी किसी भी हालत में दोबारा बाजार में न पहुंचे। आदेशों का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
विश्लेषण: थाली की सुरक्षा का सवाल
घी रोजमर्रा की थाली का अहम हिस्सा है। ऐसे में मिलावट केवल उपभोक्ता के भरोसे से नहीं, सीधे जन-स्वास्थ्य से खिलवाड़ है। यह कार्रवाई बताती है कि निगरानी और लैब-आधारित जांच ही मिलावट पर प्रभावी अंकुश लगा सकती है। बाजार से त्वरित रिकॉल और स्टॉक-डिस्क्लोजर जैसे कदम उपभोक्ता सुरक्षा के लिए निर्णायक हैं।
जानें पूरा मामला
राज्यव्यापी अभियान में असफल पाए गए घी के नमूनों के आधार पर तीन ब्रांड्स पर तत्काल प्रतिबंध लगाया गया। अब प्रशासन की चुनौती है कि रिकॉल और निगरानी के जरिए इन उत्पादों को पूरी तरह बाजार से बाहर रखा जाए।
मुख्य बातें (Key Points)
- यूपी में तीन घी ब्रांड असुरक्षित घोषित
- बिक्री, भंडारण और वितरण पर तुरंत रोक
- 48 घंटे में स्टॉक-डिस्क्लोजर का आदेश
- स्वास्थ्य जोखिमों को देखते हुए सख्त निगरानी








