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The News Air - Breaking News - ‘पैसे वालों के लिए भगवान का शोषण’, Supreme Court ने लगाई फटकार Banke Bihari Temple

‘पैसे वालों के लिए भगवान का शोषण’, Supreme Court ने लगाई फटकार Banke Bihari Temple

बांके बिहारी मंदिर में अमीरों की विशेष पूजा पर कोर्ट सख्त, कहा- दोपहर 12 बजे के बाद देवता को आराम क्यों नहीं करने देते?

The News Air Team by The News Air Team
मंगलवार, 16 दिसम्बर 2025
in Breaking News, NEWS-TICKER, धर्म
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Banke Bihari Temple
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Banke Bihari Temple Supreme Court Hearing: देश की सर्वोच्च अदालत ने वृंदावन के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में चल रही एक खास प्रथा को लेकर बेहद तल्ख टिप्पणी की है। सोमवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि पैसे के दम पर होने वाली विशेष पूजा और वीआईपी दर्शन असल में “देवता का शोषण” करने जैसा है।

मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जयमाला बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच कर रही थी। कोर्ट ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि जब भगवान के विश्राम का समय होता है, तब प्रभावशाली और अमीर लोगों को दर्शन कराए जाते हैं।

‘देवता को 1 मिनट का भी आराम नहीं’

अदालत में सुनवाई के दौरान जजों की बेंच ने मंदिर की मौजूदा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि मंदिर को दोपहर 12:00 बजे बंद कर दिया जाता है, ताकि देवता विश्राम कर सकें। लेकिन असलियत यह है कि इसके बाद भी देवता को एक मिनट का भी चैन नहीं मिलता।

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कोर्ट ने कहा कि यही वह समय है जब देवता का सबसे ज्यादा ‘शोषण’ होता है। जो अमीर लोग ज्यादा पैसे दे सकते हैं, उन्हें इस दौरान विशेष पूजा की अनुमति दे दी जाती है। कोर्ट ने पूछा कि आखिर वे देवता को आराम कहां करने देते हैं? भगवान के सोने के समय में खलल डालकर अमीरों के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।

क्या आस्था का पैमाना पैसा है?

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का संकेत बिल्कुल साफ था। बेंच ने सवाल उठाया कि क्या आस्था का पैमाना दान की राशि से तय होना चाहिए? कोर्ट ने कहा कि जो लोग प्रभावी हैं और ज्यादा पैसे खर्च कर सकते हैं, उन्हें विशेष पूजा के लिए आमंत्रित किया जाता है, जबकि सामान्य श्रद्धालु नियमों का पालन करते हैं।

यह टिप्पणी तब आई जब ठाकुर बांके बिहारी जी महाराज मंदिर प्रबंधन समिति की ओर से एक याचिका पर बहस हो रही थी। इसमें मंदिर के दर्शन के समय और परंपराओं में किए गए बदलावों पर आपत्ति जताई गई थी।

समिति की दलील- यह परंपरा का हिस्सा है

सुनवाई के दौरान मंदिर प्रबंधन की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान पेश हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि यह मामला बेहद संवेदनशील है और दर्शन या पूजा का समय एक लंबी परंपरा का हिस्सा है।

उन्होंने तर्क दिया कि मंदिर का संचालन और पूजा पद्धति 1939 की प्रबंधन योजना के तहत दशकों से चली आ रही है। इसमें देवता के जागने, सोने और भोग का समय पहले से तय है। उन्होंने कहा कि समय में बदलाव करना मंदिर के रीति-रिवाजों में बदलाव करने जैसा है।

हालांकि, जब वकील ने ये दलीलें दीं, तो सीजेआई ने उन्हें बीच में ही टोकते हुए कहा कि दोपहर 12 बजे के बाद जो होता है, वह भगवान को परेशान करने जैसा है। कोर्ट यह सुनिश्चित कर सकता है कि ऐसा न हो, क्योंकि यह भगवान के विश्राम का महत्वपूर्ण समय है।

यूपी सरकार को नोटिस जारी

बहस के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए ‘हाई पावर टेंपल मैनेजमेंट कमेटी’ और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने उनसे इस पूरी व्यवस्था और वीआईपी पूजा को लेकर जवाब मांगा है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि मंदिर की परंपराएं ऐसी नहीं होनी चाहिए जिससे देवता और सामान्य श्रद्धालु दोनों के अधिकार प्रभावित हों।

जानें पूरा मामला

इस विवाद की जड़ में उत्तर प्रदेश सरकार का एक नया प्रस्ताव भी है। सरकार ‘श्री बांके बिहारी मंदिर ट्रस्ट अध्यादेश-2025’ के जरिए मंदिर की व्यवस्था को एक सरकारी नियंत्रण वाले ट्रस्ट के अधीन लाना चाहती है। इसको लेकर बहस छिड़ी हुई है कि क्या सरकार को धार्मिक संस्थाओं में दखल देने का अधिकार है? सुप्रीम कोर्ट ने इस अध्यादेश को चुनौती देने वाली याचिका पर खुद सुनवाई करने से पहले इसे इलाहाबाद हाई कोर्ट भेज दिया था, लेकिन अब दर्शन व्यवस्था पर कोर्ट ने सख्त रुख दिखाया है।

‘मुख्य बातें (Key Points)’
  • सुप्रीम कोर्ट की फटकार: कोर्ट ने कहा कि पैसे वालों के लिए विशेष पूजा कराना ‘देवता का शोषण’ है।

  • विश्राम में खलल: 12 बजे मंदिर बंद होने के बाद वीआईपी पूजा से भगवान के आराम में बाधा पड़ती है।

  • नोटिस जारी: कोर्ट ने यूपी सरकार और मंदिर की हाई पावर कमेटी से जवाब मांगा है।

  • पुरानी परंपरा: मंदिर प्रबंधन का तर्क है कि 1939 से चल रही परंपराओं में बदलाव करना ठीक नहीं है।

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