यूरोपीय संघ (EU) और भारत ने उत्पीड़न के खिलाफ लड़ाई में विशेषज्ञों को एक साथ लाने का फैसला किया है. दोनों देश चरमपंथी गतिविधियों को रोकने के लिए ऑनलाइन स्पेस का गलत इस्तेमाल करने वाले अपराधियों पर विशेष नजर रखेंगे. दोनों देश मिलकर राजधानी दिल्ली में, 21-22 अगस्त को एक इस सम्मेलन को आयोजित करेंगे. दो दिवसीय यूरोपीय संघ-भारत ट्रैक 1.5 सम्मेलन में कट्टरपंथ के मौजूदा और बढ़ते खतरों पर चर्चा की जाएगी, साथ ही चरमपंथी और आतंकवादी एक्सपर्टस द्वारा किए जा रहे शोषण का संयुक्त रूप से मुकाबला करने के तरीके खोजे जाएंगे.
इस दो दिवसीय कार्यक्रम में यूरोपीय संघ, भारत, बांग्लादेश, मालदीव और श्रीलंका के विशेषज्ञ शामिल होंगे; टीम यूरोप में ऑस्ट्रिया, इटली, क्रोएशिया, एस्टोनिया, स्पेन, जर्मनी, आयरलैंड, नीदरलैंड, फ्रांस और रोमानिया भी हिस्सा लेंगे. बैठक में वैसे तो कई और मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होने की संभवाना है. लेकिन दुनिया में इस समय जारी युद्ध और जारी टेंशन के बीच दोनों देशों की ये मुलाकात और चर्चा बेहद अहम माना जा रहा है. इस बैठक में और किन मुद्दों पर संभावित चर्चा हो सकती है, वो हैं:
- ऑनलाइन स्पेस में चरमपंथी विचारों के प्रसार रोकने के तरीके
- युवाओं को चरमपंथी विचारों से दूर रखने के तरीके
- चरमपंथी गतिविधियों पर नजर रखने और उन्हें रोकने के लिए जानकारी साझा करना
- चरमपंथी विचारों के खिलाफ जागरूकता फैलाने के तरीके
दोनों देशों को क्या होगा फायदा?
बैठक में हिस्सा लेने वाले विशेषज्ञ अपने-अपने क्षेत्रों में किए गए प्रयासों और अनुभवों को शेयर करेंगे. इससे दोनों देशों को इस समस्या से निपटने के लिए नई रणनीतियां बनाने में मदद मिलेगी. यूरोपीय संघ और भारत का मानना है कि ऑनलाइन स्पेस का दुरुपयोग करके चरमपंथी, युवाओं को प्रभावित कर रहे हैं. इसलिए इस बैठक में युवाओं को चरमपंथी विचारों से दूर रखने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. विशेषज्ञ युवाओं को सही और पॉजिटिव दिशा देने और उन्हें ट्रेनिंग देने के तरीकों पर भी चर्चा करेंगे.
नए तरीकों पर होगा काम
माना जा रहा है कि बैठक में सूचना साझा करने और सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा. यूरोपीय संघ और भारत चरमपंथी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए नए तरीकों पर काम करेंगे. साथ ही वे अन्य देशों के साथ भी सहयोग बढ़ाएंगे. इस बैठक का मुख्य उद्देश्य चरमपंथी विचारों के खिलाफ जागरूकता फैलाना है. विशेषज्ञ इस बारे में रणनीतियां बनाएंगे कि कैसे लोगों को चरमपंथी विचारों से दूर रखा जा सकता है. साथ ही वे यह भी बताएंगे कि चरमपंथी गतिविधियों को रोकने में सरकार और नागरिक समाज का क्या योगदान हो सकता है.
भारत का क्या कहना है ?
भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव केडी देवल ने कहा कि भारत की आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति है और हम आतंकवाद की चुनौतियों से निपटने में सहयोगी भागीदार के रूप में जुड़ने के लिए तैयार है, खासकर सीमा पार आतंकवाद के अपने अनुभवों को देखते हुए. देवल ने आगे कहा, “आतंकवाद का बिना किसी हिचकिचाहट के मुकाबला करने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति को जगाना महत्वपूर्ण है, आतंकवाद को उचित ठहराने या आतंकवादियों का महिमामंडन करने की अनुमति नहीं देना चाहिए”. हमें आतंकवाद का मुकाबला करने में दोहरे मापदंड नहीं अपनाने चाहिए.”













