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The News Air - Breaking News - Europe vs USA: 8 यूरोपीय देशों ने Greenland में उतारी सेना, Trump बौखलाए!

Europe vs USA: 8 यूरोपीय देशों ने Greenland में उतारी सेना, Trump बौखलाए!

NATO में बड़ी दरार, अमेरिका के खिलाफ एकजुट हुए यूरोपीय देश

The News Air Team by The News Air Team
रविवार, 18 जनवरी 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, अंतरराष्ट्रीय, सियासत
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Europe vs USA
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Greenland Crisis NATO Europe USA : फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी समेत आठ यूरोपीय देशों की सेनाएं पहली बार ग्रीनलैंड में अमेरिका के खिलाफ तैनात हो चुकी हैं। यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहला मौका है जब NATO के सदस्य देश अपने ही सबसे बड़े सहयोगी अमेरिका के सामने खड़े हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकी ने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है।

नाटो में बड़ी दरार, अमेरिका अकेला पड़ा

यह कोई सामान्य सैन्य अभ्यास नहीं है बल्कि यह एक जोरदार संकेत है कि यूरोप अब अमेरिका की दादागिरी को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, नीदरलैंड और फिनलैंड की सेनाएं ग्रीनलैंड में मौजूद हो चुकी हैं और इन देशों का संदेश बिल्कुल साफ है कि ग्रीनलैंड न बिकने दिया जाएगा, न हथियाने दिया जाएगा और न ही अमेरिका की उपनिवेशवादी सोच को आगे बढ़ने दिया जाएगा।

ट्रंप की धमकी से बौखलाया यूरोप

ट्रंप ने खुले तौर पर ऐलान किया है कि ग्रीनलैंड अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी है और इस पर मालिकाना हक अमेरिका का होना चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि अगर अमेरिका कब्जा नहीं करता तो रूस या चीन ग्रीनलैंड पर कब्जा कर लेंगे और हम रूस या चीन को अपना पड़ोसी नहीं बनने देना चाहते। ट्रंप ने यह भी साफ कर दिया कि वे इसे आसान तरीके से डील के जरिए करना चाहते हैं लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो कठिन तरीके से भी करेंगे।

25% टैरिफ की धमकी

ट्रंप ने यूरोपीय देशों को सीधे निशाने पर लेते हुए धमकी दी है कि अमेरिका को निर्यात होने वाले सामान पर 10% टैरिफ जो 1 फरवरी से लग रहा है वह 1 जून से बढ़कर 25% हो जाएगा और यह टैरिफ तब तक जारी रहेगा जब तक ग्रीनलैंड को खरीदने का समझौता नहीं हो जाता। ट्रंप ने कहा कि ये देश बहुत खतरनाक खेल खेल रहे हैं और हमारे ग्रह की सुरक्षा, संरक्षा और अस्तित्व दांव पर लगी है।

यूरोपीय नेताओं का कड़ा जवाब

यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने सेना भेजने से ठीक पहले बयान देते हुए कहा कि नाटो सहयोगियों की सामूहिक सुरक्षा के लिए प्रयास करने पर शुल्क लगाना पूरी तरह गलत है और हम इस मुद्दे को सीधे अमेरिकी प्रशासन के साथ उठाएंगे। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन ने भी कड़े शब्दों में कहा कि टैरिफ की धमकी पूरी तरह अस्वीकार्य है और हम किसी भी तरह की धमकी से प्रभावित नहीं होंगे। स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन ने तो साफ कह दिया कि हम खुद को ब्लैकमेल नहीं होने देंगे।

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नाटो का बजट और अमेरिका की ताकत

नाटो का कुल रक्षा बजट 1.3 ट्रिलियन डॉलर है जिसमें अकेले अमेरिका का हिस्सा 860 बिलियन डॉलर है यानी लगभग 60 से 70 प्रतिशत। फ्रांस का योगदान 56.8 बिलियन डॉलर है जबकि जर्मनी 68.1 बिलियन डॉलर और ब्रिटेन 65.8 बिलियन डॉलर देता है। कनाडा का हिस्सा 29 बिलियन और इटली का 31.6 बिलियन डॉलर है। यह आंकड़े साफ बताते हैं कि अमेरिका के बिना नाटो की ताकत आधी से भी कम रह जाती है लेकिन फिर भी यूरोपीय देशों ने अमेरिका के खिलाफ खड़े होने का साहस दिखाया है।

ग्रीनलैंड इतना महत्वपूर्ण क्यों?

ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है जहां 80% हिस्से में स्थाई बर्फ जमी रहती है और यहां की जनसंख्या सिर्फ 57,000 है। लेकिन इसकी असली ताकत इसके खनिज भंडारों में छिपी है क्योंकि 4 लाख वर्ग किलोमीटर में फैले इस क्षेत्र में 38 तरह के खनिजों के अमूल्य भंडार हैं जिनमें कॉपर, ग्रेफाइट, नियोबियम, टाइटेनियम और रोडियम शामिल हैं। सबसे अहम बात यह है कि दुनिया की 25% रेयर अर्थ सिर्फ ग्रीनलैंड में है और यही रेयर अर्थ वो चीज है जिसे लेकर चीन पूरी दुनिया पर हावी है।

ग्रीनलैंड का इतिहास

ग्रीनलैंड का इतिहास काफी पुराना है जहां 1721 में डेनमार्क-नॉर्वे के मिशनरी हंस ने यहां नई बस्ती बसाई थी। 1940 में जर्मनी ने डेनमार्क पर कब्जा कर लिया जिसके बाद 1941 से 1945 तक ग्रीनलैंड अमेरिका के कब्जे में रहा। फिर 1953 में यह डेनमार्क का आधिकारिक हिस्सा बना और 1979 में होम रूल की स्थापना हुई जिससे इसे अर्ध-स्वायत्तता मिली। अब उसी स्वायत्तता पर ट्रंप प्रशासन का सीधा हमला हो रहा है।

अमेरिकी राजदूत की सैन्य बल की धमकी

यूनाइटेड नेशंस में मौजूद अमेरिका के राजदूत माइक वाल्ट्स ने एक इंटरव्यू में कहा कि सैन्य बल के संभावित इस्तेमाल समेत कई विकल्प मौजूद हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तरी क्षेत्र में जो करने की जरूरत है उसके लिए डेनमार्क के पास न तो संसाधन है और न ही क्षमता है। वाल्ट्स के मुताबिक अमेरिका की छत्रछाया में ग्रीनलैंडवासियों का जीवन ज्यादा सुरक्षित, मजबूत और समृद्ध होगा जो कि यूरोपीय यूनियन के अंतरराष्ट्रीय कानून के दावों से बिल्कुल हटकर है।

यूरोपीय यूनियन का कड़ा रुख

यूरोपीय यूनियन ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों की रक्षा का मजबूत संकल्प लिया है। यूरोपियन काउंसिल ने साफ कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून कहां गए और इन कानूनों की रक्षा के लिए वे बिल्कुल टिके हुए हैं तथा डिगेंगे नहीं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका को रोकने की शुरुआत यूरोपीय यूनियन के सदस्य देशों से ही होगी। डेनमार्क ने कहा कि यह धमकी एक झटके में जिस तरीके से दी गई वह हैरान करने वाली है।

नई विश्व व्यवस्था की आहट

दिसंबर 2025 में जब अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति का पेपर तैयार हुआ तो उसने संकेत दे दिए थे कि आने वाले वक्त में अमेरिका और रूस एक साथ खड़े नजर आएंगे क्योंकि रूस अमेरिका का दुश्मन नहीं है। इस पेपर में साफ था कि यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की को पद छोड़ना होगा और एक नया व्यक्ति आएगा जो पुतिन के अनुकूल होगा। फरवरी 2025 में म्यूनिक सुरक्षा सम्मेलन में उपराष्ट्रपति जे डी वेंस ने कहा था कि यूरोप को खतरा रूस से नहीं बल्कि भीतर से है जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगाते हैं और राजनीतिक विपक्ष को दबाते हैं।

भारत और चीन पर असर

टैरिफ की दौड़ में भारत भी सामने आकर खड़ा हो गया है और चीन के साथ गलबहियां डाल रहा है। भारत यूरोपीय यूनियन और यूनाइटेड किंगडम के साथ फ्री ट्रेड की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। अगर अमेरिका की यह नीति जारी रही तो भारत को भी आने वाले वक्त में टैरिफ नीतियों को लेकर मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है जबकि चीन अपनी आर्थिक परिस्थितियों में अमेरिका के साथ समझौते करने की दिशा में बढ़ेगा।

विश्लेषण: यूरोप के लिए जीवन-मरण का सवाल

यह टकराव सिर्फ ग्रीनलैंड का नहीं है बल्कि यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी पूरी विश्व व्यवस्था का सवाल है। नाटो, वर्ल्ड बैंक, आईएमएफ और यूनाइटेड नेशंस ये चार स्तंभ हैं जिन पर यूरोप टिका है और अमेरिका के बिना इनमें से कोई भी ठीक से नहीं चल सकता। अगर ग्रीनलैंड गया तो पूरे यूरोप को अमेरिकी दिशा में चलना होगा लेकिन अगर यूरोप ने ग्रीनलैंड को बचा लिया तो ट्रंप की जबरदस्त फजीहत होगी और उनकी अपने देश की राजनीति में रिपब्लिकन पार्टी के सामने भी यह संकट होगा कि वे पार्लियामेंट में क्या जवाब देंगे। यह पहली बार है जब नाटो के सदस्य देश अपने ही सबसे बड़े सहयोगी के खिलाफ खड़े हैं और यह संकेत है कि दुनिया में नई शक्ति संतुलन बन रहा है।


मुख्य बातें (Key Points)
  • 8 यूरोपीय देशों की सेनाएं ग्रीनलैंड में तैनात – फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी समेत आठ नाटो देश पहली बार अमेरिका के खिलाफ एकजुट होकर खड़े हुए हैं।
  • ट्रंप की 25% टैरिफ की धमकी – 1 जून से यूरोपीय देशों पर भारी टैरिफ लगाने की चेतावनी दी गई है जो ग्रीनलैंड समझौते तक जारी रहेगी।
  • ग्रीनलैंड में 25% रेयर अर्थ भंडार – दुनिया की एक चौथाई रेयर अर्थ और 38 तरह के खनिजों के अमूल्य भंडार सिर्फ ग्रीनलैंड में मौजूद हैं।
  • नाटो का भविष्य दांव पर – अमेरिका के बिना नाटो का अस्तित्व संकट में है और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी विश्व व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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