Hepatitis E Outbreak : पंजाब के फिरोजपुर जिले में भारत-पाक सीमा से महज 10 किलोमीटर दूर बसे गाँव हज़ारा सिंह वाला में एक 12 साल की बच्ची की संदिग्ध हेपेटाइटिस-ई से मौत ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। 23 फरवरी 2026 को सरकारी प्राथमिक स्कूल की कक्षा पाँच की छात्रा शेल्जा की मौत के बाद जिला स्वास्थ्य विभाग की टीमें गाँव में तैनात हो गईं और अब तक 15 संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें बच्चों की संख्या सबसे ज्यादा है।
एक बच्ची की मौत ने खोली व्यवस्था की पोल
शेल्जा, जो गाँव के सरकारी प्राथमिक स्कूल में पढ़ती थी, कई दिनों से बुखार और पेट संक्रमण से पीड़ित थी। 23 फरवरी को उसकी मौत के बाद जो सच्चाई सामने आई, वह कई सवाल खड़े करती है। शेल्जा की 16 साल की बहन और उसका भाई भी बीमार हैं और पेट संक्रमण से जूझ रहे हैं। यह जानकारी सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने गाँव में तत्काल मेडिकल कैंप लगाया।
गाँव का तालाब — बीमारी की असली जड़
3,525 की आबादी वाले इस गाँव में एक तालाब है जो बार-बार ओवरफ्लो होता है। जब तालाब का पानी निचले इलाकों में घुसता है, तो यह पीने के पानी की सप्लाई में मिलने का खतरा पैदा करता है। सरकारी प्राथमिक स्कूल के स्टाफ के मुताबिक कई बार सीवेज का पानी इसी रास्ते पीने के पानी में घुल जाता है।
गाँव के एक सरपंच बलविंदर सिंह लाड्डू ने बताया कि तालाब की सफाई पाँच साल में एक बार होती है और 2025 में यह होना था, लेकिन पिछले साल और इस साल गाँव में MGNREGA के तहत कोई काम नहीं हुआ। दूसरे सरपंच गुरनाम सिंह ने बताया कि तालाब का ओवरफ्लो तो रोक दिया गया है, लेकिन बच्चों का इतनी बड़ी संख्या में बीमार पड़ना अभी भी गहरी चिंता का विषय है।
पीने का पानी — सुरक्षित नहीं था स्रोत
गाँव में जो सामुदायिक RO वाटर सिस्टम था, वह खराब पड़ा था। इसकी वजह से ग्रामीण अपने घरों में लगे निजी सबमर्सिबल पंपों का पानी पी रहे थे, जिनकी बोरिंग की गहराई 250 फीट और उससे भी ज्यादा है। स्कूल में RO सिस्टम के बारे में रुबीना चोपड़ा, जो हज़ारा सिंह वाला सीनियर सेकेंडरी स्कूल की प्रिंसिपल का अतिरिक्त प्रभार संभाल रही हैं, ने कहा कि स्कूल के RO की जाँच हो चुकी है और कोई गड़बड़ी नहीं मिली। ब्लॉक प्राथमिक शिक्षा अधिकारी जसविंदर सिंह ने भी कहा कि प्राथमिक स्कूल का RO ठीक था, लेकिन एहतियात के तौर पर वहाँ से भी सैंपल ले लिए गए हैं।
डॉक्टर और डिप्टी कमिश्नर ने दिए अहम जवाब
माँ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, मामदोट ब्लॉक की वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. रेखा भट्टी ने बताया कि मेडिकल कैंप जारी है, 15 संदिग्ध मामले सामने आए हैं और पानी, खाने व खून के सैंपल लिए जा रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि अगर किसी को बुखार, पेट संक्रमण, आँखें पीली होना या पेशाब का रंग गहरा हो, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।
फिरोजपुर की डिप्टी कमिश्नर दीपशिखा शर्मा ने बताया कि 26 फरवरी तक कुल 15 संदिग्ध हेपेटाइटिस-ई के मामले हैं, 58 खून के सैंपल लिए गए हैं और 12 पानी के सैंपल स्टेट पब्लिक हेल्थ लैबोरेटरी, खरड़ भेजे गए हैं। गुरुवार को 59 लोगों की जाँच हुई जिनमें 48 बच्चे और 11 वयस्क थे। 27 ORS पैकेट और 1,000 क्लोरीन टैबलेट बाँटी गई हैं। पानी की आपूर्ति अस्थायी रूप से रोककर टैंकरों के जरिए पानी दिया जा रहा है।
जब सिस्टम सोता रहा, बच्चे बीमार पड़ते रहे
यह सिर्फ एक गाँव की कहानी नहीं है। हज़ारा सिंह वाला की घटना पंजाब के उन सैकड़ों सीमावर्ती गाँवों की तस्वीर दिखाती है जहाँ विकास काम कागजों पर तो होते हैं, लेकिन जमीन पर नहीं। MGNREGA के तहत तालाब सफाई का काम अगर समय पर होता, तो शायद शेल्जा आज जिंदा होती। RO सिस्टम जब खराब हुआ, तो कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। नतीजा एक 12 साल की बच्ची ने अपनी जान से चुकाया। यह हादसा एक चेतावनी है — अगर सीमावर्ती गाँवों में बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी जारी रही, तो ऐसी त्रासदियाँ दोहराती रहेंगी।
क्या है हेपेटाइटिस-ई और कैसे फैलता है
हेपेटाइटिस-ई एक वायरल संक्रमण है जो मुख्यतः दूषित पानी के जरिए फैलता है। इसके लक्षणों में बुखार, उल्टी, पेट दर्द, आँखों और त्वचा का पीला पड़ना तथा गहरे रंग का पेशाब शामिल हैं। बच्चे और कमजोर इम्युनिटी वाले लोग इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। इलाज न मिलने पर यह जानलेवा हो सकता है। इसका कोई विशेष इलाज नहीं है, लेकिन साफ पानी और समय पर डॉक्टरी देखभाल से इसे काबू में किया जा सकता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- फिरोजपुर के हज़ारा सिंह वाला गाँव में 12 साल की छात्रा शेल्जा की संदिग्ध हेपेटाइटिस-ई से 23 फरवरी को मौत हो गई।
- अब तक 15 संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जिनमें बच्चों की संख्या सबसे ज्यादा है।
- तालाब का ओवरफ्लो और गाँव का खराब RO सिस्टम, पीने के पानी में प्रदूषण का मुख्य कारण माना जा रहा है।
- MGNREGA के तहत तालाब सफाई का काम 2024 और 2025 में नहीं हुआ, जो इस संकट की बड़ी वजह बनी।








