Digi Yatra International Flights को लेकर विदेश यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। 1 नवंबर से देश के सात बड़े इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स पर एक ऐसा सिस्टम शुरू होने जा रहा है, जहां सिर्फ चेहरा दिखाकर गेट से अंदर जाने दिया जाएगा। हालांकि सोशल मीडिया पर फैल रहे इस दावे पर भरोसा मत कीजिए कि अब पासपोर्ट की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
देखा जाए तो अभी स्थिति यह है कि दिल्ली या मुंबई से लंदन, दुबई या न्यूयॉर्क जाने वाले यात्रियों को एंट्री गेट, चेक-इन काउंटर, इमीग्रेशन काउंटर, सिक्योरिटी होल्ड एरिया और बोर्डिंग गेट पर कम से कम पांच बार पासपोर्ट निकालना पड़ता है। भीड़ वाले दिनों में इस पूरी प्रक्रिया में दो से तीन घंटे बर्बाद हो जाते हैं।
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39 एयरपोर्ट्स पर पहले से कामयाब है डिजी यात्रा
घरेलू उड़ानों में डिजी यात्रा का प्रयोग पहले से ही बेहद कामयाब रहा है। आज देश के करीब 39 एयरपोर्ट्स पर डिजी यात्रा चालू है और लगभग 2 करोड़ 65 लाख लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं, यानी देश के 30% घरेलू यात्री पहले से ही सिर्फ फेस स्कैन से यात्रा कर रहे हैं। अब यही व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर उतारी जा रही है।
इसका पायलट प्रोजेक्ट 1 नवंबर से शुरू होकर पूरे दिसंबर तक चलेगा। इस ट्रायल के लिए सात सबसे व्यस्त हवाई अड्डों को चुना गया है।
| शामिल एयरपोर्ट | शामिल एयरलाइंस |
|---|---|
| नई दिल्ली | एयर इंडिया |
| मुंबई | इंडिगो |
| बेंगलुरु | – |
| हैदराबाद | – |
| चेन्नई | – |
| कोच्चि | – |
| अमृतसर | – |
पासपोर्ट खत्म होने का दावा पूरी तरह गलत
ध्यान देने वाली बात यह है कि इंटरनेट पर यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि विदेश यात्रा के लिए पासपोर्ट की जरूरत खत्म हो गई है। यह दावा पूरी तरीके से गलत है। सच्चाई यह है कि पासपोर्ट और संबंधित देश का वीजा आज भी उतना ही जरूरी है जितना पहले था। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि डिजी यात्रा केवल एयरपोर्ट के भीतर आवाजाही को तेज करने का एक बायोमेट्रिक टूल है, पासपोर्ट का विकल्प नहीं।
दो बेहद सख्त शर्तें जाननी जरूरी
इस ट्रायल में शामिल होने के लिए सरकार ने दो कड़ी शर्तें रखी हैं। पहली शर्त यह है कि साधारण पासपोर्ट नहीं, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक माइक्रोचिप वाला ई-पासपोर्ट होना अनिवार्य है, जिसमें डिजिटल तस्वीर, फिंगरप्रिंट और बायोमेट्रिक डाटा इंक्रिप्टेड फॉर्मेट में दर्ज होता है। अगर पासपोर्ट पुराना और बिना चिप वाला है, तो पुरानी कतार में ही लगना होगा।
दूसरी शर्त यह है कि फिलहाल यह ट्रायल सिर्फ दो एयरलाइंस, एयर इंडिया और इंडिगो के साथ शुरू किया जा रहा है। एमिरेट्स, कतर एयरवेज या सिंगापुर एयरलाइंस जैसी विदेशी एयरलाइंस से सफर करने वाले यात्रियों को फिलहाल इस डिजिटल लेन की एंट्री नहीं मिलेगी।
जानें पूरा मामला
रणनीतिक तौर पर देखा जाए तो भारत अपने एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर को दुबई और सिंगापुर के स्तर पर ले जाने की तैयारी में है। इससे सबसे बड़ा फायदा उन लाखों यात्रियों को होगा जो पीक आवर्स में घंटों लाइनों में खड़े रहकर कनेक्टिंग फ्लाइट्स छूटने के डर में जीते हैं। अनुमान है कि इससे एयरपोर्ट पर भीड़ का दबाव 40% तक कम हो जाएगा। अगर सात एयरपोर्ट का यह ट्रायल सफल रहता है, तो साल 2027 तक इसे सभी इंटरनेशनल टर्मिनल्स और एयरलाइंस के लिए खोल दिया जाएगा।
विशेषज्ञ विश्लेषण
अगर गौर करें तो यह कदम भारत के एविएशन सेक्टर के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन शुरुआती शर्तें इसे फिलहाल सीमित दायरे में रखती हैं। ई-पासपोर्ट की अनिवार्यता और सिर्फ दो एयरलाइंस तक सीमित दायरा यह दिखाता है कि सरकार पहले सुरक्षा और तकनीकी स्थिरता परखना चाहती है, उसके बाद ही बड़े पैमाने पर विस्तार करेगी। सवाल उठता है कि क्या आम यात्रियों के पास ई-पासपोर्ट जल्दी उपलब्ध हो पाएगा, क्योंकि इसी पर इस योजना की असली सफलता टिकी है।
मुख्य बातें (Key Points)
- 1 नवंबर से 7 एयरपोर्ट्स पर इंटरनेशनल फ्लाइट्स के लिए डिजी यात्रा ट्रायल शुरू होगा।
- पासपोर्ट खत्म होने का दावा गलत है, सिर्फ एयरपोर्ट के भीतर प्रक्रिया तेज होगी।
- ट्रायल के लिए ई-पासपोर्ट अनिवार्य है और सिर्फ एयर इंडिया व इंडिगो शामिल हैं।
- सफल रहने पर 2027 तक सभी इंटरनेशनल टर्मिनल्स और एयरलाइंस में विस्तार होगा।













