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The News Air - Breaking News - Dhurandhar 2 Real Story: मेजर इकबाल कौन है, इलियास कश्मिरी नहीं है असली किरदार

Dhurandhar 2 Real Story: मेजर इकबाल कौन है, इलियास कश्मिरी नहीं है असली किरदार

26/11 मुंबई हमले के मास्टरमाइंड मेजर इकबाल की असलियत क्या है? NIA की 109 पेज की इंटेरोगेशन रिपोर्ट से सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई, जानें कौन हैं 'बड़े साहब'

अभिनव कश्यप by अभिनव कश्यप
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Dhurandhar 2 Real Story
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Dhurandhar 2 Real Story: बॉलीवुड फिल्म धुरंधर 2 में अर्जुन रामपाल द्वारा निभाया गया मेजर इकबाल का किरदार दर्शकों के बीच जबरदस्त चर्चा का विषय बना हुआ है। फिल्म में इस किरदार का हुलिया इलियास कश्मीरी से हूबहू मिलता-जुलता दिखाया गया है, जिसकी वजह से YouTube पर एक्सपर्ट्स से लेकर न्यूज आर्टिकल्स तक में यही बताया गया कि मेजर इकबाल का किरदार इलियास कश्मीरी से प्रेरित है। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। NIA (नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी) की 109 पेज की इंटेरोगेशन रिपोर्ट और डेविड कोलमैन हेडली के 34 घंटे के बयान से जो सच्चाई सामने आई, वो पूरी तस्वीर ही बदल देती है।

2010 की NIA इंटेरोगेशन रिपोर्ट: 34 घंटे, 109 पेज और चौंकाने वाले खुलासे

Dhurandhar 2 Real Story को समझने के लिए सबसे पहले 2009 में जाना होगा। 26/11 मुंबई हमले के ठीक एक साल बाद, हमले की पूरी रेकी करने वाला डेविड कोलमैन हेडली शिकागो में गिरफ्तार कर लिया गया था। हेडली को लश्कर-ए-तैयबा ने डेनमार्क के जाइलैंड पोस्टन नामक अखबार पर हमले की रेकी के लिए भेजा था, और वहीं उसे पकड़ लिया गया।

इसके बाद 2010 में 3 जून से 9 जून के बीच भारत की NIA की टीम शिकागो पहुंची और करीब 34 घंटे तक हेडली से पूछताछ की। इस इंटेरोगेशन के बाद 109 पेज की एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई, जिसमें हेडली ने जो खुलासे किए वो रोंगटे खड़े कर देने वाले थे।

हेडली ने बताया कि 26/11 मुंबई हमले में 21 ऐसे ISI और पाकिस्तानी आर्मी के सर्विंग ऑफिसर्स शामिल थे जिन्होंने मिलकर यह हमला अंजाम दिया। लश्कर-ए-तैयबा का चीफ हाफिज सईद ISI के बेहद करीबी है और लश्कर का कमांडर जकी-उर-रहमान लखवी तो ISI के डायरेक्टर जनरल के साथ सीधा उठता-बैठता था। हेडली ने स्पष्ट कहा कि लश्कर-ए-तैयबा के हर बड़े मेंबर, चाहे हाफिज सईद हो, लखवी हो, आजम चीमा हो या साजिद मीर, हर एक को ISI का एक बड़ा अफसर हैंडल करता था।

मेजर इकबाल कौन है: ISI का टॉप एसेट, इलियास कश्मीरी नहीं

Dhurandhar 2 Real Story का सबसे अहम हिस्सा यही है कि असल में मेजर इकबाल कौन है। हेडली ने अपनी इंटेरोगेशन में दो बेहद अहम नाम लिए: पहला मेजर समीर अली और दूसरा मेजर इकबाल। दोनों ISI के ऑफिसर थे।

हेडली ने बताया कि हर बार जब वो मुंबई में रेकी करके लौटता था, तो पाकिस्तान जाकर मेजर इकबाल को पूरी ब्रीफिंग देता था। पहली मुलाकात लाहौर में हुई थी। मेजर इकबाल के बारे में हेडली ने जो हुलिया बताया, वो फिल्म के किरदार से एकदम अलग है। 2008 के आसपास मेजर इकबाल 35 से 40 साल की उम्र का, मोटा शख्स था जिसकी बहुत ही गहरी (डार्क) मूंछें थीं, बड़ा सिर था, घने बाल थे और बेहद गहरी आवाज थी। एक और खास बात: वो बहुत ज्यादा सिगरेट पीता था।

यह हुलिया इलियास कश्मीरी से बिल्कुल मेल नहीं खाता। इलियास कश्मीरी एक बिल्कुल अलग किरदार था, जिसकी अपनी अलग टेरर टाइमलाइन थी। 2007 में पाकिस्तान में लाल मस्जिद की घटना के बाद इलियास कश्मीरी ISI और पाकिस्तान आर्मी के पूरी तरह खिलाफ हो गया था। बाद में उसने ब्रिगेड 313 बनाई और अलकायदा के साथ चला गया। जबकि मेजर इकबाल 2010 तक भी ISI का सर्विंग ऑफिसर बना रहा।

मार्च 2006: लाहौर की गलियों में हेडली को दी गई जासूसी की ट्रेनिंग

Dhurandhar 2 Real Story में एक और चौंकाने वाला पहलू है मेजर इकबाल द्वारा हेडली को दी गई ट्रेनिंग। मार्च 2006 में मेजर इकबाल ने हेडली को लाहौर की सड़कों पर खुद ट्रेन किया। उसने सिखाया कि मुंबई जाकर किस तरह फोटोग्राफी करनी है, स्पाईक्राफ्ट क्या होती है, भारत में अपने सोर्स कैसे बनाने हैं और एक टूरिस्ट का कवर कैसे मेंटेन करके रखना है।

हेडली ने अपनी इंटेरोगेशन में स्वीकार किया कि मेजर इकबाल की यह ट्रेनिंग लश्कर-ए-तैयबा के ट्रेनिंग कैंप से “कई गुना ज्यादा बेहतर” थी। इतनी साइंटिफिक और इफेक्टिव कि उसने उसका आनंद लिया। ट्रेनिंग देने के बाद मेजर इकबाल ने हेडली को लाहौर की गलियों में छोड़ दिया ताकि वो लाइव प्रदर्शन करके दिखाए कि भारत जाकर काम कैसे करेगा। यह ISI के प्रोफेशनल अप्रोच का प्रमाण था, जो किसी आतंकी संगठन की ट्रेनिंग से कहीं आगे की चीज थी।

‘बड़े साहब’ कौन: लेफ्टिनेंट कर्नल हमजा से पहली मुलाकात

Dhurandhar 2 Real Story में फिल्म का एक और रहस्यमय किरदार है “बड़े साहब”। फिल्म में मेजर इकबाल बार-बार बड़े साहब का जिक्र करता है। हकीकत में हेडली ने बताया कि लाहौर में पहली मुलाकात के दौरान मेजर इकबाल ने उसे पाकिस्तान आर्मी के लेफ्टिनेंट कर्नल हमजा से मिलवाया और कहा: “यह मेरे बॉस हैं।”

हेडली ने लेफ्टिनेंट कर्नल हमजा का हुलिया भी बताया: करीब 40-45 साल की उम्र, बेबी फेस वाला लेकिन आर्मी स्टैंडर्ड के हिसाब से काफी ओवरवेट। उसके एक्सेंट से साफ पता चलता था कि वो पाकिस्तानी पंजाब प्रांत से ताल्लुक रखता है।

पहली मुलाकात में ही मेजर इकबाल और लेफ्टिनेंट कर्नल हमजा ने हेडली की रेकी का प्लान करीब दो घंटे से अधिक समय तक सुना। हमजा ने हेडली से कहा कि सारी फाइनेंशियल मदद यहीं से मिलेगी और मेजर इकबाल के डायरेक्शन फॉलो करने हैं। समय-समय पर आकर उन्हें ब्रीफ करना है। यही वो “बड़े साहब” का एंगल है जो फिल्म में दिखाया गया है।

कोर्ट में पेश हुए ठोस सबूत: ईमेल, फोन रिकॉर्ड और वायर टैपिंग

Dhurandhar 2 Real Story को और मजबूती इस बात से मिलती है कि मेजर इकबाल के खिलाफ सिर्फ हेडली के बयान ही नहीं, बल्कि ठोस सबूत भी कोर्ट में पेश किए गए। 2010 में अमेरिकी कोर्ट में हेडली और मेजर इकबाल के बीच के ईमेल एक्सचेंज सबूत के तौर पर रखे गए। एक फोन नंबर का सबूत भी मिला, जिसमें मेजर इकबाल ने न्यूयॉर्क एरिया कोड वाला नंबर ले रखा था और उससे कॉल्स को डिसगाइज करके पाकिस्तान से भारत डाइवर्ट करता था।

सितंबर 2009 की वायर टैपिंग से एक और सबूत मिला। हेडली के पाकिस्तान में रहने वाले भाई ने उसे शिकागो में कॉल करके बताया कि मेजर इकबाल फिर से लाहौर में उनके घर आया है और हेडली को ढूंढ रहा है। यह कॉल एजेंसियों ने इंटरसेप्ट कर लिया था।

2011 की हेडली की टेस्टिमनी में सामने आया कि मेजर इकबाल और हेडली के बीच करीब 20 ईमेल एक्सचेंज हुए थे। इन ईमेल्स में मेजर इकबाल का नाम “चौधरी खान” लिखा होता था। हेडली ने बताया कि शायद चौधरी खान ही मेजर इकबाल का असली नाम है।

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अमेरिकी इतिहास में पहली बार: ISI के सर्विंग ऑफिसर पर चार्जशीट

Dhurandhar 2 Real Story की एक और ऐतिहासिक कड़ी है अमेरिकी कार्रवाई। 2010 में यूएस फेडरल प्रोसिक्यूटर्स ने हेडली के बयान के आधार पर एक चार्जशीट फाइल की जिसमें मेजर इकबाल का अलग से नाम था। यह पहला मौका था जब अमेरिकी सरकार ने किसी ISI के सर्विंग ऑफिसर को आतंकवाद के आरोपों में चार्जशीट में शामिल किया।

मेजर इकबाल पर 26/11 मुंबई हमले में मारे गए छह अमेरिकी नागरिकों की हत्या का आरोप लगाया गया। यह चार्जशीट ISI और पाकिस्तान आर्मी की आतंकवाद में संलिप्तता का सबसे बड़ा आधिकारिक प्रमाण बनी। लेकिन पाकिस्तान ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया और कहा कि मेजर इकबाल और मेजर समीर अली “काल्पनिक किरदार” हैं जो असल में “एग्जिस्ट ही नहीं करते।”

$28,000 और भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर: मेजर इकबाल के खतरनाक प्लान

हेडली ने इंटेरोगेशन में बताया कि मेजर इकबाल ने उसे भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) की हाई सर्विलेंस कंडक्ट करने का निर्देश भी दिया था। यानी ये लोग भारत के परमाणु प्रतिष्ठान को भी निशाना बनाना चाहते थे।

मेजर इकबाल ने हेडली को $28,000 दिए ताकि वो मुंबई में ताहवुर राणा की इमिग्रेशन फर्म सेटअप कर सके। यह फर्म एक कवर के तौर पर काम करनी थी ताकि हेडली एक टूरिस्ट या बिजनेसमैन बनकर भारत में बेरोकटोक घूम सके और रेकी जारी रख सके।

एक ईमेल मई 2008 का सामने आया जिसमें मेजर इकबाल ने हेडली को निर्देश दिया कि मुंबई में शिवसेना के एक मेंबर को एक्सप्लॉइट करना है और शिवसेना भवन की रेकी करनी है। एक और ईमेल में मेजर इकबाल ने हेडली से उसके स्पाई कैमरों और सर्विलेंस इक्विपमेंट्स की पूरी डिटेल मांगी थी।

सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह था कि मेजर इकबाल ने हेडली को भारत के सभी चबाड हाउस की लिस्ट बनाने का आदेश दिया था। मेजर इकबाल का मानना था कि ये चबाड हाउस इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद के फ्रंट ऑफिस की तरह काम करते हैं। जब शुरुआती तौर पर चबाड हाउस को 26/11 के टारगेट लिस्ट में शामिल नहीं किया गया तो मेजर इकबाल लश्कर-ए-तैयबा से बहुत नाराज हो गया था।

मेजर इकबाल ने नेशनल कैडेट कॉलेज दिल्ली को भी 26/11 की टारगेट लिस्ट में शामिल करने के लिए कहा था। उसका कहना था कि अगर यहां हमला किया जाता है तो पाकिस्तान आर्मी ने पिछली चार जंगों में जितने भारतीय सेना के ब्रिगेडियर या अफसर नहीं मारे, उससे ज्यादा एक बार में किए जा सकते हैं।

साजिद मीर और मेजर अब्दुल रहमान: 26/11 के दूसरे खतरनाक चेहरे

Dhurandhar 2 Real Story में और भी कई खतरनाक चेहरे सामने आते हैं। हेडली ने मेजर अब्दुल रहमान (उपनाम पाशा) के बारे में बताया कि वो पहले पाकिस्तान आर्मी की 6th बलोच रेजिमेंट में मेजर था। 2002 में जब अमेरिका ने पाकिस्तान पर दबाव डाला कि तोराबोरा में तालिबान से लड़ो, तो इस मेजर ने नौकरी छोड़ दी और सीधा लश्कर-ए-तैयबा की सुसाइड स्क्वाड से जुड़ गया। उसने भारत पर लगातार हमले करने के लिए सुसाइड स्क्वाड को ट्रेन किया।

हेडली ने कबूल किया कि 2004 के आसपास जम्मू-कश्मिर के श्रीनगर में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की रैली पर जो हमला हुआ था, वो भी मेजर रहमान के ट्रेनीज ने किया था।

साजिद मीर (उपनाम साजिद माजिद) के बारे में हेडली ने बताया कि उसने 2005 में प्लास्टिक सर्जरी करा ली थी क्योंकि भारत आकर रेकी करने के बाद उसे पकड़े जाने का डर था। 26/11 हमले के दौरान जो रिकॉर्डिंग्स मिलीं, जिनमें पाकिस्तान से बैठकर आतंकवादियों को निर्देश दिए जा रहे थे, उनमें हेडली ने साजिद मीर की आवाज पहचानी।

भारतीय खुफिया एजेंसियों ने इंटरपोल से मेजर अब्दुल रहमान और साजिद मीर दोनों के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराए। हेडली ने यह भी बताया कि ये दोनों अप्रैल 2005 में भारत आ चुके थे। 2005 में भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच देखने के बहाने ये लोग भारत आए और नेशनल डिफेंस कॉलेज दिल्ली और इंडियन मिलिट्री एकेडमी देहरादून की रेकी की।

इलियास कश्मीरी अलग क्यों: वजीरिस्तान की मुलाकात ने खोला राज

Dhurandhar 2 Real Story में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि इलियास कश्मीरी और मेजर इकबाल एक ही व्यक्ति कैसे हो सकते हैं जब ये दोनों अलग-अलग किरदार हैं। हेडली ने खुद कबूल किया कि फरवरी 2009 में, यानी 26/11 हमले के बाद, मेजर अब्दुल रहमान उसे वजीरिस्तान ले गया था, खासतौर पर इलियास कश्मीरी से मिलवाने के लिए।

इलियास कश्मीरी लश्कर-ए-तैयबा के सेफ हाउस में छिपा हुआ था। वहां हेडली को एक “सर्विलेंस एक्सपर्ट” के तौर पर पेश किया गया। यानी इलियास कश्मीरी से अलग से मिलवाया गया, जो साबित करता है कि मेजर इकबाल और इलियास कश्मीरी दो बिल्कुल अलग व्यक्ति हैं।

हेडली ने यह भी बताया कि मेजर रहमान ने उससे कहा था कि अगर लश्कर-ए-तैयबा डेनमार्क के अखबार पर हमले का प्लान छोड़ता है तो इलियास कश्मीरी खुद इस प्लान को अंजाम देगा। यानी इलियास कश्मीरी की भूमिका लश्कर-ए-तैयबा और ISI के ऑपरेशन्स से अलग थी।

2011 में अमेरिका ने अपनी एयर स्ट्राइक में वजीरिस्तान में इलियास कश्मीरी को मार गिराया। जबकि उसी समय मेजर इकबाल ISI का सर्विंग ऑफिसर बना हुआ था। यह एक और ठोस सबूत है कि दोनों अलग-अलग व्यक्ति हैं।

फिल्म में क्यों किया गया यह बदलाव: असली वजह है फोटो का न होना

Dhurandhar 2 Real Story का एक दिलचस्प पहलू यह है कि फिल्म निर्माताओं ने मेजर इकबाल के किरदार में इलियास कश्मीरी का हुलिया क्यों दिया। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि मेजर इकबाल की कोई भी तस्वीर पब्लिक डोमेन में उपलब्ध नहीं है। शायद एजेंसियों के पास हो, लेकिन आम लोगों या मीडिया के पास उसकी कोई फोटो नहीं है। सिर्फ हेडली का बयान है कि मोटा आदमी, गहरी मूंछें, बड़ा सिर, घने बाल और सिगरेट का शौकीन।

चूंकि फिल्म में अर्जुन रामपाल पर इलियास कश्मीरी का हुलिया ज्यादा फिट बैठता था और वो उसमें खूंखार भी दिखते थे, इसलिए निर्माताओं ने नाम मेजर इकबाल ही रखा लेकिन हुलिया इलियास कश्मीरी जैसा बना दिया। फिल्म में रहमान डकैत और उज़ैर बलोच जैसे किरदारों के असली नाम हूबहू इस्तेमाल किए गए हैं, लेकिन इलियास कश्मीरी का नाम क्यों नहीं रखा? क्योंकि वो अलग किरदार है।

फिल्म में जो डायलॉग आता है कि मेजर इकबाल ने एक भारतीय फौजी का सिर काटकर परवेज मुशर्रफ को गिफ्ट किया, वो असल में इलियास कश्मीरी से जुड़ी घटना है। 2000-2001 के आसपास इलियास कश्मीरी ने भारतीय रेजिमेंट पर हमले के बाद एक फौजी का सिर काटकर मुशर्रफ को भेंट किया था। फिल्म में यह घटना सिर्फ इलियास कश्मीरी के हुलिए को जस्टिफाई करने के लिए डाली गई है।

‘बड़े साहब’ का अंजाम: जून 2024 में लेफ्टिनेंट कर्नल अमीर हमजा की हत्या

Dhurandhar 2 Real Story का सबसे नाटकीय मोड़ “बड़े साहब” यानी लेफ्टिनेंट कर्नल हमजा के अंजाम से जुड़ा है। 2009 में एशियन ह्यूमन राइट्स कमीशन ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की जिसमें बताया गया कि तीन पाकिस्तानी युवकों को कश्मीर बॉर्डर से एक आर्मी लेफ्टिनेंट कर्नल और उसके फ्रंटियर कॉर्प्स के अधिकारियों ने किडनैप कर लिया। 21 दिनों तक कैद में रखकर टॉर्चर किया गया और छोड़ते समय कहा गया कि हमारी पहचान किसी को मत बताना। यह घटना पेशावर के बाला हिसार फोर्ट एरिया की बताई जाती है और उस लेफ्टिनेंट कर्नल का नाम था: हमजा, लेफ्टिनेंट कर्नल हमजा ऑफ ISI। उस समय वो ISI पेशावर में पोस्टेड था।

18 जून 2024 को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के झेलम जिले से खबर आई कि एक रिटायर्ड पाकिस्तानी ब्रिगेडियर को गोली मार दी गई है। उसका नाम था अमीर हमजा, वही लेफ्टिनेंट कर्नल अमीर हमजा। वो अपनी पत्नी और बेटी के साथ कार में जा रहा था जब अचानक दो मोटरसाइकिलों पर चार अज्ञात बंदूकधारियों ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी। अमीर हमजा की मौके पर ही मौत हो गई।

पाकिस्तान ने तुरंत भारत की खुफिया एजेंसी RAW पर आरोप लगाया, जिसे भारत ने पूरी तरह नकार दिया। लेकिन खबरों में यह सामने आया कि अमीर हमजा बहुत समय से भारतीय काउंटर टेरर एजेंसियों के रडार पर था। 2018 में जम्मू-कश्मीर के संजुवान आर्मी कैंप पर हुए हमले का मास्टरमाइंड भी यही था, जिसमें भारत के छह जवान शहीद हुए और 12 गंभीर रूप से घायल हुए।

संजुवान हमले का दूसरा मास्टरमाइंड लश्कर-ए-तैयबा का ख्वाजा शाहिद (उपनाम मियां मुजाहिद) था, जिसे पहले ही किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा LOC के पास POK में मार दिया गया था और उसकी बॉडी क्षत-विक्षत हालत में मिली थी। अब अमीर हमजा का भी इसी तरह अंजाम हुआ। इससे फिल्म के “बड़े साहब” के अंजाम का अंदाजा लगाया जा सकता है।

मेजर समीर अली: 26/11 के कंट्रोल रूम का मास्टर, अभी भी लापता

मेजर इकबाल का करीबी सहयोगी मेजर समीर अली भी इस पूरी कहानी का अहम हिस्सा है। 2012 में दिल्ली पुलिस ने 26/11 के एक और हैंडलर जैबुद्दीन अंसारी (उपनाम अबू जंदल) को गिरफ्तार किया था। जंदल ने भी बताया कि लश्कर-ए-तैयबा का जो ऑपरेटिंग रूम था कराची के मलीर कैंटोनमेंट में, वहां से मेजर समीर अली सारे ऑपरेशन्स रियल टाइम में देखता था।

जंदल की गवाही से यह भी सामने आया कि मेजर समीर अली लखवी के डायरेक्टिव्स पर काम करता था। इंटरपोल ने उसके खिलाफ भी रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया। इंटरपोल के अनुसार, समीर अली का जन्म 1966 में लाहौर में हुआ, वो उर्दू, हिंदी और अंग्रेजी तीनों भाषाएं धाराप्रवाह बोलता है और भारत में ऑर्गेनाइज्ड क्राइम और टेररिज्म दोनों से जुड़ा है, यानी अंडरवर्ल्ड कनेक्शन भी बताए जाते हैं।

सितंबर 2008 का खुलासा: 26/11 हमला दो महीने पहले ही हो जाता

हेडली ने 2011 में शिकागो कोर्ट में ताहवुर राणा की ट्रायल के दौरान एक और चौंकाने वाला खुलासा किया। उसने कहा कि 26/11 मुंबई हमला दरअसल सितंबर 2008 में ही होने वाला था। खुद मेजर इकबाल ने उसे बताया था कि उनकी एक बोट 10 आतंकवादियों को लेकर जा रही थी, लेकिन वो समंदर में रास्ता भटक गए। जिस पॉइंट पर जाकर उन्हें एक भारतीय बोट मिलनी थी, वहां पहुंच नहीं पाए। साथ ही उनकी 12 लाइफ जैकेट भी खो गईं। इसलिए सितंबर का प्लान एग्जीक्यूट नहीं हो सका और नवंबर 2008 में 26/11 का भयानक हमला हुआ।

ISI का आतंकी नेटवर्क और भारत की सुरक्षा पर बड़ा सवाल

Dhurandhar 2 Real Story सिर्फ एक फिल्मी कहानी नहीं है, यह भारत की सुरक्षा पर उठने वाले गंभीर सवालों का दस्तावेज है। 2005 में जब भारत ने दोस्ती का हाथ बढ़ाकर क्रिकेट मैच देखने के लिए पाकिस्तानियों को न्योता दिया, तो उसी बहाने आतंकवादी आए और हमारे मिलिट्री इंस्टॉलेशंस की रेकी की। ISI का एक पूरा नेटवर्क, मेजर इकबाल से लेकर लेफ्टिनेंट कर्नल हमजा, मेजर समीर अली, साजिद मीर और मेजर अब्दुल रहमान तक, भारत के खिलाफ आतंकी हमलों की साजिश रचता रहा। पाकिस्तान इन सबके अस्तित्व से ही इनकार करता रहा, लेकिन NIA की इंटेरोगेशन रिपोर्ट, अमेरिकी कोर्ट के सबूत और इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस सबकुछ बयां करते हैं। यह हकीकत है, कोई फिल्म नहीं।

मुख्य बातें (Key Points)
  • मेजर इकबाल ISI का टॉप ऑपरेटिव था, इलियास कश्मीरी नहीं। दोनों बिल्कुल अलग-अलग व्यक्ति हैं। इलियास कश्मीरी 2011 में अमेरिकी एयर स्ट्राइक में मारा गया, जबकि मेजर इकबाल 2010 तक ISI का सर्विंग ऑफिसर बना रहा।
  • NIA ने 2010 में हेडली से 34 घंटे की पूछताछ के बाद 109 पेज की इंटेरोगेशन रिपोर्ट तैयार की, जिसमें 26/11 हमले में 21 ISI और पाकिस्तान आर्मी के सर्विंग ऑफिसर्स की संलिप्तता का खुलासा हुआ।
  • फिल्म के “बड़े साहब” असल में लेफ्टिनेंट कर्नल अमीर हमजा हैं, जिसकी जून 2024 में पाकिस्तान के झेलम जिले में अज्ञात बंदूकधारियों ने गोली मारकर हत्या कर दी।
  • यह पहली बार था जब अमेरिकी सरकार ने किसी ISI के सर्विंग ऑफिसर को आतंकवाद के आरोपों में चार्जशीट में शामिल किया। मेजर इकबाल पर 26/11 में मारे गए 6 अमेरिकी नागरिकों की हत्या का आरोप लगा।

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1: धुरंधर 2 में मेजर इकबाल का किरदार किस पर आधारित है?

फिल्म में अर्जुन रामपाल द्वारा निभाया गया मेजर इकबाल का किरदार ISI के एक असली ऑपरेटिव मेजर इकबाल (उपनाम चौधरी खान) पर आधारित है, न कि इलियास कश्मीरी पर। हालांकि फिल्म में हुलिया इलियास कश्मीरी जैसा दिखाया गया है क्योंकि असली मेजर इकबाल की कोई तस्वीर पब्लिक डोमेन में उपलब्ध नहीं है।

Q2: 26/11 मुंबई हमले में ISI की भूमिका क्या थी?

NIA की इंटेरोगेशन रिपोर्ट और डेविड कोलमैन हेडली के बयान के अनुसार, 26/11 हमले में ISI और पाकिस्तान आर्मी के 21 सर्विंग ऑफिसर शामिल थे। मेजर इकबाल मुख्य आर्किटेक्ट था, लेफ्टिनेंट कर्नल हमजा उसका बॉस था और मेजर समीर अली कराची के कंट्रोल रूम से ऑपरेशन संभालता था।

Q3: लेफ्टिनेंट कर्नल अमीर हमजा की हत्या कब और कैसे हुई?

18 जून 2024 को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के झेलम जिले में लेफ्टिनेंट कर्नल अमीर हमजा की गोली मारकर हत्या कर दी गई। वो अपनी पत्नी और बेटी के साथ कार में जा रहा था जब दो मोटरसाइकिलों पर आए चार अज्ञात बंदूकधारियों ने फायरिंग की। वो 2018 के संजुवान आर्मी कैंप हमले का मास्टरमाइंड भी था।

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अभिनव कश्यप

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अभिनव कश्यप 'The News Air' के संस्थापक और मुख्य संपादक (Chief Editor) हैं। डिजिटल मीडिया में उनके अनुभव में ग्राउंड रिपोर्टिंग, न्यूज़ डेस्क ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप शामिल है। वे हर खबर की फैक्ट-चेकिंग और संपादन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। राजनीति, चुनाव विश्लेषण, सामाजिक मुद्दे और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। अभिनव का संपादकीय सिद्धांत है "सनसनी नहीं, सच्चाई; तेज़ी नहीं, तथ्य।"

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