चुनावों को लेकर 2 गुटों में बंटे डेरा प्रेमी, एक गुट चला रहा यह मुहिम; राजनीतिक विंग बोली..

The News Air- पंजाब विधानसभा चुनाव 2022 जीतने के लिए अब राजनीतिक दलों की नज़र डेरा प्रेमियों के वोट बैंक पर है। उम्रकैद की सज़ा काट रहा राम रहीम को 21 दिन की फरलो मिली हुई है। परंतु अबकी बार वोट को लेकर डेरा प्रेमी दो धड़े में बँट गए हैं। डेरे के एक धड़े ने राजनेताओं और राजनीतिक विंग के अरमानों पर पानी फेरते हुए नोटा की मुहिम चला रखी है। डेरा अनुयायियों के फेथ वर्सज वरडिक्ट पेज से जुड़े प्रेमी इस मुहिम को बढ़ा रहे हैं।

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डेरा अनुयायियों का यह धड़ा 25 अगस्त 2017 को जेल जाने के बाद अस्तित्व में आई और डेरा प्रबंधकों की नीतियों का खुलासा डेरा प्रेमियों के बीच कर रहा है। वहीं डेरा के राजनीतिक विंग के इंचार्ज राम सिंह का कहना है कि डेरे या राजनीतिक विंग की ओर से ऐसा कोई संदेश नहीं जारी किया गया। जो भी यह मुहिम चला रहे हैं, वे शरारती क़िस्म के लोग है। डेरा प्रेमी नोटा नहीं वोट डालेंगे। जिस ओर भी जाएंगे, उसे जिताएंगे।

पंजाब में पार्टियों से नाराज़ हैं इस धड़े के अनुयायी

नोटा दबाने के पक्ष में प्रचार करने वाले डेरा प्रेमी पंजाब में सभी पार्टियों के विरोधी हैं। डॉ. मोहित का कहना है कि पंजाब में सभी पार्टी की सरकारों ने डेरा अनुयायियों की सुध नहीं ली। इसलिए वे इस बार नोटा की मुहिम का प्रचार कर रहे हैं। डेरा प्रमुख ने कभी भी किसी राजनीति दल का समर्थन नहीं किया। पंचकूला में चली गोलियों को डेरा प्रेमी अभी भूले नहीं है।

पश्चिम यूपी और पंजाब में भुनाया जाएगा फरलो को

अनुयायियों के इस पेज को चला रहे डॉ मोहित ने लाइव होकर कहा कि मुजफ्फरनगर में डेरा प्रेमियों ने राजनीतिक विंग के निर्देश पर वोट डालने से इन्कार कर दिया। राजनीतिक विंग की हाँ में हाँ नहीं मिलाई। नोटा को वोट डालने पर सहमति दी। 12 फरवरी को डेरा प्रमुख के ऑनलाइन प्रचार करने की अफ़वाह है। उन्हें नाम चर्चा घर से बाहर जाने की अनुमति भी नहीं है। पंजाब की डेरा अनुयायी बहन वीरपाल कौर ने फेसबुक पर अपना संदेश देते हुए बताया कि यूथ वीरांगना की अध्यक्ष प्रेमियों से कह रही है कि जस्सी के प्रचार में आएं।

21 दिन की मिली फरलो

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख 25 अगस्त 2017 को साध्वी यौन शोषण मामले में 20 साल की सज़ा हुई थी। इसके बाद पत्रकार छत्रपति हत्याकांड और रणजीत हत्याकांड में भी सज़ा काट रहे हैं। तब से लेकर अब तक डेरा प्रमुख जेल में ही बंद हैं। हालांकि इस बीच उन्हें एक बार अपनी बीमार मां से एक दिन मिलने के लिए पैरोल मिली। जबकि उसने पहले तीन बार पैरोल के लिए आवेदन किया था, परंतु सिरसा प्रशासन ने आवेदन रद्द कर दिया था। अबकी बार 5 राज्यों के चुनाव से पहले डेरा प्रमुख को 21 दिन की फरलो मिली।

इन ज़िलों की सीटों पर प्रभाव

मालवा में आने वाले फिरोजपुर, मोगा, फाजिलका, अबोहर, फरीदकोट, मुक्तसर साहिब बठिंडा, पटियाला, लुधियाना, मानसा, संगरूर, बरनाला, मलेरकोटला, फतेहगढ़ साहिब ज़िले आते हैं। मालवा बेल्ट में 69 विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं, जहां डेरा का प्रभाव माना जाता था। समय के साथ डेरे ने हर राज्य में अपनी 45 सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया।

सोशल मीडिया पर एक्टिव है यह धड़ा

डेरा सच्चा सौदा सिरसा के अनुयायी सोशल मीडिया पर काफ़ी एक्टिव हैं। फेथ वर्सज वरडिक्ट के 22 हज़ार फॉलोअर फेसबुक पर, 25 हज़ार यूट्यूब पर हैं। चुनाव को लेकर यही नोटा की मुहिम चला रहा है।

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