रविवार, 29 मार्च 2026
The News Air
No Result
View All Result
  • होम
  • राष्ट्रीय
  • पंजाब
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • अंतरराष्ट्रीय
  • सियासत
  • नौकरी
  • LIVE
  • बिज़नेस
  • काम की बातें
  • स्पेशल स्टोरी
  • टेक्नोलॉजी
  • खेल
  • लाइफस्टाइल
    • हेल्थ
    • धर्म
    • मनोरंजन
  • WEB STORIES
  • होम
  • राष्ट्रीय
  • पंजाब
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • अंतरराष्ट्रीय
  • सियासत
  • नौकरी
  • LIVE
  • बिज़नेस
  • काम की बातें
  • स्पेशल स्टोरी
  • टेक्नोलॉजी
  • खेल
  • लाइफस्टाइल
    • हेल्थ
    • धर्म
    • मनोरंजन
  • WEB STORIES
No Result
View All Result
The News Air
No Result
View All Result

The News Air - Breaking News - Delhi Excise Policy Case : कोर्ट ने कहा सब फर्जी, अब दिल्ली में दोबारा चुनाव क्यों नहीं?

Delhi Excise Policy Case : कोर्ट ने कहा सब फर्जी, अब दिल्ली में दोबारा चुनाव क्यों नहीं?

CBI स्पेशल कोर्ट ने सभी 23 आरोपियों को बरी किया, केजरीवाल 177 दिन और सिसोदिया 510 दिन जेल में रहे-अब सवाल उठा कि जिस फर्जी केस के इर्द-गिर्द चुनावी ताना-बाना बुना गया, उसका क्या होगा?

अभिनव कश्यप by अभिनव कश्यप
शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2026
A A
0
Delhi Excise Policy Case
104
SHARES
691
VIEWS
ShareShareShareShareShare

यह भी पढे़ं 👇

Goldy Dhillon Module

Goldy Dhillon Module का बड़ा खुलासा, Amritsar में Sub-Machine Guns बरामद

रविवार, 29 मार्च 2026
Sukhbir Singh Bada

Sukhbir Singh Badal का बड़ा ऐलान: Mohali-Dera Bassi बेल्ट बनेगा देश का अगला Financial Hub

रविवार, 29 मार्च 2026
New Rules 1 April 2026

New Rules 1 April 2026: LPG Price से Income Tax तक, 1 अप्रैल से बदल जाएंगे ये बड़े नियम

रविवार, 29 मार्च 2026
PPF, Sukanya Samriddhi Yojana

PPF, Sukanya Samriddhi Yojana अकाउंट हो सकते हैं बंद, 31 March से पहले करें ये काम

रविवार, 29 मार्च 2026

Delhi Excise Policy Case Verdict — एक ऐसा फैसला आया है जिसने भारत की शीर्ष सत्ता के पूरे सिस्टम को उघाड़कर रख दिया है। CBI की स्पेशल कोर्ट के जज जितेंद्र सिंह ने दिल्ली आबकारी नीति (शराब घोटाला) मामले में सभी 23 आरोपियों को बरी करते हुए खुले शब्दों में कहा कि यह पूरा मामला ही फर्जी है — न कोई सबूत है, न कोई गवाही, न कोई बरामदगी। जिस 100 करोड़ की कथित उगाही का जिक्र था, वो कहीं है ही नहीं। जिस पहले आरोपी कुलदीप कुमार को बनाकर पूरा ढांचा खड़ा किया गया, उसके खिलाफ एक भी साक्षी नहीं, एक भी बयान दर्ज नहीं। और अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है — जब पूरा केस ही फ्रॉड था तो क्या दिल्ली में दोबारा चुनाव नहीं होने चाहिए?


‘कोर्ट ने क्या कहा — चार बातें जिन्होंने सब कुछ पलट दिया’

जज जितेंद्र सिंह ने अपने फैसले में जो लिखा, उसने CBI की पूरी जांच की धज्जियां उड़ा दीं। कोर्ट ने साफ कहा कि दिल्ली आबकारी नीति में कोई व्यापक साजिश नहीं थी। किसी भी आरोपी की अपराधिक मंशा साबित नहीं हो पाई। CBI का पक्ष न्यायिक जांच की कसौटी पर खरा नहीं उतरता। साजिश की पूरी कहानी गढ़ने की कोशिश हुई, लेकिन वो ठोस साक्ष्य की जगह मात्र अनुमान पर आधारित थी।

कोर्ट ने यह भी कहा कि जो 100 करोड़ की उगाही का आरोप लगाया गया था — उसमें से 44 करोड़ कथित तौर पर गोवा चुनाव में खर्च होने की बात कही गई — वो सब कहीं है ही नहीं। पहले आरोपी कुलदीप कुमार के खिलाफ एक भी गवाह नहीं, एक भी बयान नहीं — और उसी के आधार पर एक के बाद एक 23 लोगों को आरोपी बना दिया गया। अब कोर्ट ने CBI के जांच अधिकारी (IO) के खिलाफ तुरंत विभागीय जांच (डिपार्टमेंटल इंक्वायरी) का आदेश भी दिया है। यानी CBI की अपनी ही स्पेशल कोर्ट कह रही है कि जो जांच हुई, वो कोई जांच ही नहीं थी।


‘बिना ठोस सबूत के मुख्यमंत्री का नाम जोड़ दिया गया’

फैसले में कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का नाम लेते हुए कहा कि बिना ठोस सबूत के उनका नाम जोड़ दिया गया। संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति पर बिना पुख्ता सबूत के आरोप लगाना कानून के सिद्धांतों के ही खिलाफ है। पूर्व डिप्टी CM मनीष सिसोदिया के बारे में कोर्ट ने कहा — न कोई सबूत, न कोई बरामदगी। वो व्यक्ति जिसने शराब नीति बनाई, जिसकी जिम्मेदारी लागू करने की थी — उसके खिलाफ कुछ भी नहीं था। फिर भी उन्हें जेल में डाल दिया गया।

और जेल भी कितने दिन? केजरीवाल 177 दिन जेल में रहे — लगभग छह महीने। मनीष सिसोदिया 510 दिन जेल में रहे — यानी डेढ़ साल से ज्यादा। संजय सिंह 181 दिन जेल में रहे। के. कविता — जो BRS नेता के. चंद्रशेखर राव की बेटी हैं — 150 दिन जेल में रहीं। सभी जनता द्वारा चुने हुए जनप्रतिनिधि हैं।


‘केजरीवाल बोले — आजाद भारत का सबसे बड़ा राजनीतिक षड्यंत्र’

फैसले के बाद अरविंद केजरीवाल सामने आए और उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का नाम लेते हुए कहा — “मोदी जी और अमित शाह जी ने मिलकर आजाद भारत का सबसे बड़ा राजनीतिक षड्यंत्र रचा। आम आदमी पार्टी को खत्म करने के लिए पार्टी के पांच सबसे बड़े नेताओं को जेल में डाल दिया गया। एक सिटिंग चीफ मिनिस्टर को — जो भारत के इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ — उसके घर से घसीटकर जेल में डाला गया।”

केजरीवाल ने भावुक होते हुए कहा — “मेरी बदनामी की गई। 24 घंटे टीवी चैनलों पर डिबेट चलते थे — केजरीवाल भ्रष्ट है, केजरीवाल भ्रष्ट है। पूरा फर्जी केस था। हमारे ऊपर कीचड़ फेंका गया। मैंने अपनी जिंदगी में केवल ईमानदारी कमाई है। आज कोर्ट ने साबित कर दिया कि केजरीवाल कट्टर ईमानदार है।” उनकी आंखों में आंसू थे जब वो कह रहे थे कि जो आरोप लगे, जो बदनामी हुई, जो दिन जेल में गुजारे — वो सब एक फर्जी केस की वजह से था।


‘चुनाव के इर्द-गिर्द बुना गया पूरा ताना-बाना’

इस फैसले ने एक और बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है जिस पर पूरे देश को गंभीरता से सोचने की जरूरत है। दिल्ली में AAP की सरकार 70 में से 62 सीटों की भारी बहुमत वाली सरकार थी। पहली बार केजरीवाल ने 67 सीटें जीती थीं, दूसरी बार 62 सीटें। लेकिन एक झटके में — चुनाव से ठीक पहले — मुख्यमंत्री जेल में, डिप्टी CM जेल में, बड़े नेता जेल में। पूरा परसेप्शन यह बनाया गया कि दिल्ली में एक भ्रष्ट सरकार चल रही है। और यह परसेप्शन बनाने में अदालतों के गलियारों से लेकर जांच एजेंसियों की चार्जशीट तक, CAG की रिपोर्ट से लेकर मीडिया की एकतरफा कवरेज तक — सबने भूमिका निभाई।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव के वक्त केजरीवाल चुनाव प्रचार नहीं कर सकते। हाई कोर्ट ने जमानत देने से मना कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने भी मुहर लगाई। जेल से बाहर आने के बाद भी — न चुनाव प्रचार कर सकते थे, न मुख्यमंत्री की कुर्सी से दिशा-निर्देश जारी कर सकते थे। और अब पता चलता है कि जिस चार्जशीट के आधार पर यह सब हुआ — वो चार्जशीट ही फ्रॉड थी।


‘CAG की लीक रिपोर्ट भी बनी हथियार’

इस पूरे मामले में CAG (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। CAG की एक रिपोर्ट लीक हुई थी जिसमें कहा गया था कि शराब नीति में कई गड़बड़ियां थीं — लाइसेंस देने में खामियां, AAP नेताओं को कथित घूस से फायदा पहुंचाना, डिप्टी CM की अगुवाई वाले ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स द्वारा एक्सपर्ट पैनल के सुझाव खारिज करना, कैबिनेट की बिना पूरी प्रक्रिया के मंजूरी, और तत्कालीन लेफ्टिनेंट गवर्नर से मंजूरी न लेना। इन सबके आधार पर एक भयावह तस्वीर पेश की गई — शराब की दुकानें हर गली में खुल रही हैं, नीलामी हो रही है, पैसा बंट रहा है। लेकिन अब कोर्ट ने कहा — यह सब कुछ गलत था। पूरा मामला ही फ्रॉड है।


‘सिस्टम कैसे काम करता है — नियुक्तियों से लेकर फैसलों तक’

यह समझना बेहद जरूरी है कि बीते 10 वर्षों में एक ऐसा सिस्टम कैसे खड़ा किया गया जिसमें हर संस्था एक ही दिशा में काम करती दिखी। चुनाव आयुक्त की नियुक्ति का पैनल बनाया गया — उसमें प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और विपक्ष के नेता। विपक्ष का नेता अगर खिलाफ भी जाए तो 2 बनाम 1 में उसके मत का कोई महत्व नहीं। CBI और ED के अधिकारियों की नियुक्ति, ED डायरेक्टर को भारत के इतिहास में पहली बार तीन बार एक्सटेंशन, अदालतों में जजों की पदोन्नति में सरकार की “हरी झंडी” की अनिवार्यता — यह सब मिलकर एक ऐसा ढांचा खड़ा करते हैं जिसमें कोई भी संस्था सत्ता के खिलाफ खड़ी होने की स्थिति में नहीं रहती।

जब नियुक्तियां ही उसी सरकार ने की हैं जिसने तय कर लिया कि दिल्ली की सरकार को गिराना है — तो जांच अधिकारी (IO) कैसे निष्पक्ष जांच करेगा? CBI डायरेक्टर कैसे स्वतंत्र रहेगा? CAG कैसे तटस्थ रिपोर्ट देगा? और जब यह सब एक ही दिशा में काम करें, तो मीडिया को भी भरोसा हो जाता है कि “अगर इतनी बड़ी संस्थाएं कह रही हैं तो सच ही होगा।” लेकिन आज कोर्ट ने बता दिया — कुछ भी सच नहीं था।


‘सिर्फ दिल्ली नहीं — पूरे देश में यही पैटर्न’

यह सिर्फ दिल्ली की कहानी नहीं है। राहुल गांधी से हेराल्ड मामले में 5 दिन तक 50 घंटे पूछताछ हुई — निकला कुछ नहीं। सोनिया गांधी से 3 दिन में 28 घंटे पूछताछ — निकला कुछ नहीं। रॉबर्ट वाड्रा का जिक्र तो 2013 से मोदी प्रधानमंत्री बनने से पहले ही करते रहे — 11 साल बीत गए, आज तक जेल नहीं हुई। हेमंत सोरेन को खनन मामले में जेल में डाला गया। अभिषेक बनर्जी निशाने पर हैं — बंगाल में चुनाव होने वाले हैं। ममता बनर्जी के खिलाफ भी मामले हैं। शरद पवार के खिलाफ कोऑपरेटिव मामले में केस है।

पैटर्न एक ही है — चुनाव से पहले ED-CBI की कार्रवाई, परसेप्शन बनाना, मीडिया ट्रायल, और फिर चुनाव जीतना। 144 सांसदों के नाम सुप्रीम कोर्ट में ED ने दिए कि इन पर मामला है — लेकिन कन्विक्शन कहीं नहीं। केस चलते रहते हैं, परसेप्शन बनता रहता है, और चुनाव जीते जाते हैं।


‘तो क्या दिल्ली में दोबारा चुनाव नहीं होने चाहिए?’

यह सबसे बड़ा और सबसे गंभीर सवाल है जो इस फैसले के बाद उठ रहा है। दिल्ली का चुनाव ही तो इस पूरे मामले का केंद्र था। चुनाव के इर्द-गिर्द ही पूरा ताना-बाना बुना गया। मुख्यमंत्री को जेल में डाला गया ताकि चुनाव प्रचार न कर सकें। डिप्टी CM को डेढ़ साल जेल में रखा गया। पार्टी के बड़े नेताओं को बंद किया गया। मीडिया में 24 घंटे “भ्रष्ट” का टैग चलता रहा। और जनता ने वही देखा जो दिखाया गया।

अब जब कोर्ट ने कह दिया कि यह सब फ्रॉड था — FIR फेक थी, चार्जशीट फर्जी थी, सबूत अनुमान पर आधारित थे — तो क्या उस चुनाव का नतीजा वैध माना जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट को अब यह आदेश पारित करना चाहिए कि दिल्ली में दोबारा चुनाव हों — खुलकर हों, निष्पक्ष हों, और जनता अपने नुमाइंदे को स्वतंत्र रूप से चुने। क्योंकि अगर महाराष्ट्र में सरकार गठन को गैरकानूनी कहकर भी सरकार चलने दी गई, इलेक्ट्रोरल बॉन्ड को अवैध कहकर भी पैसा वापस नहीं लिया गया — तो इस बार कम से कम एक मौका है कि अदालत कागजों से हटकर जमीनी न्याय करे।


‘जब सिस्टम ही फ्रॉड हो जाए तो लोकतंत्र कहां है?’

इस पूरे प्रकरण ने एक सवाल खड़ा किया है जो आज से पहले शायद इतनी स्पष्टता से कभी नहीं उठा — अगर किसी देश में जांच एजेंसियां, नियामक संस्थाएं, ऑडिटर, अदालतें और मीडिया — सब मिलकर एक ही दिशा में काम करें और वो दिशा सत्ता की हो, तो लोकतंत्र का क्या मतलब रह जाता है? न मनमोहन सिंह ने ऐसा सोचा, न अटल बिहारी वाजपेयी ने, न पीवी नरसिम्हा राव ने, न इंदिरा गांधी ने, न राजीव गांधी ने — कि सत्ता बचाने के लिए पूरे संवैधानिक ढांचे को ही अपने अनुकूल बना लिया जाए।

संविधान द्वारा दिया गया चेक एंड बैलेंस — जो लोकतंत्र की जान है — अगर वो ही खत्म हो जाए तो बचेगा क्या? जब चुनाव आयुक्त सरकार का हो, CAG की रिपोर्टें गायब हों, CBI-ED सरकार के इशारे पर चलें, मीडिया जी-हजूरी करे, और अदालतें सत्ता के अनुकूल फैसले दें — तो जनता किसके पास जाए?


मुख्य बातें (Key Points)
  • CBI स्पेशल कोर्ट ने दिल्ली आबकारी नीति मामले में सभी 23 आरोपियों को बरी किया — कोर्ट ने कहा पूरा केस फर्जी है, कोई सबूत नहीं, कोई साजिश नहीं, FIR ही फेक थी।
  • केजरीवाल 177 दिन, सिसोदिया 510 दिन, संजय सिंह 181 दिन और कविता 150 दिन जेल में रहे — एक ऐसे केस में जो कोर्ट के मुताबिक कभी था ही नहीं।
  • कोर्ट ने CBI के जांच अधिकारी के खिलाफ तुरंत विभागीय जांच का आदेश दिया — जांच करने वाला ही कटघरे में खड़ा हो गया।
  • सबसे बड़ा सवाल — जब चुनाव के इर्द-गिर्द बुना गया पूरा ताना-बाना फ्रॉड साबित हुआ तो क्या दिल्ली में दोबारा निष्पक्ष चुनाव नहीं होने चाहिए?

Google News
WhatsApp
Telegram
Previous Post

Delhi Excise Case: 600 पन्नों का फैसला, CBI अधिकारियों की होगी जांच, केजरीवाल-सिसोदिया बरी

Next Post

Aaj Ka Rashifal 28 February 2026: इन राशियों के चमकेंगे सितारे, जानें होलिका में कौन सी लकड़ी अर्पित करें

अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप 'The News Air' के संस्थापक और मुख्य संपादक (Chief Editor) हैं। डिजिटल मीडिया में उनके अनुभव में ग्राउंड रिपोर्टिंग, न्यूज़ डेस्क ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप शामिल है। वे हर खबर की फैक्ट-चेकिंग और संपादन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। राजनीति, चुनाव विश्लेषण, सामाजिक मुद्दे और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। अभिनव का संपादकीय सिद्धांत है "सनसनी नहीं, सच्चाई; तेज़ी नहीं, तथ्य।"

Related Posts

Goldy Dhillon Module

Goldy Dhillon Module का बड़ा खुलासा, Amritsar में Sub-Machine Guns बरामद

रविवार, 29 मार्च 2026
Sukhbir Singh Bada

Sukhbir Singh Badal का बड़ा ऐलान: Mohali-Dera Bassi बेल्ट बनेगा देश का अगला Financial Hub

रविवार, 29 मार्च 2026
New Rules 1 April 2026

New Rules 1 April 2026: LPG Price से Income Tax तक, 1 अप्रैल से बदल जाएंगे ये बड़े नियम

रविवार, 29 मार्च 2026
PPF, Sukanya Samriddhi Yojana

PPF, Sukanya Samriddhi Yojana अकाउंट हो सकते हैं बंद, 31 March से पहले करें ये काम

रविवार, 29 मार्च 2026
Iran-Israel War

Iran-Israel War: NATO ने दिया साथ छोड़ा, Trump पर बढ़ा दबाव, IRGC का अल्टीमेटम

रविवार, 29 मार्च 2026
Mann ki Baat

Mann Ki Baat 132: मध्य पूर्व जंग पर PM Modi ने जताई गहरी चिंता, देश से की बड़ी अपील

रविवार, 29 मार्च 2026
Next Post
Aaj Ka Rashifal 28 February 2026

Aaj Ka Rashifal 28 February 2026: इन राशियों के चमकेंगे सितारे, जानें होलिका में कौन सी लकड़ी अर्पित करें

Ramadan 2026

Ramadan 2026: 2030 में एक साल में दो बार आएगा रमजान, क्या है वजह? जानें दिलचस्प संयोग

प्रातिक्रिया दे जवाब रद्द करें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

The News Air

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।

Google News Follow us on Google News

  • About
  • Editorial Policy
  • Privacy & Policy
  • Disclaimer & DMCA Policy
  • Contact

हमें फॉलो करें

No Result
View All Result
  • प्रमुख समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • सियासत
  • राज्य
    • पंजाब
    • चंडीगढ़
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • महाराष्ट्र
    • पश्चिम बंगाल
    • उत्तर प्रदेश
    • बिहार
    • उत्तराखंड
    • मध्य प्रदेश
    • राजस्थान
  • काम की बातें
  • नौकरी
  • बिज़नेस
  • टेक्नोलॉजी
  • मनोरंजन
  • धर्म
  • हेल्थ
  • स्पेशल स्टोरी
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
  • WEB STORIES

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।