Manipur Violence: मणिपुर हिंसा (Manipur Violence) को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में दायर याचिका में दावा किया गया है कि राज्य के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह (N. Biren Singh) ने हथियार लूटने की मंजूरी दी थी। एक ऑडियो टेप का हवाला देते हुए, वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) ने कोर्ट में कहा कि “93% तक पुष्टि हो चुकी है कि यह आवाज़ मुख्यमंत्री की है!”
क्या मणिपुर हिंसा में सरकार की मिलीभगत थी? सुप्रीम कोर्ट ने मांगी फॉरेंसिक रिपोर्ट!
सुप्रीम कोर्ट में बड़ा खुलासा – ‘CM Biren Singh की ऑडियो रिकॉर्डिंग में हथियार लूट की मंजूरी!’
कौन-कौन हैं इस केस में शामिल?
-
याचिकाकर्ता: कुकी ऑर्गेनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स ट्रस्ट (Kuki Organization for Human Rights Trust)
-
मुख्य आरोपी: मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह (CM N. Biren Singh)
-
याचिका दायर करने वाले वकील: प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan)
- सुनवाई कर रही बेंच: मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार
क्या कहा गया है याचिका में?
-
मणिपुर हिंसा (Manipur Riots) में मुख्यमंत्री की भूमिका की जांच की जाए।
-
वायरल ऑडियो टेप की स्वतंत्र फॉरेंसिक जांच हो।
- राज्य सरकार और केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण मांगा जाए।
वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट में तर्क दिया कि “ट्रुथ लैब्स (Truth Labs) की जांच रिपोर्ट ने पुष्टि कर दी है कि 93% संभावना है कि यह आवाज मुख्यमंत्री बीरेन सिंह की ही है!”
सॉलिसिटर जनरल ने इस रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा, “आप किस लैब की रिपोर्ट लेकर आए हैं?”
जिस पर प्रशांत भूषण ने जवाब दिया,
👉 “ट्रुथ लैब्स की रिपोर्ट एफएसएल (FSL) रिपोर्ट्स से भी ज्यादा भरोसेमंद होती हैं!”
क्या यह मणिपुर सरकार के खिलाफ सबसे बड़ा सबूत है? जानिए आगे क्या हुआ कोर्ट में!
सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर सरकार से मांगी रिपोर्ट, 24 मार्च को होगी अगली सुनवाई
👉 क्या कहा कोर्ट ने?
-
मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना (CJI Sanjiv Khanna) ने कहा – ‘राज्य अभी अस्थिर है, हमें यह तय करना होगा कि केस हाईकोर्ट में सुना जाए या सुप्रीम कोर्ट में।’
-
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से 6 हफ्तों में विस्तृत एफएसएल रिपोर्ट मांगी।
-
एफएसएल रिपोर्ट को ‘सीलबंद लिफाफे’ (sealed cover) में कोर्ट में जमा करने का आदेश।
क्या सुप्रीम कोर्ट इस केस को हाईकोर्ट भेज सकता है? जानिए एक्सपर्ट्स की राय!
मणिपुर हिंसा का सच – क्या सरकार की मिलीभगत थी?
मई 2023 से मणिपुर में लगातार जातीय हिंसा (Ethnic Violence in Manipur) हो रही है। इस हिंसा में अब तक 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग विस्थापित हो चुके हैं।
ऑडियो टेप में क्या कहा गया है?
-
दावा किया जा रहा है कि मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने कुछ समूहों को हथियार लूटने की अनुमति दी थी।
-
इसका सीधा फायदा उन गुटों को मिला जो दंगों में शामिल थे।
- ऑडियो टेप की फॉरेंसिक जांच से पता चलेगा कि आवाज़ असली है या नहीं।
क्या मणिपुर हिंसा सरकार द्वारा प्रायोजित थी? पढ़ें पूरा विवाद!
सरकार का बचाव – ‘विपक्ष भ्रम फैला रहा है!’
मणिपुर सरकार और बीजेपी (BJP) ने इन आरोपों को पूरी तरह से गलत और भ्रामक बताया है।
BJP नेताओं का बयान:
-
“यह विपक्ष की साजिश है, कोई भी ठोस सबूत नहीं है।”
-
“ऑडियो टेप का सोर्स संदिग्ध है, इसे राजनीतिक फायदे के लिए उछाला जा रहा है।”
- “सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार, एफएसएल रिपोर्ट आने के बाद ही सच सामने आएगा।”
क्या सरकार खुद को निर्दोष साबित कर पाएगी? 24 मार्च को होगा बड़ा फैसला!
विपक्ष का पलटवार – ‘मणिपुर हिंसा में सरकार की सीधी संलिप्तता!’
कांग्रेस (Congress), आम आदमी पार्टी (AAP), और अन्य विपक्षी दलों ने BJP पर निशाना साधते हुए कहा:
👉 “अगर मुख्यमंत्री निर्दोष हैं तो ऑडियो टेप की निष्पक्ष जांच से क्यों डर रहे हैं?”
👉 “मणिपुर हिंसा में बीजेपी सरकार की सीधी संलिप्तता है।”
क्या विपक्ष इस मुद्दे को 2024 चुनावों में भुनाने की कोशिश कर रहा है?
क्या होगा आगे? एक्सपर्ट्स की राय
✅ अगर ऑडियो टेप सही साबित हुआ, तो CM Biren Singh की कुर्सी खतरे में पड़ सकती है।
✅ सुप्रीम कोर्ट अगर केस हाईकोर्ट भेजता है, तो जांच लंबी खिंच सकती है।
✅ बीजेपी के लिए 2024 लोकसभा चुनाव से पहले यह मुद्दा बड़ा राजनीतिक नुकसान कर सकता है।
आपको क्या लगता है? क्या मुख्यमंत्री बीरेन सिंह दोषी हैं या यह विपक्ष की साजिश है? कमेंट में अपनी राय दें!
“क्या मणिपुर हिंसा में CM Biren Singh की मिलीभगत थी? सुप्रीम कोर्ट में बड़ा खुलासा!”








