CJP Protest Cancelled की खबर मंगलवार को तब आई जब संगठन के नेता सौरव दास ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वे 5 सितंबर को प्रस्तावित प्रदर्शन को वापस ले रहे हैं। यह फैसला केंद्र सरकार द्वारा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने के आश्वासन के बाद लिया गया।
देखा जाए तो यह NEET परीक्षा घोटाले के खिलाफ चल रहे लंबे आंदोलन का एक अहम मोड़ है। Chief Justice of India (CJI) सूर्या कांत की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय पीठ के सामने सौरव दास ने यह बयान पढ़ा।
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जुलाई के भरोसे पूरे नहीं हुए थे
दिलचस्प बात यह है कि CJP ने केंद्र पर आरोप लगाया था कि 25 जुलाई को NEET और अन्य परीक्षाओं में कथित बेनियमियों को लेकर 36 दिनों का आंदोलन वापस लेने के लिए दिए गए भरोसों को पूरा नहीं किया गया।
समझने वाली बात यह है कि जुलाई में चंडन कुमार सिंह की अगुवाई में छात्रों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक धरना दिया था। तब सरकार ने आश्वासन दिया था कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी और FIR रद्द कर दी जाएंगी।
सॉलिसिटर जनरल का आश्वासन
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सरकार जुलाई में CJP नेताओं को दिए गए भरोसों के प्रति वचनबद्ध है। उन्होंने कहा कि केंद्र और महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल और असम की सरकारें प्रदर्शनकारियों के खिलाफ केस वापस लेने के लिए तैयार हैं।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि केवल उन लोगों के खिलाफ केस रद्द नहीं होंगे जिनके नाम अपराधों से जुड़े मामलों में पहले से शामिल हैं। यानी अगर किसी प्रदर्शनकारी पर पहले से कोई आपराधिक मामला है, तो उसकी FIR रद्द नहीं होगी।
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धारा 142: सुप्रीम कोर्ट की असाधारण शक्ति
सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की कि वह संविधान की धारा 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का प्रयोग करे और निर्देश दे कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ केसों को बंद माना जाए।
अगर गौर करें तो धारा 142 सुप्रीम कोर्ट को इसके सामने लंबित मामले में “पूर्ण न्याय” सुनिश्चित करने के लिए कोई भी आदेश देने का अधिकार देती है। यह एक बहुत शक्तिशाली प्रावधान है, जिसका उपयोग कोर्ट विशेष परिस्थितियों में करता है।
सवाल उठता है कि क्या यह सही है कि सरकार FIR रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से कहे? आम तौर पर FIR रद्द करने का अधिकार राज्य सरकारों के पास होता है। लेकिन यहां केंद्र चाहता है कि सुप्रीम कोर्ट एक समान आदेश दे ताकि सभी राज्यों में एक साथ FIR रद्द हो जाएं।
छात्रों की आत्महत्या: मुआवजे की घोषणा
मेहता ने यह भी कहा कि सरकार आत्महत्या करने वाले विद्यार्थियों के परिवारों को मुआवजे की अदायगी के लिए तीन महीनों के अंदर रूपरेखा तैयार करेगी। दिलचस्प बात यह है कि NEET परीक्षा घोटाले के बाद कई छात्रों ने आत्महत्या कर ली थी।
यह दर्शाता है कि परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी का छात्रों की मानसिक स्वास्थ्य पर कितना गहरा असर पड़ता है। जो छात्र ईमानदारी से तैयारी करते हैं, उन्हें जब यह पता चलता है कि नकल और पैसों से अंक खरीदे जा सकते हैं, तो वे निराश हो जाते हैं।
5 सितंबर का प्रदर्शन क्यों रद्द किया?
CJP ने 5 सितंबर को बड़े पैमाने पर प्रदर्शन करने की योजना बनाई थी क्योंकि उनका आरोप था कि सरकार ने जुलाई के भरोसे पूरे नहीं किए। लेकिन जब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट आश्वासन दिया कि FIR रद्द कर दी जाएंगी, तो CJP ने प्रदर्शन रद्द कर दिया।
समझने वाली बात यह है कि CJP एक जिम्मेदार संगठन की तरह काम कर रहा है। वे बेवजह टकराव नहीं चाहते। अगर सरकार सकारात्मक कदम उठाती है, तो वे भी सहयोग करने को तैयार हैं।
CJI सूर्या कांत की भूमिका
CJI सूर्या कांत ने कहा, “ठीक है, तुम दाखिल करो। जे धिरां समझौता कर रहीआं हन, तां सानूं कोई दिक्कत नहीं है।” (अगर पक्ष समझौता कर रहे हैं, तो हमें कोई दिक्कत नहीं)।
यह दर्शाता है कि सुप्रीम कोर्ट सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच सुलह को बढ़ावा दे रहा है। कोर्ट नहीं चाहता कि मामला लंबे समय तक अदालत में खिंचे।
NEET घोटाला: पूरा मामला क्या है?
NEET (National Eligibility cum Entrance Test) भारत की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा है। 2024 में इस परीक्षा में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी हुई। कुछ छात्रों को परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र मिल गए, कुछ को गलत तरीके से ग्रेस मार्क्स दिए गए।
इससे लाखों ईमानदार छात्र प्रभावित हुए। चंडन कुमार सिंह, जो खुद एक NEET aspirant थे, ने इस मुद्दे को उठाया और छात्र न्याय परिषद (CJP) के बैनर तले आंदोलन शुरू किया।
सरकार की जवाबदेही
यह पूरा मामला सरकार की जवाबदेही का सवाल उठाता है। National Testing Agency (NTA), जो NEET और JEE जैसी परीक्षाएं आयोजित करती है, की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे हैं।
कई विशेषज्ञों का मानना है कि NTA को और पारदर्शी बनाने की जरूरत है। परीक्षा केंद्रों पर CCTV, सख्त निगरानी, और डिजिटल सुरक्षा उपायों को बढ़ाना होगा।
मुख्य बातें (Key Points):
• CJP ने 5 सितंबर के प्रदर्शन को केंद्र सरकार के आश्वासन पर रद्द किया
• सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा – महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल और असम में FIR रद्द होंगे
• धारा 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट से “पूर्ण न्याय” के लिए आदेश की मांग
• आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को 3 महीने में मुआवजे की रूपरेखा तैयार होगी













