Abhinav Chandrachud: सुप्रीम कोर्ट में यूट्यूबर रणवीर इलाहाबादिया (Ranveer Allahbadia) को कानूनी राहत दिलाने के लिए वरिष्ठ वकील अभिनव चंद्रचूड़ (Abhinav Chandrachud) ने याचिका दाखिल की है। इलाहाबादिया पर भारतीय न्याय संहिता 2023 (Bharatiya Nyaya Sanhita 2023) की धारा 79 के तहत केस दर्ज किया गया है, जिसमें आरोप है कि उन्होंने कॉमेडियन समय रैना (Samay Raina) के शो इंडियाज गॉट लैटेंट (India’s Got Latent) में कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं।
इस मामले में असम पुलिस (Assam Police) ने इलाहाबादिया को समन भेजा था, जिसके खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में याचिका दाखिल की। हालांकि, CJI संजीव खन्ना (CJI Sanjiv Khanna) और जस्टिस संजय कुमार (Justice Sanjay Kumar) की बेंच ने तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया, लेकिन केस को जल्द लिस्ट करने की बात कही।
कौन हैं अभिनव चंद्रचूड़?
अभिनव चंद्रचूड़ (Abhinav Chandrachud) भारतीय कानूनी जगत का बड़ा नाम हैं। उनके पिता डीवाई चंद्रचूड़ (DY Chandrachud) भारत के पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI – Chief Justice of India) रह चुके हैं। लेकिन उनकी पहचान सिर्फ एक जज के बेटे के रूप में नहीं, बल्कि एक काबिल वकील और कानूनी लेखक के रूप में भी है।
अभिनव चंद्रचूड़ की शिक्षा और करियर:
- स्टैनफोर्ड लॉ स्कूल (Stanford Law School) से डॉक्टर ऑफ द साइंस ऑफ लॉ (JSD) और मास्टर ऑफ द साइंस ऑफ लॉ (JSM) किया।
- हार्वर्ड लॉ स्कूल (Harvard Law School) से एलएलएम (LL.M) पूरा किया।
- गिब्सन, डॉन एंड क्रचर (Gibson, Dunn & Crutcher – USA) में बतौर एसोसिएट अटॉर्नी (Associate Attorney) काम किया।
- भारत लौटने के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) में प्रैक्टिस शुरू की।
- ‘Republic of Rhetoric’ और ‘Supreme Whispers’ जैसी चर्चित कानूनी किताबें लिखीं।
पिता के CJI रहते सुप्रीम कोर्ट में क्यों नहीं लड़ा केस?
जब डीवाई चंद्रचूड़ (DY Chandrachud) भारत के चीफ जस्टिस थे, तब उनके बेटे अभिनव और चिंतन चंद्रचूड़ (Chintan Chandrachud) ने सुप्रीम कोर्ट में पैरवी करने से इनकार कर दिया था।
पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने अपनी विदाई स्पीच में कहा था, “मैंने अपने बेटों से कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करें, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। उन्होंने कहा- ‘डैड, हम सुप्रीम कोर्ट में बहस तब करेंगे जब आप पद से हटेंगे। अभी वहां प्रैक्टिस करके हम आपकी और अपनी साख पर सवाल क्यों उठने दें?’ यह मेरे लिए गर्व की बात थी कि मेरे बच्चों ने इस पेशे में ईमानदारी बनाए रखी।”
अभिनव चंद्रचूड़ ने अपने पिता के पद को लेकर किसी भी तरह के हितों के टकराव (Conflict of Interest) से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट में केस नहीं लड़ा।
रणवीर इलाहाबादिया केस: क्या हैं कानूनी आरोप?
रणवीर इलाहाबादिया के खिलाफ मामला भारतीय न्याय संहिता 2023 (Bharatiya Nyaya Sanhita 2023) की धारा 79 के तहत दर्ज किया गया है।
क्या कहती है धारा 79?
- यह धारा महिलाओं की गरिमा (Dignity of Women) को ठेस पहुंचाने वाले शब्द, इशारों या अन्य माध्यमों से किए गए कृत्य को अपराध मानती है।
- इसके अलावा, इलाहाबादिया पर महिला की निजता (Privacy Violation) भंग करने का भी आरोप है।
असम पुलिस के समन पर सुप्रीम कोर्ट में दलीलें
अभिनव चंद्रचूड़ ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि:
- असम पुलिस का समन अनुचित है।
- इलाहाबादिया को तुरंत कानूनी राहत दी जानी चाहिए।
- इस तरह की शिकायतें अक्सर सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Speech) को प्रभावित करती हैं।
हालांकि, CJI संजीव खन्ना (Sanjiv Khanna) ने कहा कि इस केस को जल्द लिस्ट किया जाएगा, लेकिन तत्काल सुनवाई नहीं होगी।
अभिनव चंद्रचूड़ कानूनी जगत में अपनी अलग पहचान रखते हैं और सुप्रीम कोर्ट में रणवीर इलाहाबादिया की याचिका दाखिल कर चर्चा में आए हैं। उनके पिता DY चंद्रचूड़ के CJI रहने के दौरान उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में पैरवी से इनकार किया था, जो उनके पेशेवर ईमानदारी (Professional Ethics) को दर्शाता है।
अब देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट इलाहाबादिया की याचिका पर क्या फैसला सुनाता है और असम पुलिस का अगला कदम क्या होगा।