China US fighter jets face-off: चीन और अमेरिका के बीच तनाव अब सिर्फ व्यापार या नीतियों तक सीमित नहीं रह गया है। यह तनाव सीधे आसमान में जा भिड़ा। हाल ही में कोरियाई प्रायद्वीप के पास अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में एक ऐसी घटना घटी, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। दरअसल, करीब 10 अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने वहां अभ्यास किया, जिसके बाद चीन ने भी अपनी वायु सेना को उतार दिया। दोनों देशों के विमानों का आमना-सामना हुआ और यह सिलसिला कई घंटों तक चलता रहा। यह कोई आम मुठभेड़ नहीं थी, बल्कि दो महाशक्तियों के बीच एक हाई वोल्टेज ड्रामा था, जिसने तीसरे विश्व युद्ध की आशंकाओं को एक बार फिर हवा दे दी है।
कैसे हुआ अमेरिका और चीन के विमानों का आमना-सामना?
यह पूरा मामला बुधवार का है, जब दक्षिण कोरिया की समाचार एजेंसी योनहाप ने एक चौंकाने वाली रिपोर्ट प्रकाशित की। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 10 अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने दक्षिण कोरिया के प्योंगटेक एयरबेस से उड़ान भरी। ये विमान दक्षिण कोरिया के पश्चिमी तट से दूर अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में सैन्य अभ्यास कर रहे थे। यह उस इलाके के काफी करीब था, जिसे चीन अपना एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन (ADIZ) मानता है।
हालांकि रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी विमान चीन के ADIZ में दाखिल नहीं हुए थे, लेकिन जैसे ही वे इस इलाके के करीब पहुंचे, चीन ने तुरंत प्रतिक्रिया दिखाई। चीन ने अपनी नौसेना और वायु सेना को तैनात कर दिया। चीनी लड़ाकू विमानों ने अमेरिकी F-16 विमानों को ललकारा और उनके पीछे लग गए। चीन के समर्थित अखबार ग्लोबल टाइम्स ने भी इस घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि चीन ने कानूनों और नियमों के अनुसार पूरी प्रक्रिया के दौरान गतिविधियों की निगरानी की और उनसे निपटने के लिए प्रभावी ढंग से अपनी सेना को तैनात किया।
क्या है एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन (ADIZ)?
इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए सबसे जरूरी है ADIZ को समझना। ADIZ यानी एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन किसी भी देश की संप्रभु हवाई सीमा से अलग होता है। यह एक निर्धारित इलाका होता है, जहां किसी भी देश की सीमा के करीब आने वाले विमानों से अपनी पहचान स्पष्ट करने की अपेक्षा की जाती है। यह क्षेत्र उस देश की हवाई सीमा से कहीं बड़ा होता है। माना जाता है कि चीन ने दक्षिण चीन सागर और अपने पूर्वी तट पर काफी विस्तृत ADIZ बना रखा है। इस घटना में, अमेरिकी विमान इसी ADIZ के करीब पहुंच गए थे, जिससे चीन सतर्क हो गया और उसने अपने विमान भेज दिए।
क्या थी अमेरिकी अभ्यास की वजह और चीन की प्रतिक्रिया?
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन दक्षिण कोरिया पर लगातार अपनी रक्षा की जिम्मेदारी खुद उठाने का दबाव बना रहा है। पिछले महीने जारी नेशनल डिफेंस स्ट्रेटजी में अमेरिका ने साफ संकेत दिया था कि अब दक्षिण कोरिया को उत्तर कोरिया के खिलाफ प्राथमिक जिम्मेदारी लेनी होगी और अमेरिका अब केवल अहम समर्थन (क्रिटिकल सपोर्ट) देने तक सीमित रहना चाहता है।
चीन को आशंका है कि अमेरिका की यह बदली हुई नीति और उसके द्वारा अचानक किए जाने वाले इस तरह के सैन्य अभ्यास, उसके इलाके में तनाव को और बढ़ा सकते हैं। यही वजह है कि चीन ने सख्त रुख अपनाते हुए अपनी सेना को तैनात किया। अमेरिकी F-16 विमानों ने जैसे ही सियोल से लगभग 60 किलोमीटर दूर प्योंगटेक के ओसान एयरबेस से टेक ऑफ किया, चीनी जेट्स (संभवतः J-11) ने उन पर नजर रखनी शुरू कर दी। कई घंटों तक समंदर के ऊपर यह हाई वोल्टेज ड्रामा चलता रहा, हालांकि किसी तरह की कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।
क्षेत्र में बढ़ता तनाव और जापान की भूमिका
यह पहली बार नहीं है जब चीन ने इस तरह से अपनी सैन्य ताकत दिखाई है। हाल के वर्षों में चीन ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी सैन्य गतिविधियां काफी बढ़ा दी हैं। दक्षिण चीन सागर और ताइवान को लेकर उसके कई देशों के साथ विवाद चल रहे हैं।
वहीं दूसरी ओर, अमेरिका का अहम सहयोगी जापान भी चीन को लेकर सतर्क है। जापान पहले ही कह चुका है कि अगर चीन ताइवान पर हमला करता है, तो जापान कानूनी रूप से सैन्य कार्रवाई कर सकता है। इससे पहले दिसंबर में जापान ने आरोप लगाया था कि एक चीनी लड़ाकू जेट ने उसके विमान पर हथियार डालने का लक्ष्य रखकर रडार लॉक किया था। इस घटना ने भी क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है।
क्या कहा दक्षिण कोरिया और अमेरिका ने?
इस पूरे मामले पर अब तक अमेरिकी सेना (यूएस फोर्सेज कोरिया) की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, जो दक्षिण कोरिया में तैनात लगभग 28,500 अमेरिकी सैनिकों की कमान संभालती है। हालांकि, दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि अमेरिकी बल और उसकी सेना मिलकर मजबूत रक्षा व्यवस्था बनाए हुए हैं। खास बात यह है कि इस अभ्यास में दक्षिण कोरिया की सेना शामिल नहीं थी और उसे इस उड़ान के बारे में पहले से पूरी जानकारी नहीं थी।
क्या है पूरे मामले की पृष्ठभूमि?
चीन और अमेरिका के बीच यह तनाव कोई नया नहीं है। व्यापार युद्ध से लेकर तकनीकी वर्चस्व और क्षेत्रीय विवादों तक, दोनों देश लंबे समय से एक-दूसरे के आमने-सामने हैं। कोरियाई प्रायद्वीप भी लंबे समय से तनाव का केंद्र रहा है, जहां उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में अमेरिका का यह अभ्यास और चीन की त्वरित प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि इस क्षेत्र में स्थिति कितनी नाजुक हो गई है। यह घटना स्पष्ट करती है कि महाशक्तियां एक-दूसरे की हर हरकत पर कितनी बारीकी से नजर रख रही हैं और कोई भी छोटी सी गलतफहमी बड़े संकट का कारण बन सकती है।
मुख्य बातें (Key Points)
अमेरिका के करीब 10 लड़ाकू विमानों ने दक्षिण कोरिया के पश्चिमी तट के पास अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में अभ्यास किया।
चीन ने इसे अपने एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन (ADIZ) के करीब मानते हुए अपने लड़ाकू विमान तैनात कर दिए।
दोनों देशों के विमानों का आमना-सामना हुआ और यह तनाव कई घंटों तक जारी रहा।
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका दक्षिण कोरिया पर अपनी रक्षा की जिम्मेदारी बढ़ाने का दबाव बना रहा है।
दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसे इस अभ्यास के बारे में पहले से जानकारी नहीं थी और उसके विमान इसमें शामिल नहीं थे।








