Chandra Grahan 2026: इस बार होलिका दहन एक ऐसे दुर्लभ खगोलीय संयोग के साथ आ रहा है जो बरसों में एक बार होता है। 3 मार्च 2026 को जहां एक ओर बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक होलिका दहन मनाया जाएगा, वहीं उसी दिन साल का पहला चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) भी लगने जा रहा है। ज्योतिषीय दृष्टि से यह संयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि ग्रहण काल में शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है और सूतक काल के नियम लागू हो जाते हैं।
वैदिक पंचांग के अनुसार होलिका दहन का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 48 मिनट से रात 8 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। इस बीच किसी भी समय विधि-विधान के साथ दहन किया जा सकता है। कई ज्योतिष विशेषज्ञ यह भी कह रहे हैं कि 2 मार्च को भी होलिका दहन किया जा सकता है।
‘चंद्र ग्रहण का समय: दोपहर से शाम तक’
ज्योतिषीय गणना के अनुसार 3 मार्च को चंद्र ग्रहण की शुरुआत दोपहर 3:20 बजे होगी और इसका समापन शाम 6:47 बजे होगा। ग्रहण लगने से ठीक 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है और ग्रहण समाप्त होते ही सूतक भी खत्म माना जाता है।
गौर करने वाली बात यह है कि ग्रहण शाम 6:47 पर खत्म होगा और दहन का मुहूर्त शाम 6:48 से शुरू होगा। यानी महज एक मिनट का अंतर, और उस एक मिनट के बाद का समय दहन के लिए पूरी तरह शुद्ध और शुभ रहेगा।
‘भारत में दिखेगा चंद्र ग्रहण? बड़ा सवाल, जानें जवाब’
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा? ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार यह चंद्र ग्रहण भारत में दृश्यमान रहेगा। इसी कारण इसका सूतक काल भी पूरी तरह मान्य माना जाएगा और धार्मिक नियमों का पालन करना आवश्यक होगा।
अगर ग्रहण भारत में न दिखे तो सूतक काल लागू नहीं होता। लेकिन इस बार ऐसा नहीं है, इसलिए श्रद्धालुओं को सभी नियमों का ध्यान रखना होगा।
‘सूतक काल में क्या करें, क्या न करें’
सूतक काल शुरू होने से पहले भोजन और पानी में तुलसी के पत्ते डाल देने चाहिए। ऐसा करने से भोजन पर ग्रहण का नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। ग्रहण के दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और भगवान की मूर्तियों को स्पर्श नहीं किया जाता।
इस समय पूजा-पाठ की जगह मंत्र जाप और ध्यान करना अधिक शुभ माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र कहता है कि ग्रहण काल में नियमों की अनदेखी से मानसिक और शारीरिक परेशानियां बढ़ सकती हैं।
‘ग्रहण के बाद करें ये काम: घर में आएगी शुद्धि और समृद्धि’
ग्रहण समाप्त होने के बाद सबसे पहले घर की साफ-सफाई करने का विशेष महत्व बताया गया है। इसके बाद गंगाजल का छिड़काव कर वातावरण को शुद्ध किया जाता है। फिर घी का दीपक जलाकर भगवान की पूजा की जाती है।
जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करना इस समय अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। जो लोग श्रद्धा और विधि से इन नियमों का पालन करते हैं, उन्हें सकारात्मक फल मिलने की मान्यता है।
‘आस्था और उत्सव का अनोखा मेल’
एक तरफ होलिका की अग्नि में बुराई को जलाने का उत्सव और दूसरी तरफ चंद्र ग्रहण के नियमों का पालन: यह संयोग बताता है कि भारतीय संस्कृति में उत्सव और अनुशासन दोनों साथ-साथ चलते हैं। जो समय और परंपराओं को समझकर इस पर्व को मनाएगा, वह दोनों की शुभता का लाभ उठा सकेगा।
‘क्या है पृष्ठभूमि’
होलिका दहन हर साल फाल्गुन पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस बार 3 मार्च 2026 को यह पर्व है। उसी दिन साल का पहला चंद्र ग्रहण भी पड़ रहा है जो भारत में दृश्यमान होगा। यह संयोग ज्योतिषीय और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत विशेष माना जा रहा है।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- 3 मार्च 2026 को होलिका दहन और साल का पहला चंद्र ग्रहण एक ही दिन।
- चंद्र ग्रहण दोपहर 3:20 से शाम 6:47 तक, होलिका दहन का मुहूर्त शाम 6:48 से रात 8:50 तक।
- यह चंद्र ग्रहण भारत में दृश्यमान रहेगा, इसलिए सूतक काल पूरी तरह मान्य होगा।
- सूतक काल में मंत्र जाप करें, भोजन में तुलसी डालें, मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे।
- ग्रहण के बाद घर की सफाई, गंगाजल छिड़काव और दान करना शुभ माना गया है।








