Chandigarh Rose Festival Organ Donation: चंडीगढ़ में चल रहे रोज फेस्टिवल (गुलाब महोत्सव) ने इस बार एक नई पहचान बनाई है। यहां फूलों की खूबसूरती के साथ-साथ मानवता की मिसाल भी देखने को मिली। फेस्टिवल देखने आए 139 लोगों ने अंगदान (Organ Donation) करने का ऐतिहासिक फैसला लिया। उन्होंने इस संबंध में दस्तावेज भरकर दूसरों को जीवन देने का संकल्प लिया। अंगदान के लिए फार्म भरने वालों में केवल चंडीगढ़ ही नहीं, बल्कि हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश के लोग भी शामिल थे। कई कपल ने साथ मिलकर यह फैसला लिया और दूसरों के लिए प्रेरणा बने।
क्या कहना है ROTTO अधिकारियों का?
रीजनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (ROTTO) के नोडल अधिकारी प्रो. विपिन कौशल ने इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा, “रोज फेस्टिवल जीवन और नवजीवन का प्रतीक है। यह देखकर अत्यंत संतोष हुआ कि नागरिकों ने इसी भावना को अपनाते हुए दूसरों को जीवन देने का संकल्प लिया। हर प्रतिज्ञा आशा और सहानुभूति का सशक्त संदेश है।”
लंबे समय से चला आ रहा था इंतजार
इस मौके पर बबीता अरोड़ा ने अपने पति के साथ अंगदान की प्रतिज्ञा ली। उन्होंने कहा कि वे लंबे समय से यह निर्णय लेना चाहती थीं और रोज फेस्टिवल ने उन्हें यह कदम उठाने का अवसर दिया। डेराबस्सी की दीया ने भी संकल्प पत्र भरते हुए अपने मित्रों को आगे आने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अंगदान को “जीवन से परे की जिम्मेदारी” बताया।
युवाओं ने भी दिखाया उत्साह
बलटाना के पिंडर सिंह, मोहाली के चरणजीत सिंह, चंडीगढ़ के राजेश कुमार और पटियाला के मयंक कठैत ने भी संकल्प लिया। उन्होंने इसे “किसी को जीवन का दूसरा अवसर देने की दिशा में छोटा लेकिन महत्वपूर्ण कदम” बताया। सभी ने एक स्वर में कहा कि अंगदान करुणा की स्थायी विरासत है।
हिसार के कपल ने भी लिया फैसला
हरियाणा के हिसार से आए मंजू और संदीप कुमार ने साथ मिलकर संकल्प लिया। उन्होंने परामर्शदाताओं से विस्तृत चर्चा की और कहा कि अंगदान मानवता की सच्ची भावना को दर्शाता है। उन्होंने अपने परिवार में भी इस विषय पर संवाद शुरू करने की बात कही।
लोगों के सवालों का दिया गया जवाब
इस दौरान लोगों ने अंगदान से जुड़े कई सवाल भी पूछे। अंबाला के विकास मल्होत्रा ने जानना चाहा कि क्या अंगदान से परिवार पर कोई आर्थिक बोझ पड़ेगा। रोहतक की शालिनी मेहता ने अंग आवंटन और प्रतीक्षा सूची की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए। होशियारपुर के गुरप्रीत सिंह ने दुरुपयोग और व्यावसायिक शोषण रोकने के प्रावधानों के बारे में जानकारी ली।
विशेषज्ञों ने सभी प्रश्नों का विस्तृत और संतोषजनक उत्तर दिया। उन्होंने बताया कि भारत में अंगदान सख्त कानूनी एवं नैतिक ढांचे के अंतर्गत पारदर्शी प्रणाली से संचालित होता है। संकल्प लेने वाले नागरिकों को सम्मान स्वरूप प्रशंसा प्रमाण पत्र, स्मृति चिन्ह और जागरूकता सामग्री प्रदान की गई, जिससे इस निर्णय को उत्सव का रूप मिल गया।
मुख्य बातें (Key Points)
चंडीगढ़ रोज फेस्टिवल में 139 लोगों ने अंगदान का संकल्प लिया।
फार्म भरने वालों में हरियाणा, पंजाब, हिमाचल और चंडीगढ़ के लोग शामिल।
बबीता अरोड़ा-पति, मंजू-संदीप जैसे कपल ने साथ मिलकर लिया फैसला।
ROTTO के नोडल अधिकारी प्रो. विपिन कौशल ने पहल की सराहना की।
लोगों ने अंगदान की पारदर्शिता और कानूनी प्रक्रिया पर सवाल पूछे।








