Chaitra Navratri 2026 कल यानी 19 मार्च 2026 से शثरू हो रही है और इसी दिन से भारतीय नव वर्ष संवत 2083 का भी शुभारंभ हो रहा है। प्रश्न कुंडली विशेषज्ञ पंडित सुरेश पांडे ने बताया कि इस बार घट स्थापना यानी कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त कुल 50 मिनट का है, जो सुबह 6:52 से 7:43 तक रहेगा। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 से 12:53 तक है। इस बार मां दुर्गा पालकी पर सवार होकर आ रही हैं, जो परिवर्तन और चुनौतियों का संकेत है, जबकि मां की विदाई हाथी पर होगी जो सुख, समृद्धि और अच्छे समय की शुरुआत मानी जाती है। नवरात्रि का यह पर्व धनधान्य, संतान वृद्धि, आरोग्य और मोक्ष प्रदान करने वाला माना गया है।
भारतीय नव वर्ष संवत 2083 का शुभारंभ
Chaitra Navratri 2026 के साथ ही कल से भारतीय नव वर्ष की भी शुरुआत हो रही है। पंडित सुरेश पांडे ने बताया कि भारतीय नव वर्ष हमेशा चैत्र नवरात्रि के पहले दिन से शुरू होता है। यह ईसा पूर्व 57 वर्ष पहले शुरू हुआ था, इसलिए जब अंग्रेजी कैलेंडर में सन 2026 चल रहा है, तो भारतीय संवत 2082 चल रहा है और कल से संवत 2083 शुरू हो जाएगा। यानी भारतीय कालगणना अंग्रेजी कैलेंडर से 57 साल आगे है।
पंडित जी ने अपने समस्त दर्शकों को भारतीय नव वर्ष के शुभारंभ की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह दिन अत्यंत पवित्र और शुभ है क्योंकि नवरात्रि और नव वर्ष दोनों का संगम एक साथ हो रहा है।
नवरात्रि व्रत का शास्त्रीय महत्व: भोग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति
Chaitra Navratri 2026 के महत्व को समझाते हुए पंडित सुरेश पांडे ने श्रीमद् देवी भागवत महापुराण के तृतीय स्कंध के 27वें अध्याय का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि इस पृथ्वी लोक में जितने भी प्रकार के व्रत और दान हैं, वे इस नवरात्र व्रत के तुल्य नहीं हैं। यह व्रत सदा धनधान्य प्रदान करने वाला, सुख तथा संतान की वृद्धि करने वाला, आयु तथा आरोग्य प्रदान करने वाला और स्वर्ग तथा मोक्ष को देने वाला है।
मार्कंडेय पुराण का श्लोक उद्धृत करते हुए पंडित जी ने बताया: “यही संपूजिता नित्यम प्रसाद धन भोजन” अर्थात जो नित्य भगवती की पूजा प्रसाद, धन और भोजन से करता है, मां सबसे पहले उसे धन देती हैं, फिर पुत्र देती हैं ताकि धन का सदुपयोग हो सके, फिर सुंदर मति देती हैं ताकि धन बर्बाद न हो, और अंत में सुंदर गति यानी मोक्ष प्रदान करती हैं।
पंडित जी ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण बात बताई कि भोग को दूसरे शास्त्रों में जहर कहा गया है, लेकिन भगवती के साधकों और शक्ति के उपासकों को भोग और मोक्ष दोनों प्राप्त करने का अधिकार जगदंबा की कृपा से होता है। यहां तक कि कोई महापापी भी अगर नवरात्रि का व्रत कर ले, तो वह समस्त पापों से मुक्ति पा लेता है।
पूरे नवरात्र का व्रत न कर सकें तो ये विकल्प अपनाएं
Chaitra Navratri 2026 में जो लोग पूरे नौ दिन का व्रत रखने में असमर्थ हैं, उनके लिए भी शास्त्रों में विकल्प बताए गए हैं। पंडित सुरेश पांडे ने बताया कि ऋषियों ने संपूर्ण नवरात्र व्रत के पालन में असमर्थ लोगों के लिए कई प्रकार के व्रत विधान किए हैं।
सप्तरात्र व्रत में प्रतिपदा से सप्तमी तिथि तक व्रत रखा जाता है। पंचरात्र व्रत में पंचमी को एक समय भोजन, षष्ठी में सिर्फ रात को एक बार भोजन, सप्तमी में जो मिल जाए वह खाकर व्रत, अष्टमी को निराहार रहकर और नवमी को व्रत खोलने से यह व्रत पूरा होता है।
देवी भागवत में कहा गया है कि सप्तमी, अष्टमी और नवमी तिथि पर अगर व्रत कर लिया जाए तो नवरात्रि के पूर्ण फल के बराबर भी इसका फल मिलता है। युग्म रात्र व्रत में नवरात्रि के पहले और आखिरी दिन व्रत रखा जाता है, जो भारत में सबसे ज्यादा प्रचलित है। पहले दिन और अष्टमी का व्रत करके भी जीवन को सुखी और समृद्धिशाली बनाया जा सकता है।
व्रत का असली अर्थ: सिर्फ उपवास नहीं, इंद्रिय संयम है
Chaitra Navratri 2026 में व्रत रखने वालों के लिए पंडित सुरेश पांडे ने एक बेहद गहरी बात बताई। उन्होंने कहा कि व्रत का शाब्दिक अर्थ उपवास नहीं होता, बल्कि इंद्रिय संयम होता है। न बोलने वाली बात को न बोलना, न सुनने वाली बात को न सुनना, न देखने वाली चीज को न देखना, न खाने वाली चीज को न खाना, न छूने वाली चीज को न छूना और न सोचने वाली चीज को न सोचना: यही इंद्रिय संयम व्रत कहलाता है।
भगवान कृष्ण ने गीता में कहा है कि “व्रतों में मैं मौन हूं।” लेकिन मौन का अर्थ सिर्फ मुंह बंद रखना नहीं है। असली मौन काष्ठ मौन है, जैसे काठ (लकड़ी) न हिलती है, न बोलती है, न चलती है। मन, वचन और कर्म तीनों से शांत हो जाना ही सच्चा मौन व्रत है।
चुप साधना: एक मिनट की साधना हजारों वर्ष के बराबर
पंडित सुरेश पांडे ने Chaitra Navratri 2026 में भाई जी हनुमान प्रसाद पोदार की चुप साधना के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि पोदार जी ने चुप साधना को बहुत ऊंचा दर्जा दिया है और लिखा है कि अगर कोई व्यक्ति एक मिनट की चुप साधना कर सकता है, तो वह दुनिया का बहुत बड़ा साधक है।
चुप साधना का मतलब है कि एक मिनट तक आपका मन निर्विकार और स्थिर हो जाए, कहीं न जाए, कोई चिंतन न करे, केवल अंतर जगत में रहे। पंडित जी ने स्वीकार किया कि उन्होंने कई बार अभ्यास करके देखा है, 5-10 सेकंड तो संभव है, लेकिन 15 सेकंड भी बहुत मुश्किल होता है। अगर यह एक मिनट की साधना हो जाए तो हजारों वर्ष की दूसरी साधना के बराबर है।
अजपा जप का रहस्य: नवरात्रि में 10 माला करें तो सारी रिद्धि-सिद्धि मुट्ठी में
Chaitra Navratri 2026 में पंडित सुरेश पांडे ने अजपा जप की विधि बताई जो सामान्य मंत्र जप से कहीं ज्यादा प्रभावशाली है। अजपा जप का मतलब है जो बिना जपे जपा जाए। इसमें जिस नाक से श्वास चल रही है, उसी नासिका के अग्र छिद्र पर ध्यान केंद्रित करना है और आती-जाती सांस को देखना शुरू करना है।
उदाहरण के लिए “ओम ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे नमः” मंत्र का जप करते हुए “ओम ऐं ह्रीं क्लीं” सोचते हुए श्वास को नाभि तक ले जाना है और “चामुंडायै विच्चे नमः” कहते हुए श्वास बाहर निकालना है। पंडित जी ने कहा कि पूरे नवरात्र रोज सिर्फ 10 माला इस विधि से कर लें, तो सारी रिद्धि-सिद्धि मुट्ठी में आ जाएगी।
उन्होंने मिर्जापुर जिले के विजयपुर के संत राजा बाबा का उदाहरण दिया, जिन्होंने लिखा है कि अगर 12,000 ओम मंत्र का अजपा जप कोई करे, तो एक वर्ष के अंदर भगवान दर्शन देते हैं।
नवरात्रि 2026: नौ दिन, नौ देवियां, जानें किस दिन किसकी पूजा
Chaitra Navratri 2026 में नौ दिनों में नौ देवियों की पूजा का विधान है। पंडित सुरेश पांडे ने हर दिन का विस्तृत विवरण बताया।
19 मार्च, गुरुवार: मां शैलपुत्री की पूजा। हिमालय की कन्या, अखंड सौभाग्य की प्रतीक। पूजा में सफेद तिल, दूध, सफेद चंदन, बेलपत्र और मखाना प्रयोग करें।
20 मार्च, शुक्रवार: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा। तप, त्याग, वैराग्य और संयम की प्रतिमूर्ति। इनकी पूजा से व्यक्ति संघर्षों से कभी नहीं डरता और हर जगह विजय प्राप्त होती है।
21 मार्च, शनिवार: मां चंद्रघंटा की पूजा। जिनके मस्तक पर चंद्रमा विराजमान है। पाप, ताप और सभी बाधाओं से मुक्ति देने वाला रूप।
22 मार्च, रविवार: मां कुष्मांडा की पूजा। रोग शोक का विनाश करने वाली और लंबी आयु, यश और बल बुद्धि प्रदान करने वाली।
23 मार्च, सोमवार: मां स्कंदमाता की पूजा। स्वामी कार्तिकेय की मां, ममतामय रूप। इनकी कृपा से मूढ़ भी ज्ञानी हो जाता है। जिनको संतान नहीं है, वह इस रूप से गोद भरने की प्रार्थना करें।
24 मार्च, मंगलवार: मां कात्यायनी की पूजा। ब्रह्मा, विष्णु और महेश के तेज से प्रकट। अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष चारों फल प्रदान करती हैं।
25 मार्च, बुधवार: मां कालरात्रि की पूजा। काल का नाश करने वाली। रात्रि में पूजा का विधान। अकाल मृत्यु का भय, नकारात्मक ऊर्जा और कर्ज से मुक्ति।
26 मार्च, गुरुवार: महाअष्टमी, मां महागौरी की पूजा। मनपसंद जीवन साथी की प्राप्ति। कुंवारी कन्याएं उपासना करें तो मां जल्दी प्रसन्न होती हैं। सीता जी ने भी जनकपुर में महागौरी की पूजा की थी।
27 मार्च, शुक्रवार: रामनवमी और मां सिद्धिदात्री की पूजा। भगवान शिव ने इन्हीं की उपासना से सभी सिद्धियां प्राप्त की थीं, जिससे उनका अर्धनारीश्वर स्वरूप बना। 28 मार्च शनिवार को मां दुर्गा की मूर्ति विसर्जन होगा।
कलश स्थापना की संपूर्ण विधि: स्टेप बाय स्टेप
Chaitra Navratri 2026 में कलश स्थापना की पूरी विधि पंडित सुरेश पांडे ने विस्तार से बताई है। कलश दो रखे जाते हैं: एक वरुण कलश और एक स्थापना कलश। वरुण कलश में सातों समुद्रों और वरुण देवता का आवाहन किया जाता है, जबकि स्थापना कलश में मां दुर्गा का आवाहन होता है।
वरुण कलश की विधि: सबसे पहले जौ या सप्तधान्य को आज ही पानी में भिगो दें। कल इसे पानी से छानकर बालू युक्त मिट्टी में मिलाकर एक ढेरी बनाएं। इस पर तांबे, पीतल या मिट्टी का कलश रखें। कलश के कंठ पर कलावा बांधें, कुमकुम से स्वास्तिक बनाएं। कलश में शुद्ध जल और गंगाजल भरें। साबुत सुपारी, दुरवा, फूल, इत्र, पंच रत्न और सिक्के डालें। ऊपर अशोक या आम के पांच पत्ते रखें। ढक्कन लगाकर चावल भरें।
नारियल रखने का सही तरीका: गलत रखने से हो सकता है नुकसान
Chaitra Navratri 2026 में कलश पर नारियल रखने को लेकर पंडित सुरेश पांडे ने एक बेहद जरूरी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि टीवी और सोशल मीडिया पर अक्सर कलश पर खड़ा हुआ नारियल दिखाया जाता है, जो गलत है।
शास्त्रों के अनुसार: नारियल का मुंह नीचे की तरफ हो तो शत्रु बढ़ते हैं। नारियल का मुंह ऊपर की तरफ हो तो रोग बढ़ता है। नारियल का मुंह पूर्व की तरफ हो तो धन का नाश होता है। इसलिए नारियल को लाल चुन्नी में लपेटकर, कलावे से बांधकर, कलश पर ऐसे रखें कि नारियल का मुंह साधक (पूजा करने वाले) की तरफ हो। नारियल का मुंह उस सिरे पर होता है जहां से वह पेड़ की टहनी से जुड़ा होता है।
गणेश, गौरी, नवग्रह और भैरव की स्थापना
Chaitra Navratri 2026 में कलश स्थापना के साथ-साथ अन्य देवताओं की भी स्थापना करनी होती है। पंडित जी ने बताया कि एक मिट्टी के करवे में चावल भरकर उसपर गरी गोला या सुपारी पर कलावा लपेटकर दक्षिण दिशा में गणेश जी की स्थापना करें।
गणेश जी के बाएं तरफ गौरी की स्थापना करें। गाय का सूखा गोबर मिले तो उसकी गौरी बनाएं, नहीं तो पीसी हुई हल्दी को आटे की तरह गूंथकर शिवलिंग जैसे आकार में गौरी बना लें। यह भी मान्य है।
एक और करवे में चावल भरकर सुपारी पर कलावा लपेटकर नवग्रह की स्थापना करें। तीसरे करवे में चावल भरकर सुपारी रखकर नीला या लाल कलावा लपेटकर भैरव की स्थापना करें।
पंडित जी ने जोर देकर कहा कि भैरव जी मां दुर्गा के प्रमुख द्वारपाल हैं। बिना इनकी अनुमति के माता के दर्शन नहीं होते। उन्होंने विंध्याचल के मां विंध्यवासिनी मंदिर का उदाहरण दिया, जहां पहले बटुक भैरव मंदिर में जाकर अनुमति लेने के बाद ही माता का दर्शन किया जाता है।
मां दुर्गा की चौकी स्थापना की विधि
Chaitra Navratri 2026 में कलश स्थापना के बाद मां दुर्गा की चौकी लगाने की विधि भी पंडित जी ने बताई। आम की लकड़ी की चौकी सबसे उत्तम है, न मिले तो किसी भी लकड़ी की चौकी पर चंदन का लेप करके काम चलाएं। चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर अष्टदल कमल बनाएं।
चौकी पर तांबे के लोटे में चावल भरकर, नारियल में सोने या लोहे की कील लगाकर ब्लाउज पीस से पिरामिड आकार बनाएं। ऊपर देवी का मुखौटा लगा सकते हैं और साड़ी पहनाकर माता का स्वरूप बना सकते हैं। मां दुर्गा की चौकी कलश के पूर्व तरफ, हल्का दाहिनी ओर रखें।
एक अलग चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर दुर्गा सप्तशती की पुस्तक भी स्थापित करें। रोज इसकी धूप, दीप, गंध, अक्षत, पुष्प और नैवेद्य से पूजा करें। पंडित जी ने कहा कि केवल दुर्गा सप्तशती की पूजा करने से भी बहुत पुण्य की प्राप्ति होती है।
अखंड दीपक के जरूरी नियम: जो नहीं जानते वो गलती कर बैठते हैं
Chaitra Navratri 2026 में अखंड दीपक जलाने को लेकर पंडित सुरेश पांडे ने कई महत्वपूर्ण नियम बताए। उन्होंने कहा कि अखंड दीपक के सामने बैठकर जप करने से पूजा का कई हजार गुना फल प्राप्त होता है, लेकिन अखंड दीपक वही लोग जलाएं जो 24 घंटे दीप की रक्षा कर सकें।
दीपक जलाना उतना पुण्यदायी नहीं है, जितना दीपक का बुझ जाना अशुभ है। इसलिए अगर 24 घंटे अलर्ट नहीं रह सकते, तो अखंड दीपक न जलाएं। सामान्य पूजा के समय दीपक जलाएं, पूजा समाप्त होने पर घी-तेल खत्म होने पर अपने आप बुझ जाएगा, इसका कोई दोष नहीं।
दीपक में हमेशा गाय के घी का प्रयोग करें। शुद्ध गाय का घी न मिले तो तिल के तेल का दीपक जलाएं। घी का दीपक मां दुर्गा के दाहिनी तरफ और तेल का दीपक बाईं तरफ रखें। दोनों में लेटी हुई बत्ती होनी चाहिए।
सबसे महत्वपूर्ण बात: दीपक से दीपक कभी न जलाएं। एक जलते दीपक से दूसरा दीपक, धूपबत्ती या अगरबत्ती जलाना महादोष है। इससे रोग बढ़ता है, ऋण बढ़ता है और शत्रुता भी बढ़ती है। हमेशा माचिस का प्रयोग करें।
आज ही खरीद लें पूजा सामग्री: पूरी लिस्ट
Chaitra Navratri 2026 के लिए पंडित सुरेश पांडे ने आज ही सारी पूजा सामग्री खरीदने की सलाह दी है। दो तांबे के कलश, आम की लकड़ी की चौकी, लाल या पीला वस्त्र (तीन पीस, दो लाल एक पीला), रोली, रक्षा, सुपारी, कपूर, चावल, जौ, धूप, दीप, नैवेद्य की सामग्री खरीद लें।
अगर दुर्गा प्रतिमा खरीद सकते हैं तो चांदी की प्रतिमा सबसे उत्तम है। सोने की प्रतिमा का रखरखाव कठिन होता है इसलिए उसकी सलाह नहीं दी गई। चांदी न खरीद सकें तो मिट्टी की प्रतिमा भी ले सकते हैं। साथ ही दुर्गा सप्तशती की पुस्तक भी जरूर खरीदें।
दुर्गा सप्तशती का पाठ: विंध्याचल की अनसुनी कहानी
Chaitra Navratri 2026 में दुर्गा सप्तशती के पाठ को लेकर पंडित सुरेश पांडे ने विंध्याचल का एक अद्भुत अनुभव साझा किया। सन 2002 में जब वे विंध्याचल में रहकर पाठ करते थे, तो एक व्याकरणाचार्य पंडित आए और सवा रुपये में पाठ करवाने लगे। एक पंडित ने पूरी दुर्गा सप्तशती ऐसे ही उलट-पलटकर देख ली और कहा कि पाठ पूरा हो गया।
जब व्याकरणाचार्य ने आपत्ति जताई तो उस पंडित ने कहा: “दुर्गा सप्तशती में ही लिखा है ‘विद्या समस्ता स्तव देवी भेदा’ और ‘सुधा तुम अक्षरे नित्यम’ अर्थात मां अक्षरों में अमृत के रूप में हर समय विराजमान रहती हैं। तो मैंने पूरी पुस्तक के अमृतमय अक्षरों को देख लिया, पाठ पूर्ण हुआ।”
पंडित जी ने कहा कि अगर आप पाठ नहीं भी कर सकते और दुर्गा सप्तशती का एक-एक पन्ना पलटकर देख भी लिया, तो मां प्रसन्न होंगी। दुर्गा सप्तशती को हमेशा लाल कपड़े में लपेटकर, श्रद्धा के स्थान पर रखना चाहिए।
भक्ति का सार: मां हर भाषा समझती हैं
Chaitra Navratri 2026 में पंडित सुरेश पांडे ने सबसे भावुक बात कही कि मां दुर्गा की पूजा के लिए संस्कृत मंत्र या स्तोत्र जानना जरूरी नहीं है। जैसे तोतले बच्चे की भाषा मां समझती है, वैसे ही हमारी सारी भाषा को माता समझती हैं। जिस भाषा में आप प्रार्थना करेंगे, वह भाषा दुनिया न समझे, लेकिन माता समझती हैं।
पंडित जी ने कहा कि भक्ति मार्ग में जब “मैं माता का, माता मेरी” यह भाव दृढ़ हो जाता है, तब सारी समस्याओं का समाधान ऐसे होता है जैसे सूर्य के उदय होने पर अंधकार दूर हो जाता है। अगर आप दिन में सिर्फ 10 बार “मां, मां, मां” कहकर भी दुर्गा का ध्यान कर लें, तो बात बन जाएगी।
धैर्य रखें: एक नवरात्र में चमत्कार की उम्मीद न करें
पंडित सुरेश पांडे ने Chaitra Navratri 2026 में एक बेहद व्यावहारिक बात कही। उन्होंने कहा कि जिन घरों में 10-20 साल से पूजा-पाठ नहीं हुआ है, वहां पहली बार अनुष्ठान करने पर कई बाधाएं आ सकती हैं। दीपक बुझने, कुत्ते-बिल्ली का प्रवेश, कलश गिरने जैसी घटनाएं हो सकती हैं।
उन्होंने कहा कि यह सोचना गलत है कि एक नवरात्र की पूजा से सब कुछ बदल जाएगा। अगर पापों का पहाड़ है और उसे माचिस की तीली से जलाना चाहेंगे, तो समय लगेगा। दो-चार साल का समय लग सकता है, लेकिन धैर्य रखें। मां पार्वती को भी 12,000 वर्ष तक अपर्णा के रूप में तपस्या करनी पड़ी थी, तब भगवान शिव की प्राप्ति हुई थी। सात्विक जीवन जीएं, किसी की निंदा न करें, सबका भला सोचें और जगदंबा की उपासना करें।
मुख्य बातें (Key Points)
- Chaitra Navratri 2026 कल 19 मार्च से शुरू, घट स्थापना मुहूर्त सुबह 6:52 से 7:43 तक, भारतीय नव वर्ष संवत 2083 का भी शुभारंभ, अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 से 12:53 तक।
- कलश पर नारियल का मुंह साधक की तरफ रखें, ऊपर या नीचे की तरफ रखने से शत्रु, रोग या धन हानि होती है; कलश दो रखे जाते हैं: वरुण कलश और स्थापना कलश।
- दीपक से दीपक कभी न जलाएं यह महादोष है, हमेशा माचिस का प्रयोग करें; पूरे 9 दिन का व्रत न कर सकें तो सप्तमी, अष्टमी और नवमी का व्रत करने से भी पूर्ण फल मिलता है।
- व्रत का असली अर्थ इंद्रिय संयम है, मां हर भाषा समझती हैं, संस्कृत न आए तो भी किसी भी भाषा में सच्चे मन से प्रार्थना करें, दुर्गा सप्तशती के पन्ने पलटकर देखने मात्र से भी पुण्य मिलता है।








