CAG Report Punjab के आंकड़ों को लेकर पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने सोमवार 17 मार्च 2026 को चंडीगढ़ में आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल ऑफ इंडिया (CAG) की हालिया रिपोर्ट ने पंजाब की वित्तीय स्थिति की पोल खोल दी है। 2019-20 से 2023-24 के बीच राज्य का वित्तीय घाटा और सब्सिडी खर्च दोनों दोगुणा हो गए हैं, जबकि कर्ज का बोझ अब 4.17 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।
वित्तीय घाटा 14,285 करोड़ से बढ़कर 28,215 करोड़: CAG के आंकड़े चौंकाने वाले
रंधावा ने CAG Report Punjab के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 2019-20 में जब कांग्रेस की सरकार थी, तब पंजाब का वित्तीय घाटा 14,285 करोड़ रुपये था। लेकिन 2023-24 में यह बढ़कर 28,215 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो लगभग दोगुणा है। यह आंकड़ा बताता है कि राज्य की आय और खर्च के बीच का फासला तेजी से बढ़ रहा है।
इसी दौरान पंजाब का कुल कर्ज जो 2019-20 में 1.62 लाख करोड़ रुपये था, वह 2023-24 में बढ़कर 2.08 लाख करोड़ रुपये हो गया। मौजूदा वित्तीय वर्ष में यह कर्ज 4.17 लाख करोड़ रुपये पहुंच चुका है। रंधावा ने चेतावनी दी कि अगर यही रफ्तार जारी रही तो इसी साल के अंत तक यह कर्ज 5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
सब्सिडी दोगुणा: 92 से 99 फीसदी बिजली पर खर्च
CAG Report Punjab से एक और चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। रंधावा ने बताया कि 2019-20 में सब्सिडी का खर्च 10,161 करोड़ रुपये था, जो 2023-24 में बढ़कर 18,770 करोड़ रुपये हो गया। यह लगभग दोगुणा वृद्धि है। सबसे अहम बात यह है कि इस पूरी सब्सिडी में 92 से 99 फीसदी हिस्सा अकेले बिजली सब्सिडी का है।
मुफ्त बिजली योजना AAP सरकार की सबसे बड़ी योजनाओं में से एक रही है, लेकिन रंधावा का आरोप है कि यह सब्सिडी पंजाब के खजाने पर सबसे बड़ा दबाव बना रही है। जब सब्सिडी का बोझ इतना बढ़ जाता है तो विकास कार्यों, बुनियादी ढांचे और नई परियोजनाओं के लिए पैसा कम पड़ता है।
ब्याज, वेतन और पेंशन ने खा लिया 96 फीसदी बजट
CAG Report Punjab में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। ब्याज भुगतान, वेतन और पेंशन जैसे रेवेन्यू खर्च 75,860 करोड़ से बढ़कर 1.17 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गए हैं। यह कुल खर्च का 80 से 96 फीसदी है। इसका सीधा मतलब है कि सरकार की कमाई का लगभग पूरा हिस्सा सिर्फ कर्मचारियों की तनख्वाह, पेंशन और पुराने कर्ज के ब्याज चुकाने में खर्च हो जा रहा है।
आम आदमी के लिए यह बेहद चिंता की बात है। जब सरकार के पास विकास कार्यों के लिए महज 4 से 20 फीसदी बजट बचता है, तो नई सड़कें, अस्पताल, स्कूल और रोजगार सृजन जैसी योजनाओं पर खर्च करना मुश्किल हो जाता है। कैग की रिपोर्ट के मुताबिक 2023-24 में पूंजीगत व्यय (capital expenditure) महज 4,743 करोड़ रुपये था, जो कुल खर्च का सिर्फ 3.88 फीसदी है।
रंधावा ने रखा सर्वदलीय वित्तीय चर्चा और निगरानी समिति का प्रस्ताव
रंधावा ने इस मुद्दे को सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रखा, बल्कि एक ठोस प्रस्ताव भी रखा। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की सरकार से सर्वदलीय वित्तीय चर्चा करवाने की अपील की। इसके साथ ही उन्होंने कर्ज, व्यय की गुणवत्ता और फंड उपयोग की निगरानी के लिए सभी दलों के सदस्यों को शामिल करते हुए एक विधायी वित्तीय निगरानी समिति बनाने का प्रस्ताव रखा।
उन्होंने कहा कि इस स्थिति से मिलकर ही निकला जा सकता है और इसके लिए व्यापक वित्तीय पारदर्शिता ढांचा और द्विदलीय सुधार रोडमैप की जरूरत है। यह प्रस्ताव राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि आमतौर पर विपक्षी नेता सिर्फ सरकार की आलोचना करते हैं, लेकिन रंधावा ने एक रचनात्मक विकल्प भी पेश किया है।
सिर्फ AAP नहीं, पिछली सरकारें भी जिम्मेदार: रंधावा ने माना
एक दिलचस्प बात यह रही कि रंधावा ने यह भी स्वीकार किया कि CAG Report Punjab सिर्फ किसी एक सरकार की आलोचना नहीं है, बल्कि यह पंजाब के वित्तीय प्रबंधन में लंबे समय से चली आ रही संरचनात्मक कमजोरियों का आईना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान वित्तीय दबाव के लिए लगातार आई सरकारें जिम्मेदार रही हैं और भविष्य में ऐसी चूक को रोकने के लिए संस्थागत जवाबदेही तंत्र की जरूरत है।
हालांकि उनका मुख्य निशाना AAP सरकार पर ही रहा। उन्होंने कहा कि आप सरकार आय के साधन पैदा करने में पूरी तरह असफल रही है और हर साल पंजाब का घाटा बढ़ता ही जा रहा है। सरकार ने मुफ्त योजनाओं के जरिए लोकप्रियता तो हासिल की, लेकिन राज्य के खजाने को खोखला कर दिया।
कैग की सिफारिशों पर समयबद्ध कार्रवाई की मांग
रंधावा ने ऑडिट अनुपालन प्रणाली को मजबूत करने और कैग की सिफारिशों पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने राज्य के सार्वजनिक उपक्रमों, खासकर घाटे में चल रहे क्षेत्रों में सुधार की जरूरत बताई ताकि दक्षता बढ़े और वित्तीय दबाव कम हो। उन्होंने कहा कि वित्तीय स्थिरता बहाल करने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति, प्रशासनिक अनुशासन और जन विश्वास तीनों जरूरी हैं और सभी हितधारकों से इसे दलगत हितों के बजाय सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में लेने का आग्रह किया।
जानें पूरा मामला
CAG यानी कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल ऑफ इंडिया भारत का सर्वोच्च ऑडिट संस्थान है जो केंद्र और राज्य सरकारों के वित्तीय लेन-देन की जांच करता है। पंजाब पर कैग की हालिया रिपोर्ट विधानसभा के बजट सत्र में पेश की गई थी। इस रिपोर्ट के मुताबिक AAP सरकार के कार्यकाल में राज्य का कर्ज, वित्तीय घाटा और सब्सिडी खर्च सभी में तेज वृद्धि हुई है। नीति आयोग की 2026 की फिस्कल हेल्थ इंडेक्स में पंजाब 18 प्रमुख राज्यों में सबसे निचले पायदान पर रहा। सुखजिंदर सिंह रंधावा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार तथा चरणजीत सिंह चन्नी सरकार में उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
- CAG Report Punjab के अनुसार 2019-20 से 2023-24 के बीच वित्तीय घाटा 14,285 करोड़ से बढ़कर 28,215 करोड़ हुआ।
- पंजाब का कर्ज 1.62 लाख करोड़ से बढ़कर 4.17 लाख करोड़ पहुंचा, साल अंत तक 5 लाख करोड़ का अनुमान।
- सब्सिडी खर्च दोगुणा होकर 18,770 करोड़ पहुंचा, जिसमें 92 से 99% बिजली सब्सिडी है।
- रंधावा ने सर्वदलीय वित्तीय चर्चा और विधायकों की निगरानी समिति बनाने का प्रस्ताव रखा।







