Blood in Urine यानी पेशाब में खून आना एक ऐसी समस्या है जिसे ज्यादातर लोग गंभीरता से नहीं लेते, लेकिन यह किडनी कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का संकेत हो सकता है। दिल्ली में 48 साल के एक व्यक्ति ने पिछले दो साल से पेशाब में आ रहे खून को बिल्कुल सीरियसली नहीं लिया। ना दर्द था, ना बुखार, ना वजन कम हो रहा था, इसलिए वह हर बार दवाई लेकर ठीक हो जाते थे। लेकिन 2025 के आखिर में जब दोबारा खून आना शुरू हुआ और पेशाब ठीक से आना बंद हो गया, तो जांच में पता चला कि उनकी दाईं किडनी में कैंसर का बड़ा ट्यूमर हो चुका है। जब तक वो एम्स (AIIMS) पहुंचे, कैंसर कई हिस्सों में फैल चुका था। हाल ही में उनकी सर्जरी हुई है और वे धीरे-धीरे रिकवर कर रहे हैं।
Blood in Urine (Hematuria) क्या है: डॉक्टर ने बताई पूरी जानकारी
Blood in Urine की समस्या को मेडिकल भाषा में हेमाट्यूरिया (Hematuria) कहा जाता है। यह दिक्कत कई लोगों को होती है, लेकिन ज्यादातर लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं और यह एक बहुत बड़ी गलती है। मणिपाल हॉस्पिटल, द्वारका, नई दिल्ली के यूरोलॉजी कंसल्टेंट डॉ. अभिनव जैन ने Blood in Urine के कारणों, लक्षणों, टेस्ट और इलाज के बारे में विस्तार से जानकारी दी है।
डॉ. अभिनव जैन के मुताबिक सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि पेशाब में खून दर्द के साथ आ रहा है या बिना दर्द के। अगर Blood in Urine के साथ दर्द, जलन हो रही है, तो सबसे आम कारण यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) या पेशाब में पथरी हो सकती है। लेकिन अगर बिना किसी दर्द के पेशाब में खून आ रहा है यानी पेनलेस हेमाट्यूरिया है, तो यह सबसे ज्यादा चिंता की बात है क्योंकि इसका सबसे आम कारण कैंसर की तरफ जाता है।
उम्र के हिसाब से Blood in Urine के कारण अलग-अलग होते हैं
डॉ. अभिनव जैन ने बताया कि Blood in Urine के कारणों को उम्र के हिसाब से भी समझा जा सकता है। अगर कम उम्र में पेशाब में खून आता है, तो ज्यादातर मामलों में किडनी या यूरेटर (किडनी से ब्लैडर तक जाने वाली नलिका) में पथरी हो सकती है।
अगर व्यक्ति मिडिल एज में है और सेक्सुअली एक्टिव है, तो सबसे आम कारण यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन होता है। लेकिन अगर व्यक्ति बुजुर्ग है और खासकर स्मोकिंग करता है या किसी भी रूप में तंबाकू का सेवन करता है, तो Blood in Urine का सबसे आम कारण कैंसर की तरफ जाता है। इसमें किडनी का कैंसर, यूरिनरी ब्लैडर का कैंसर और प्रोस्टेट का कैंसर शामिल हैं।
इसके अलावा कुछ मामले ऐसे भी होते हैं जो किडनी की बनावट से जुड़ी जन्मजात समस्याओं (कंजेनाइटल प्रॉब्लम्स) जैसे ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस या दुर्लभ कारणों जैसे क्वैगुलोपैथीज से हो सकते हैं। एक अहम बात यह भी है कि जो लोग ब्लड थिनर दवाइयां खा रहे हैं, खासकर वे कार्डियक पेशेंट जिनके हार्ट में स्टंट लगा है, उन्हें भी पेशाब में खून आ सकता है।
कौन से टेस्ट करवाने चाहिए: डॉक्टर की सलाह
Blood in Urine की जांच के लिए डॉ. अभिनव जैन ने बताया कि सबसे पहले एक सिंपल यूरिन टेस्ट करवाना चाहिए। इसमें यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन को रूल आउट किया जाता है। इसके बाद एक बेसिक टेस्ट होता है अल्ट्रासाउंड KUB (किडनी, यूरेटर, ब्लैडर)।
इस अल्ट्रासाउंड में कई अहम बातें देखी जाती हैं: किडनी में कोई गांठ तो नहीं है, किडनी में कोई पथरी तो नहीं है, किडनी से नीचे आने वाली नलिका यानी यूरेटर में कोई पथरी तो नहीं है, पेशाब की थैली यानी यूरिनरी ब्लैडर में कोई पथरी या कैंसर की गांठ तो नहीं है, और आखिर में प्रोस्टेट का साइज कैसा है। कई बार ब्लीडिंग प्रोस्टेट की समस्या से भी हो सकती है।
Blood in Urine को इग्नोर करने पर क्या हो सकता है: कैंसर फैलने का खतरा
डॉ. अभिनव जैन ने बताया कि बहुत सारे लोग Blood in Urine की समस्या को लगातार इग्नोर करते जाते हैं और धीरे-धीरे समस्या बढ़ती जाती है। अगर किडनी में कैंसर हो गया है और समय रहते पता चल जाए, तो इलाज आसान होता है। लेकिन अगर कैंसर बढ़ता जाता है, तो किडनी के कैंसर कई बार इतने बड़े हो जाते हैं कि शरीर के दूसरे हिस्सों में फैल (स्प्रेड) भी सकते हैं। ऐसी स्थिति में इलाज बेहद मुश्किल हो जाता है।
इसी तरह किडनी की पथरी भी कई बार बिना दर्द के हो सकती है। डॉक्टर ने बताया कि कई पेशेंट आते हैं और बताते हैं कि उन्हें 3 सेंटीमीटर की पथरी हो गई लेकिन उन्हें पता ही नहीं चला। जांच कराने पर मालूम पड़ता है कि किडनी खराब हो चुकी है।
तंबाकू सबसे बड़ा खतरा: किसी भी रूप में हानिकारक
Blood in Urine से बचाव के लिए डॉ. अभिनव जैन ने सबसे अहम सलाह दी कि स्मोकिंग या तंबाकू किसी भी रूप में छोड़नी चाहिए। डॉक्टर ने एक आम गलतफहमी भी दूर की। बहुत से लोग सोचते हैं कि सिर्फ सिगरेट पीना ही नुकसानदायक है, लेकिन अगर आप पान मसाला खा रहे हैं, खैनी खा रहे हैं या जर्दा खा रहे हैं, तो यह भी उतना ही हानिकारक है जितना सिगरेट या बीड़ी पीना।
इसके अलावा हेल्दी खाना खाना, एक्टिव लाइफस्टाइल रखना और सुस्त जीवनशैली से बचना जरूरी है। अगर कभी भी कमर के निचले हिस्से में साइड में दर्द, उल्टी, बुखार या पेशाब में जलन हो, तो तुरंत यूरोलॉजिस्ट से मिलना चाहिए।
किशनगढ़ का ‘Mini Switzerland’: खूबसूरत दिखने वाली यह सफेद बर्फ असल में जहरीला कचरा
Blood in Urine जैसी बीमारी के अलावा एक और स्वास्थ्य खतरा है जो इन दिनों चर्चा में है। राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित किशनगढ़ डंपिंग यार्ड को लोग ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ और ‘मूनलैंड ऑफ राजस्थान’ कहकर बुला रहे हैं। यहां दूर तक फैला सफेद नजारा देखकर लगता है जैसे बर्फ गिरी हो। लोग यहां सेल्फी ले रहे हैं, पिकनिक मना रहे हैं, फोटो शूट करा रहे हैं और रील्स बना रहे हैं।
लेकिन हकीकत बेहद खतरनाक है। यह बर्फ जैसा दिखने वाला सफेद पदार्थ असल में मार्बल स्लरी है। जब मार्बल (संगमरमर) को काटा और पॉलिश किया जाता है, तब उससे एक तरह का कचरा निकलता है जिसे मार्बल स्लरी कहते हैं। यह मार्बल की बहुत बारीक धूल और पानी का मिश्रण होता है। जब यह सूख जाता है तो सफेद पाउडर जैसे ढेर में बदल जाता है, जो दूर से बिल्कुल बर्फ जैसा लगता है।
रेस्पिरेबल क्रिस्टलाइन सिलिका: WHO ने माना ग्रुप-1 कैंसरकारी
पारस हेल्थ, उदयपुर के पल्मोनोलॉजी कंसल्टेंट डॉ. मानसी वडगामा ने बताया कि इस मार्बल स्लरी में रेस्पिरेबल क्रिस्टलाइन सिलिका हो सकती है, जो सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) ने इसे ग्रुप-1 कार्सिनोजन माना है, यानी पक्के सबूत हैं कि यह इंसानों में कैंसर पैदा कर सकता है।
डॉ. मानसी ने बताया कि रेस्पिरेबल क्रिस्टलाइन सिलिका बारीक धूल के कण हैं जो मार्बल, ग्रेनाइट और सैंडस्टोन की कटाई, घिसाई या पॉलिशिंग के दौरान बनते हैं। ये कण इतने सूक्ष्म होते हैं कि सांस के जरिए सीधे फेफड़ों की गहराई तक पहुंच जाते हैं और शरीर इन्हें आसानी से बाहर नहीं निकाल पाता। धीरे-धीरे ये फेफड़ों में जमा होकर सूजन और स्थायी नुकसान पहुंचाते हैं।
लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से सिलिकोसिस (फेफड़ों की लाइलाज बीमारी), फेफड़ों का कैंसर, क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) और किडनी की बीमारियां हो सकती हैं। लगातार खांसी, सांस फूलना, सांस लेने में तकलीफ, सीने में जकड़न और थकान इसके शुरुआती लक्षण हैं। खतरनाक बात यह है कि शुरुआत में लक्षण बहुत हल्के या न के बराबर होते हैं, इसलिए खतरा अनदेखा रह जाता है।
किसे है सबसे ज्यादा खतरा और कैसे बचें
डॉ. मानसी के अनुसार सिलिका डस्ट से बीमार पड़ने का सबसे ज्यादा खतरा मार्बल इंडस्ट्री में काम करने वालों, स्टोन कटिंग या पॉलिशिंग करने वालों, बार-बार या लंबे समय तक ऐसे डंपिंग यार्ड में जाने वालों, बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा या फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित लोगों को है।
अगर किशनगढ़ जाना ही हो तो N95 या उससे बेहतर क्वालिटी का मास्क लगाएं, धूल उड़ने वाले एरिया में ज्यादा देर न रुकें, तेज हवा हो तो वहां जाने से बचें, बच्चों को साथ न ले जाएं, आंखों की सुरक्षा के लिए चश्मा पहनें, डंपिंग यार्ड से आने के बाद नहाएं और कपड़े धो लें। अगर सांस या खांसी की दिक्कत हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।
Navratri Fasting Diet: व्रत में कमजोरी न लगे इसके लिए क्या खाएं-पिएं
नवरात्रि शुरू हो चुकी है और बहुत से लोग व्रत रख रहे हैं। दो-चार दिन व्रत रखने के बाद कई लोगों को थकान और कमजोरी महसूस होने लगती है। आकाश हेल्थकेयर में वेट मैनेजमेंट एंड डाइट थेरेपी की विजिटिंग कंसल्टेंट अनुजा गौर ने बताया कि व्रत में सही खान-पान से कमजोरी से बचा जा सकता है।
फल: केला, सेब और पपीता जैसे फल खाने चाहिए। ये तुरंत एनर्जी देते हैं, शरीर को हाइड्रेटेड रखते हैं और जरूरी विटामिन्स की कमी नहीं होने देते। सुबह या दोपहर में एक कटोरी मिक्स फ्रूट या फ्रूट स्मूदी ले सकते हैं।
मखाना: हल्का होने के बावजूद प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होता है। पेट देर तक भरा रहता है और एनर्जी भी मिलती है। भूख लगने पर या शाम को मुट्ठी भर मखाना खाएं।
दही: शरीर को ठंडक देता है, पाचन बेहतर बनाता है और प्रोटीन का अच्छा स्रोत है। दिन में एक कटोरी दही दोपहर के खाने में या फलों के साथ लें।
साबूदाना: कार्बोहाइड्रेट्स से भरपूर होता है, जल्दी पचता है और तुरंत एनर्जी देता है।
कुट्टू का आटा और राजगिरा: मिनरल्स, विटामिन्स, कार्बोहाइड्रेट्स और फाइबर से भरपूर होते हैं और लंबे समय तक एनर्जी देते हैं। लंच या डिनर में इन्हें शामिल कर सकते हैं।
नारियल पानी: गर्मी का मौसम शुरू हो रहा है, इसलिए व्रत में नारियल पानी पीना बेहद जरूरी है। यह शरीर को हाइड्रेटेड रखता है और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी पूरी करता है। इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी से थकान, सुस्ती और चक्कर आ सकते हैं। सुबह खाली पेट या दोपहर में एक गिलास नारियल पानी पिएं। रोज 2 से 3 लीटर पानी पिएं, बहुत ज्यादा तला-भुना खाने से बचें, छोटे-छोटे गैप में खाएं और सिर्फ आलू पर निर्भर न रहें बल्कि शकरकंद, लौकी और पालक जैसी सब्जियां भी खाएं।
मुख्य बातें (Key Points)
- Blood in Urine को बिना दर्द के भी गंभीरता से लेना जरूरी है क्योंकि पेनलेस हेमाट्यूरिया किडनी कैंसर, ब्लैडर कैंसर या प्रोस्टेट कैंसर का संकेत हो सकता है। यूरिन टेस्ट और अल्ट्रासाउंड KUB कराना जरूरी है।
- किशनगढ़ का ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ असल में मार्बल स्लरी का जहरीला कचरा है, जिसमें मौजूद रेस्पिरेबल क्रिस्टलाइन सिलिका को WHO ने ग्रुप-1 कैंसरकारी माना है, यहां जाने से सिलिकोसिस और फेफड़ों का कैंसर हो सकता है।
- तंबाकू किसी भी रूप में (सिगरेट, बीड़ी, पान मसाला, खैनी, जर्दा) पेशाब में खून और कैंसर का सबसे बड़ा कारण है, इसे तुरंत छोड़ना चाहिए।
- नवरात्रि व्रत में कमजोरी से बचने के लिए फल, मखाना, दही, साबूदाना, कुट्टू का आटा, राजगिरा और नारियल पानी जरूर लें, रोज 2-3 लीटर पानी पिएं।







