Delhi Assembly Photo Controversy एक नई राजनीतिक बहस का कारण बन गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार के गठन के बाद दिल्ली विधानसभा का पहला सत्र सोमवार को शुरू हुआ, लेकिन शुरुआती कार्यवाही के बाद ही हंगामे की भेंट चढ़ गया। आम आदमी पार्टी (AAP) ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री कार्यालय से भगत सिंह (Bhagat Singh) और डॉ. भीमराव आंबेडकर (Dr. B.R. Ambedkar) की तस्वीरें हटाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की मूर्ति लगाई गई है।
BJP ने जारी की तस्वीरें, AAP के आरोपों का दिया जवाब
आम आदमी पार्टी के आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। दिल्ली बीजेपी इकाई ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें जारी करते हुए दावा किया कि मुख्यमंत्री कार्यालय में अब भी महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi), डॉ. भीमराव आंबेडकर (Dr. B.R. Ambedkar), भगत सिंह (Bhagat Singh), राष्ट्रपति (President of India) और प्रधानमंत्री (Prime Minister) के चित्र लगाए गए हैं।
Amit Malviya, जो बीजेपी के आईटी सेल इंचार्ज हैं, ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, “यह दिल्ली के मुख्यमंत्री का कक्ष है, जहां सभी महापुरुषों के चित्र पहले की तरह लगे हुए हैं। शराब घोटाले में आरोपी अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) कार्यालय नहीं जा सकते, इसलिए वह झूठ फैलाकर राजनीति कर रहे हैं। जनता ने उन्हें हार का स्वाद चखा दिया है, लेकिन उनकी ओछी हरकतें जारी हैं।”
AAP का आरोप- BJP कर रही है राजनीतिक स्टंटबाजी
आम आदमी पार्टी ने बीजेपी पर पलटवार करते हुए इसे “राजनीतिक स्टंटबाजी” करार दिया। AAP नेताओं का कहना है कि भगत सिंह और आंबेडकर की तस्वीरें हटाने का फैसला दिल्ली की जनता का अपमान है।
Saurabh Bhardwaj जैसे AAP नेताओं ने मीडिया से बात करते हुए आरोप लगाया कि यह कदम भारतीय लोकतंत्र के आदर्शों के खिलाफ है। उन्होंने यह भी दावा किया कि मोदी की मूर्ति लगाने का फैसला भाजपा सरकार की तानाशाही प्रवृत्ति को दर्शाता है।
राजनीतिक विवाद की नई लहर
फोटो विवाद ने दिल्ली की राजनीति में एक नई हलचल पैदा कर दी है। AAP और BJP के बीच यह विवाद भविष्य में और भी तेज हो सकता है, खासकर आगामी चुनावों को देखते हुए।
कौन सही, कौन गलत?
जहां बीजेपी ने तस्वीरों के जरिए यह साबित करने की कोशिश की है कि सभी महापुरुषों की तस्वीरें यथावत हैं, वहीं AAP का दावा है कि यह सिर्फ एक राजनीतिक दिखावा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस विवाद का असर दिल्ली की राजनीति पर कितना पड़ता है।