Bikram Singh Majithia Drug Case में पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने एक और बड़ा कदम उठाते हुए मोहाली की अदालत में 40 हजार पन्नों की सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस चार्जशीट में करीब 736 करोड़ रुपए के वित्तीय लेनदेन का जिक्र है, जिसे विजिलेंस ड्रग मनी से जोड़कर देख रही है। ट्रंकों में भरकर चार्जशीट के दस्तावेज कोर्ट पहुंचे, और इसी के साथ अकाली नेता की मुश्किलें एक बार फिर से बढ़ गई हैं।
’53 हजार पन्ने: एक ऐसा मामला जो थमने का नाम नहीं ले रहा’
देखा जाए तो यह कोई पहली चार्जशीट नहीं है। इससे पहले विजिलेंस ब्यूरो अगस्त 2025 में भी करीब 40 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर चुका है। अब नई सप्लीमेंट्री चार्जशीट जुड़ने के बाद दोनों चार्जशीटों के दस्तावेजों की कुल संख्या करीब 53 हजार पन्ने हो गई है। इतने विशाल दस्तावेज किसी भी राज्य के राजनीतिक इतिहास में दुर्लभ हैं।
इस मामले में विजिलेंस ने बिक्रम सिंह मजीठिया के अलावा गुरमेहर सिंह, साले गज्जपत सिंह ग्रेवाल, हरप्रीत गुलाटी, अमरदीप सिंह और 10 कंपनियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की है। अब तक कुल चार चार्जशीट दाखिल हो चुकी हैं, और हर बार नए-नए खुलासे सामने आ रहे हैं।
‘736 करोड़ का हिसाब: कहां से आया, कहां गया?’
अगर गौर करें तो आम आदमी पार्टी (AAP) ने जो आंकड़े सार्वजनिक किए हैं, वे हैरान करने वाले हैं। विजिलेंस जांच में 736.96 करोड़ रुपए के वित्तीय लेनदेन का पता चला है। इस रकम को तीन बड़े हिस्सों में बांटा जा सकता है।
पहला: 161 करोड़ रुपए की अघोषित नकद जमा राशि, जो मजीठिया से जुड़ी कंपनियों के खातों में मिली। दूसरा: 141 करोड़ रुपए जो विदेशी संस्थाओं के माध्यम से भेजे गए। तीसरा: 236 करोड़ रुपए की अघोषित जमा राशि, जो कंपनियों के वित्तीय विवरणों में कहीं दर्ज ही नहीं थी।
| लेनदेन का प्रकार | राशि (करोड़ में) |
|---|---|
| अघोषित नकद जमा | ₹161 |
| विदेशी संस्थाओं से प्राप्त | ₹141 |
| कंपनियों में अघोषित जमा | ₹236 |
| अन्य असामान्य लाभ और संपत्ति वृद्धि | शेष राशि |
| कुल अनुमानित लेनदेन | ₹736.96 |
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि ये आंकड़े अभी जांच के स्तर पर हैं और इन्हें अदालत में साबित होना बाकी है। लेकिन इतनी बड़ी रकम का जिक्र अपने आप में सवाल खड़े करता है।
‘सत्ता और पिंदी: ड्रग तस्करों से कनेक्शन का दावा’
दिलचस्प बात यह है कि इस चार्जशीट में दो पुराने चेहरों का नाम फिर से सामने आया है: सतप्रीत सिंह उर्फ ‘सत्ता’ और परमिंदर सिंह उर्फ ‘पिंदी’। दोनों अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्कर माने जाते हैं और पंजाब में सिंथेटिक ड्रग्स की जांच के दौरान इनके नाम पहले भी सामने आ चुके हैं।
AAP का दावा है कि जांच में यह बात सामने आई है कि मंत्री रहते हुए मजीठिया ने अपनी गाड़ी में इन दोनों तस्करों को बिठाकर सफर किया था। पुराने केस रिकॉर्ड में इन संबंधों की पड़ताल का जिक्र है। हालांकि, यह आरोप कितना पुख्ता है, इसका फैसला तो अदालत ही करेगी। लेकिन इतना तो तय है कि यह मामला अब सिर्फ आय से अधिक संपत्ति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ड्रग तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोपों तक फैल चुका है।
‘सराया इंडस्ट्रीज और शराब कंपनियों का कनेक्शन’
समझने वाली बात है कि जांच का दायरा अब मजीठिया से जुड़ी कंपनियों तक पहुंच गया है। इनमें ‘सराया इंडस्ट्रीज’ का नाम सबसे प्रमुखता से सामने आया है। इसके अलावा आकाश स्पिरिट, यूवी एंटरप्राइजेज और एडी एंटरप्राइजेज जैसी शराब कंपनियों से जुड़े लेनदेन की भी जांच हो रही है।
30 नवंबर 2025 को विजिलेंस ने हरप्रीत सिंह गुलाटी को गिरफ्तार किया था, जिसे मजीठिया का करीबी सहयोगी बताया गया। गुलाटी से जुड़ी कंपनियों और मजीठिया से संबंधित संस्थाओं के बीच पैसों के लेनदेन सामने आए हैं। जांचकर्ताओं ने इन लेनदेन की प्रकृति, शराब के कारोबार से उनके संबंध और इन वित्तीय प्रबंधों के व्यावसायिक आधार की गहन पड़ताल की है।
‘गिरफ्तारी से जमानत तक: पूरा टाइमलाइन’
और बस यहीं से शुरू हुई असली कहानी इस मामले की कानूनी जंग की। 25 जून 2025 को विजिलेंस ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत FIR नंबर 22 दर्ज कर मजीठिया को गिरफ्तार किया। 18 अगस्त को मोहाली की निचली अदालत ने जमानत खारिज कर दी। 22 अगस्त को 40 हजार पन्नों की पहली चार्जशीट दाखिल हुई। 4 दिसंबर को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने भी जमानत देने से इनकार कर दिया।
राहत की बात मजीठिया के लिए तब आई जब 2 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें नियमित जमानत दे दी। करीब सात महीने जेल में बिताने के बाद वे बाहर आए। लेकिन जमानत मिलने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि अदालत ने उन्हें आरोपों से बरी कर दिया है। मुकदमा अभी जारी है और नई चार्जशीट ने मामले को और पेचीदा बना दिया है।
| तारीख | घटनाक्रम |
|---|---|
| 25 जून 2025 | विजिलेंस ने गिरफ्तार किया, FIR नंबर 22 दर्ज |
| 18 अगस्त 2025 | मोहाली निचली अदालत ने जमानत खारिज की |
| 22 अगस्त 2025 | 40,000 पन्नों की पहली चार्जशीट दाखिल |
| 4 दिसंबर 2025 | हाईकोर्ट ने जमानत याचिका खारिज की |
| 30 नवंबर 2025 | हरप्रीत सिंह गुलाटी की गिरफ्तारी |
| 2 फरवरी 2026 | सुप्रीम कोर्ट से नियमित जमानत मिली |
| अक्टूबर 2026 | 40,000 पन्नों की सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल |
‘पंजाब की राजनीति पर क्या असर?’
चिंता का विषय यह है कि यह मामला पंजाब की राजनीति को गहरे स्तर पर प्रभावित कर रहा है। शिरोमणि अकाली दल (बादल) के लिए मजीठिया एक अहम चेहरा हैं, और उन पर लगे ये आरोप पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं। दूसरी तरफ, सत्ताधारी AAP इस मामले को लगातार हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रही है।
इसका मतलब है कि 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले यह मामला एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। आम आदमी के लिए सवाल यह है कि पंजाब में ड्रग्स का जो जाल फैला है, क्या उसकी जड़ें वाकई इतनी गहरी हैं जितना दावा किया जा रहा है?
‘जानें पूरा मामला’
बिक्रम सिंह मजीठिया अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पंजाब के पूर्व कैबिनेट मंत्री हैं। उनके खिलाफ 2007 से 2017 की अवधि में आय से अधिक संपत्ति की जांच चल रही है। 2021 में NDPS एक्ट के तहत दर्ज FIR की जांच के दौरान ड्रग मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप जुड़े। 2025 में गिरफ्तारी हुई, सात महीने जेल में रहे, फिर सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली। अब 53 हजार पन्नों की चार्जशीट के साथ मामला कोर्ट में विचाराधीन है।
‘विश्लेषण: 53 हजार पन्ने क्या कहते हैं?’
इतनी विशाल चार्जशीट अपने आप में एक संदेश है। जब कोई जांच एजेंसी इतने दस्तावेज जुटाती है, तो इसका सीधा मतलब है कि जांच का दायरा बहुत व्यापक है। लेकिन दूसरी तरफ, यह भी सच है कि चार्जशीट का आकार और सजा की गारंटी एक ही बात नहीं है। भारतीय न्यायिक इतिहास में कई बार देखा गया है कि बड़ी चार्जशीटें भी कोर्ट में टिक नहीं पातीं। मजीठिया के मामले में असली परीक्षा तब होगी जब विजिलेंस इन 736 करोड़ के लेनदेन को अदालत में साबित करेगी। तब तक यह मामला राजनीतिक हथियार और कानूनी लड़ाई दोनों के रूप में सुर्खियों में बना रहेगा।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- पंजाब विजिलेंस ने मोहाली कोर्ट में 40 हजार पन्नों की सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की, कुल दस्तावेज 53 हजार पन्ने हुए।
- 736.96 करोड़ रुपए के वित्तीय लेनदेन का पता चला, जिसमें 161 करोड़ अघोषित नकद और 141 करोड़ विदेशी लेनदेन शामिल।
- ड्रग तस्करों ‘सत्ता’ और ‘पिंदी’ से मजीठिया के कनेक्शन का दावा, सराया इंडस्ट्रीज और शराब कंपनियों की जांच जारी।
- सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है, लेकिन मुकदमा अभी कोर्ट में विचाराधीन है।













