Bihar Rajya Sabha Voting में महागठबंधन को बड़ा झटका लगा है। बिहार की 5 राज्यसभा सीटों पर हुए मतदान में NDA (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) की पांचों सीटों पर जीत तय मानी जा रही है। महागठबंधन के लिए सबसे बड़ी मुसीबत यह रही कि असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM और BSP के समर्थन के बावजूद उसे 41 का जादुई आंकड़ा नहीं मिल पाया। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि कांग्रेस के 3 और RJD के 1 विधायक वोटिंग में शामिल ही नहीं हुए। तेजस्वी यादव ने खुद माना था कि उनके 6 वोट कम पड़ रहे हैं। अब यह खुलासा हो गया है कि कौन हैं वो 4 विधायक जिन्होंने वोट नहीं डाला और क्या है उनका राजनीतिक इतिहास।
कौन हैं वो 4 विधायक जो वोटिंग से रहे गायब
Bihar Rajya Sabha Voting में गायब रहने वाले 4 विधायकों में कांग्रेस के 3 और RJD का 1 विधायक शामिल है। चारों विधायकों की राजनीतिक पृष्ठभूमि देखें तो एक पैटर्न साफ दिखता है: इनमें से अधिकांश के NDA खेमे, खासकर JDU से करीबी संबंध रहे हैं। आइए जानते हैं इन चारों विधायकों के बारे में विस्तार से।
1. सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा (कांग्रेस): पहले से NDA कैंप में जाने की कोशिश
Bihar Rajya Sabha Voting से गायब रहने वाले पहले विधायक हैं सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा, जो बिहार के वाल्मीकि नगर से पहली बार विधायक बने हैं। इनकी राजनीतिक यात्रा काफी दिलचस्प और पार्टियां बदलने वाली रही है।
2015 में सुरेंद्र कुशवाहा ने उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP) के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन निर्दलीय उम्मीदवार रिंकू सिंह से हार गए। बाद में रिंकू ने JDU ज्वाइन कर लिया, जबकि सुरेंद्र कुशवाहा कांग्रेस में आ गए। 2020 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने JDU के उम्मीदवार को मात्र 1,675 वोटों से हराया।
लेकिन सबसे अहम बात यह है कि सुरेंद्र कुशवाहा पहले से ही NDA कैंप में जाने की कोशिश कर रहे थे। राज्यसभा चुनाव के दौरान उपेंद्र कुशवाहा की नई पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के राज्य अध्यक्ष आलोक सिंह ने उनसे मुलाकात भी की थी। सुरेंद्र कुशवाहा बिहार विधानसभा की याचिका समिति के भी सदस्य हैं। उनकी NDA से निकटता और वोटिंग से गायब रहना साफ इशारा है कि वे पार्टी बदलने की राह पर हैं।
2. मनोज विश्वास (कांग्रेस): सिर्फ 221 वोटों से जीते, पार्टियां बदलने का लंबा इतिहास
Bihar Rajya Sabha Voting से गायब रहने वाले दूसरे विधायक हैं मनोज विश्वास, जो फॉरबिसगंज से पहली बार विधायक बने हैं। उनकी जीत बेहद कम मार्जिन, महज 221 वोटों से हुई थी।
मनोज विश्वास का पार्टी बदलने का लंबा इतिहास है। 2019 में वे JDU के ब्लॉक प्रेसिडेंट थे, फिर RJD में गए और इसके बाद कांग्रेस का टिकट लेकर चुनाव लड़ा। पार्टियां बदलने का यह सिलसिला बताता है कि उनकी किसी एक पार्टी के प्रति गहरी निष्ठा नहीं है।
चुनाव से पहले मनोज विश्वास पूर्णिया सांसद पप्पू यादव के करीबी माने जा रहे थे। JDU में उनका पुराना कार्यकाल और पप्पू यादव से निकटता, दोनों बातें मिलकर उनके वोटिंग से गायब रहने की तस्वीर साफ करती हैं।
3. मनोहर प्रसाद सिंह (कांग्रेस): चौथी बार विधायक, JDU से गहरे रिश्ते
Bihar Rajya Sabha Voting से गायब रहने वाले तीसरे विधायक हैं मनोहर प्रसाद सिंह, जो मनिहारी सीट से चौथी बार विधायक चुने गए हैं। वे अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय से संबंध रखते हैं।
मनोहर प्रसाद सिंह का राजनीतिक इतिहास बेहद दिलचस्प है। वे पहली बार JDU के टिकट पर विधायक बने थे। जब 2015 में महागठबंधन बना और मनिहारी सीट कांग्रेस के खाते में गई, तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कहने पर उन्होंने पाला बदलकर कांग्रेस का टिकट ले लिया। तब से वे कांग्रेस के विधायक हैं, लेकिन JDU नेताओं से उनकी राजनीतिक निकटता हर कार्यकाल में बनी रही।
चौथी बार विधायक होने के बावजूद राज्यसभा वोटिंग से गायब रहना बताता है कि मनोहर प्रसाद सिंह की वफादारी अभी भी कांग्रेस की बजाय JDU की तरफ ज्यादा है। नीतीश कुमार के कहने पर पार्टी बदली और अब भी उनके इशारे पर चल रहे हैं, यह एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।
4. फैसल रहमान (RJD): पूर्व सांसद के बेटे, JDU सांसद से निकटता
Bihar Rajya Sabha Voting से गायब रहने वाले चौथे और एकमात्र RJD विधायक हैं फैसल रहमान, जो पूर्व सांसद मोतीउर रहमान के बेटे हैं। फैसल पहली बार ढाका सीट से विधायक बने हैं। उन्होंने BJP के पवन जायसवाल को मात्र 178 वोटों से हराया था।
फैसल की जीत इतनी कम मार्जिन की थी कि BJP उम्मीदवार जायसवाल ने इसे कोर्ट में चुनौती भी दी है, जो अभी विचाराधीन है। फैसल के पिता मोतीउर रहमान RJD और कांग्रेस दोनों में पद संभाल चुके हैं।
सबसे अहम बात यह है कि विधानसभा के अंदर फैसल रहमान को एक JDU सांसद के करीबी के रूप में जाना जाता है। RJD का विधायक होते हुए भी JDU सांसद से निकटता रखना और राज्यसभा वोटिंग से गायब रहना, यह RJD के अंदरूनी संकट को दर्शाता है।
चारों विधायकों में एक बात कॉमन: JDU/NDA से निकटता
Bihar Rajya Sabha Voting से गायब रहने वाले चारों विधायकों में एक पैटर्न साफ दिखता है। सुरेंद्र कुशवाहा NDA कैंप में जाने की कोशिश में थे, मनोज विश्वास पहले JDU के ब्लॉक प्रेसिडेंट थे, मनोहर प्रसाद सिंह नीतीश कुमार के कहने पर पार्टी बदलकर आए थे और JDU नेताओं से उनकी निकटता बनी रही, फैसल रहमान JDU सांसद के करीबी माने जाते हैं।
यह तस्वीर बताती है कि महागठबंधन में पार्टी अनुशासन बेहद कमजोर है। जब राज्यसभा जैसे अहम चुनाव में अपने ही विधायक पार्टी व्हिप की अनदेखी कर सकते हैं, तो इसका मतलब है कि इन विधायकों की निष्ठा अपनी पार्टी की बजाय NDA/JDU के प्रति ज्यादा है।
तेजस्वी यादव की परेशानी: 6 वोट कम, कोई रास्ता नहीं
Bihar Rajya Sabha Voting में RJD नेता तेजस्वी यादव ने खुद माना था कि “हमारे लगभग 6 मत कम पड़ रहे थे।” अब जब 4 विधायकों के गायब रहने की बात सामने आई है, तो साफ है कि यही 4 वोट महागठबंधन को 41 के आंकड़े तक नहीं पहुंचने दे पाए।
AIMIM और BSP के समर्थन के बावजूद सभी विपक्षी दलों की कुल ताकत 41 होती थी, जो एक सीट जीतने के लिए जरूरी थी। लेकिन 4 विधायकों की गैरहाजिरी ने यह गणित बिगाड़ दिया। तेजस्वी यादव की सबसे बड़ी चिंता यह होगी कि अगर विधानसभा चुनाव से पहले ये विधायक NDA में चले गए तो महागठबंधन की स्थिति और कमजोर हो जाएगी।
NDA की पांचों सीटों पर जीत तय: JDU का दावा सच साबित
Bihar Rajya Sabha Voting में JDU के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने पहले ही दावा किया था कि NDA के पांचों प्रत्याशियों को अच्छे-खासे मार्जिन से जीत मिलेगी। 4 महागठबंधन विधायकों की गैरहाजिरी ने उनका दावा सच साबित कर दिया है। NDA के पांचों उम्मीदवार: केंद्रीय राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर, BJP के नितिन नवीन और शिवेश कुमार समेत सभी जीत की ओर बढ़ रहे हैं।
बिहार में महागठबंधन की यह हार सिर्फ राज्यसभा चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने विपक्षी एकता में दरारों को और गहरा कर दिया है। जब अपने ही विधायक पार्टी लाइन पर नहीं चलते, तो आम जनता को विपक्ष पर भरोसा करने का क्या कारण बचता है, यह सवाल महागठबंधन के नेताओं को अपने आप से पूछना होगा।
मुख्य बातें (Key Points)
- Bihar Rajya Sabha Voting में कांग्रेस के 3 (सुरेंद्र कुशवाहा, मनोज विश्वास, मनोहर प्रसाद सिंह) और RJD के 1 (फैसल रहमान) विधायक वोटिंग से गायब रहे।
- चारों विधायकों की JDU/NDA से निकटता का इतिहास: सुरेंद्र NDA कैंप में जाने की कोशिश में, मनोज पहले JDU ब्लॉक प्रेसिडेंट, मनोहर नीतीश के कहने पर आए, फैसल JDU सांसद के करीबी।
- AIMIM-BSP के सपोर्ट के बावजूद महागठबंधन को 41 का आंकड़ा नहीं मिला, तेजस्वी ने माना 6 वोट कम पड़े, NDA की पांचों सीटों पर जीत तय।
- 4 में से 3 विधायक पहली बार MLA बने और बेहद कम मार्जिन से जीते: मनोज 221 वोट, फैसल 178 वोट, सुरेंद्र 1,675 वोट से।








