Bihar Government Formation: बिहार में नई सरकार के गठन को लेकर हलचल तेज हो गई है। 14 अप्रैल को एनडीए विधायक दल की एक अहम बैठक होने जा रही है। बीजेपी ने अपने सभी विधायकों को पटना बुलाया है और बैठक में शामिल होने के सख्त निर्देश दिए हैं।
पश्चिम बंगाल से भी 50 से ज्यादा विधायकों को वापस बुलाया गया है जो चुनाव प्रचार में जुटे थे। 14 अप्रैल सुबह तक सभी विधायकों को पटना पहुंचने का आदेश दिया गया है। बैठक को लेकर पार्टी ने बढ़ा दी है तैयारी।
14 अप्रैल की बैठक बेहद अहम
Bihar में एनडीए की सरकार बनने जा रही है। लेकिन मुख्यमंत्री कौन होगा, यह अभी तय नहीं हुआ है। 14 अप्रैल की बैठक में इसी पर फैसला हो सकता है। बीजेपी और जेडीयू दोनों ही अपना दावा पेश कर रहे हैं।
बीजेपी ने बिहार विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें जीती हैं। पार्टी का दावा है कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते उसे मुख्यमंत्री का पद मिलना चाहिए। वहीं जेडीयू का कहना है कि नीतीश कुमार को फिर से मुख्यमंत्री बनाया जाए क्योंकि वे अनुभवी हैं।
केंद्रीय नेतृत्व से निर्देश आने का इंतजार है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय नेता पटना आ सकते हैं। गठबंधन धर्म निभाते हुए फैसला लिया जाएगा।
पश्चिम बंगाल से वापस बुलाए विधायक
Bihar Government Formation के लिए बीजेपी ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार कर रहे 50 से ज्यादा विधायकों को तुरंत वापस बुलाया गया है।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तैयारी चल रही है और वहां 23 अप्रैल को पहले चरण की वोटिंग है। बिहार के कई विधायक वहां प्रचार कर रहे थे। लेकिन अब उन्हें 14 अप्रैल सुबह तक पटना पहुंचने का आदेश मिला है।
पार्टी नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि बैठक में हर विधायक की उपस्थिति जरूरी है। किसी को भी छूट नहीं दी जाएगी। सरकार गठन के बाद फिर विधायक बंगाल रवाना होंगे और चुनाव प्रचार में दोबारा जुटेंगी बीजेपी।
आरजेडी ने साधा निशाना
विपक्षी आरजेडी ने इस मौके का फायदा उठाते हुए बीजेपी पर निशाना साधा है। आरजेडी नेताओं ने कहा, “बीजेपी का मुख्यमंत्री बने या जेडीयू का, चाबी बीजेपी के दो गुजरातियों के हाथों में ही होगी।”
यह टिप्पणी अमित शाह और नरेंद्र मोदी की ओर इशारा करते हुए की गई है। आरजेडी का कहना है कि असली फैसले दिल्ली में होंगे, पटना में नहीं।
आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव की तरफ से दायर अपील पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई है। लैंड फॉर जॉब से संबंधित भ्रष्टाचार का है मामला। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटेश्वर सिंह की पीठ करेगी सुनवाई।
किसके नाम पर होगा सील?
बीजेपी के पास बिहार विधानसभा में सबसे ज्यादा सीटें हैं लेकिन बहुमत के लिए जेडीयू का साथ जरूरी है। जेडीयू के पास भी अच्छी-खासी सीटें हैं। दोनों मिलकर आरामदायक बहुमत में हैं।
कुछ छोटे दल भी एनडीए के साथ हैं। सभी को मंत्रिमंडल में जगह देनी होगी। मंत्रियों की संख्या और विभागों का बंटवारा भी तय करना होगा।
पिछली बार भी यही उधेड़बुन चली थी और आखिर में नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाया गया था। इस बार क्या होगा, यह 14 अप्रैल को ही पता चलेगा।
सूत्रों के अनुसार एक फॉर्मूला यह भी है कि मुख्यमंत्री का पद दोनों पार्टियों में बांटा जाए। ढाई साल बीजेपी और ढाई साल जेडीयू का मुख्यमंत्री। लेकिन यह फॉर्मूला कितना कारगर होगा, यह देखना होगा।
कर्नाटक कांग्रेस में भी उधेड़बुन
Bihar में एनडीए उधेड़बुन में है तो कर्नाटक में कांग्रेस में भी मंथन चल रहा है। कर्नाटक कांग्रेस के 30 विधायक दिल्ली पहुंचे हैं। कैबिनेट में फेरबदल की मांग कर रहे हैं।
पहली बार जीते 38 एमएलए ने पांच मंत्री पद मांगे हैं। उनका कहना है कि उन्हें भी मंत्रिमंडल में जगह मिलनी चाहिए। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया दबाव में हैं।
कांग्रेस हाई कमान इस मामले में मध्यस्थता कर रही है। जल्द ही फैसला हो सकता है। कर्नाटक में स्थिरता बनाए रखना कांग्रेस के लिए जरूरी है।
मुख्य बातें (Key Points):
• बिहार में 14 अप्रैल को एनडीए विधायक दल की अहम बैठक
• BJP ने सभी विधायकों को पटना बुलाया, पश्चिम बंगाल से भी वापस बुलाए
• मुख्यमंत्री पद पर BJP और JDU में खींचतान
• आरजेडी ने कहा – फैसला दिल्ली में होगा, पटना में नहीं













