Atishi Fake Video Case : सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। चंडीगढ़ में 9 जनवरी को सामने आए आधिकारिक बयान के मुताबिक, Jalandhar Police Commissionerate ने दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और विधायक Atishi से जुड़े एक कथित आपत्तिजनक वीडियो के मामले में FIR दर्ज की है। कौन: विधायक आतिशी, क्या: कथित आपत्तिजनक/भ्रामक वीडियो का प्रसार, कहाँ: जालंधर पुलिस कमिश्नरेट, कब: 9 जनवरी, क्यों: फॉरेंसिक जांच में वीडियो को एडिट व डॉक्टर्ड पाए जाने के बाद—इन सभी सवालों के जवाब जांच के शुरुआती निष्कर्षों में सामने आ गए हैं।

क्या है पूरा मामला, कैसे दर्ज हुई FIR
जालंधर पुलिस के प्रवक्ता के अनुसार, शिकायतकर्ता इक़बाल सिंह की शिकायत पर FIR दर्ज की गई। आरोप है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक छोटा वीडियो क्लिप अपलोड और प्रसारित किया गया, जिसमें आतिशी के खिलाफ अत्यधिक भड़काऊ कैप्शन जोड़कर उन्हें गुरुओं के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी करते दिखाया गया। इन पोस्ट्स को इस तरह प्रस्तुत किया गया कि वे धार्मिक भावनाएं भड़काने वाली लगें, जबकि जांच में इसके विपरीत तथ्य सामने आए।
फॉरेंसिक जांच में बड़ा खुलासा
मामले की जांच वैज्ञानिक तरीके से की गई। जांच एजेंसियों ने सोशल मीडिया पर उपलब्ध उस वीडियो को डाउनलोड किया, जिसे Kapil Mishra के सोशल मीडिया पोस्ट से साझा किया गया था, और उसे Director, Forensic Science Laboratory, Punjab को फॉरेंसिक परीक्षण के लिए भेजा गया। 9 जनवरी 2026 की फॉरेंसिक रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि वायरल क्लिप में आतिशी ने “Guru” शब्द का उच्चारण किया ही नहीं था। यानी वीडियो के कैप्शन में ऐसे शब्द जोड़े गए थे, जो उनके द्वारा बोले ही नहीं गए।
कल जब दिल्ली विधानसभा में हो रहा था गुरुओं का सम्मान , तब नेता विपक्ष आतिशी ने बहुत भद्दी और शर्मनाक भाषा का इस्तेमाल किया
खुद सुनिए …
क्या ऐसे व्यक्ति को पवित्र सदन में रहने का अधिकार है ? pic.twitter.com/OILBCZPTBM— Kapil Mishra (@KapilMishra_IND) January 7, 2026
जांच एजेंसियों का निष्कर्ष: जानबूझकर की गई छेड़छाड़
फॉरेंसिक रिपोर्ट के मुताबिक, वीडियो को जानबूझकर एडिट और डॉक्टर्ड किया गया था, ताकि कैप्शन के जरिए ऐसे शब्द आरोपित किए जा सकें जो वास्तविक ऑडियो में मौजूद नहीं थे। यह निष्कर्ष सोशल मीडिया पर फैलाए गए दावों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर फैलाई जा रही भ्रामक सूचनाओं की चुनौती को भी उजागर करता है।
विश्लेषण: राजनीति, सोशल मीडिया और कानून का टकराव
यह मामला केवल एक वीडियो तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि राजनीतिक माहौल में सोशल मीडिया का दुरुपयोग किस तरह कानूनी कार्रवाई तक पहुंच सकता है। फॉरेंसिक सबूतों के आधार पर FIR का दर्ज होना यह संकेत देता है कि डिजिटल कंटेंट की सत्यता अब तकनीकी जांच के कठोर मानकों पर परखी जाएगी। इससे आगे चलकर ऐसे मामलों में जवाबदेही बढ़ने और भ्रामक प्रचार पर कानूनी शिकंजा कसने की उम्मीद की जा रही है।

मुख्य बातें (Key Points)
- जालंधर पुलिस कमिश्नरेट में आतिशी से जुड़े वीडियो मामले में FIR दर्ज
- फॉरेंसिक रिपोर्ट में “Guru” शब्द बोले जाने से इनकार
- वीडियो को एडिट और डॉक्टर्ड पाए जाने की पुष्टि
- सोशल मीडिया पोस्ट से वीडियो डाउनलोड कर फॉरेंसिक जांच कराई गई
- मामला डिजिटल भ्रामक प्रचार और कानून की सख्ती को उजागर करता है








