Parents Care Law : भारत में बुजुर्ग माता-पिता की अनदेखी अब सिर्फ भावनात्मक मुद्दा नहीं रह गई है। तेलंगाना से एक बड़ा नीतिगत संकेत सामने आया है, जहां मुख्यमंत्री Revanth Reddy ने साफ कहा है कि अगर सरकारी नौकरी करने वाले बच्चे अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल नहीं करते, तो उनकी मासिक सैलरी से 10 प्रतिशत की कटौती कर वह रकम सीधे माता-पिता के बैंक खाते में भेजी जाएगी। यह घोषणा ऐसे समय आई है, जब देशभर में बुजुर्गों की सामाजिक सुरक्षा पर बहस तेज होती जा रही है।

संस्कार से कानून तक का सफर
भारतीय समाज में माता-पिता की सेवा को हमेशा नैतिक जिम्मेदारी माना गया है। लेकिन बदलते समय, ट्रांसफर, करियर की दौड़ और शहरी जीवनशैली ने इस रिश्ते को कमजोर किया है। हालात यह हैं कि कई बुजुर्ग इलाज, दवाइयों और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर हो गए हैं, जबकि उनके बच्चे नियमित वेतन पा रहे हैं।
तेलंगाना सरकार का सख्त रुख
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी का कहना है कि राज्य से वेतन लेने वाले कर्मचारी अपनी पारिवारिक जिम्मेदारी से नहीं बच सकते। प्रस्ताव के मुताबिक, अगर माता-पिता की अनदेखी की शिकायत सही पाई जाती है, तो सैलरी से तय हिस्सा काटकर सीधे माता-पिता के खाते में ट्रांसफर किया जाएगा। सरकार इस प्रस्ताव पर ड्राफ्ट बिल तैयार कर आगामी बजट सत्र में पेश कर सकती है।
असम मॉडल से मिली प्रेरणा
यह प्रस्ताव अचानक नहीं आया। इससे पहले Assam सरकार 2017 में PRANAM Act लागू कर चुकी है। इस कानून के तहत, अगर सरकारी कर्मचारी माता-पिता की अनदेखी करते हैं तो प्रशासनिक जांच के बाद उनकी सैलरी से राशि काटकर माता-पिता को दी जाती है, बिना लंबी कानूनी प्रक्रिया के।

पुराने कानून की सीमाएं
भारत में पहले से ही Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act मौजूद है। लेकिन इसकी बड़ी कमी यह है कि माता-पिता को खुद ट्रिब्यूनल में जाकर शिकायत करनी पड़ती है, जो भावनात्मक और आर्थिक रूप से कठिन होता है। तेलंगाना सरकार इसी कमी को दूर करने की कोशिश कर रही है।
सैलरी कटौती ही नहीं, डे-केयर सेंटर भी
तेलंगाना सरकार का फोकस सिर्फ दंड तक सीमित नहीं है। राज्य में वरिष्ठ नागरिकों के लिए डे-केयर सेंटर बनाए जा रहे हैं, जहां भोजन, बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं और सामाजिक माहौल मिलेगा। हर सेंटर पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है और कुल 37 केंद्र बनाए जा रहे हैं।
समर्थन और सवाल दोनों
इस प्रस्ताव को लेकर बहस शुरू हो चुकी है। कुछ लोग मानते हैं कि वेतन कटौती से रिश्तों में और तनाव बढ़ सकता है, जबकि कई विशेषज्ञ इसे जरूरी कदम बता रहे हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि यह नियम सिर्फ सरकारी कर्मचारियों तक ही क्यों सीमित हो और निजी क्षेत्र को क्यों बाहर रखा जाए।
क्या है पृष्ठभूमि
असम के बाद तेलंगाना का यह कदम संकेत देता है कि अब सरकारें बुजुर्ग माता-पिता की अनदेखी को नजरअंदाज नहीं करेंगी। अगर यह कानून बनता है, तो दूसरे राज्यों के लिए भी यह एक मिसाल बन सकता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- तेलंगाना में माता-पिता की अनदेखी पर सैलरी कटौती का प्रस्ताव
- सरकारी कर्मचारियों की सैलरी से 10% सीधे माता-पिता को
- असम के PRANAM Act से प्रेरित मॉडल
- बुजुर्गों के लिए डे-केयर सेंटर भी योजना में शामिल
FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न








