Bhagwant Mann BJP Attack : भगवंत मान का भाजपा पर हमला 26 अक्टूबर को पटियाला में दर्ज हुआ: उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ और पंजाब का पानी हड़पने के लिए वोट मांग रही है।
भगवंत मान का भाजपा पर हमला इस बार पानी, यूनिवर्सिटी और बकाये के मुद्दों पर केंद्रित है। पटियाला में मीडिया से बातचीत के दौरान पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा निशाना साधा। उनका आरोप है कि भाजपा पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ और पंजाब का पानी हड़पने के लिए वोट मांग रही है।
तारीख 26 अक्टूबर, जगह पटियाला। मुख्यमंत्री का कहना है कि सूबे को उसके जायज अधिकारों से वंचित रखना और वित्तीय बकाया रोके रखना भाजपा की पुरानी आदत है। इसी बातचीत में उन्होंने मोदी सरकार पर साढ़े चार साल से पंजाब के आर.डी.एफ. और वैट का बकाया रोकने का आरोप भी लगाया।
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पंजाब यूनिवर्सिटी और पानी पर लगाया गया सबसे बड़ा आरोप
सबसे चर्चित बयान यूनिवर्सिटी और पानी से जुड़ा है। मुख्यमंत्री ने कहा, “भाजपा, पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ और पंजाब का पानी छीनने की साजिश रचकर वोट मांग रही है। पंजाब को उसके जायज अधिकारों से वंचित करना भाजपा की पुरानी आदत बन चुकी है।”
उन्होंने आगे समझाया कि पंजाब यूनिवर्सिटी पंजाब के इतिहास, पहचान और अकादमिक विरासत से जुड़ी अहम संस्था है। वहीं पानी के स्रोत प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था और लाखों किसानों की रोजी-रोटी के लिए अत्यंत जरूरी हैं। इसका मतलब है कि दोनों मुद्दे सीधे पंजाब की जड़ों से जुड़े हैं।
मुख्यमंत्री का दावा है कि पंजाब के लोग सूबे की संस्थाओं, पानी या वित्तीय अधिकारों को कमजोर करने की किसी भी साजिश को बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने साफ कहा कि पंजाब कभी भी किसी राजनीतिक पार्टी को अपने लोगों के अधिकारों के साथ समझौता करने की इजाजत नहीं देगा।
साढ़े चार साल से रोका गया RDF-वैट बकाया
पैसे का मुद्दा इस बातचीत का दूसरा बड़ा हिस्सा रहा। मोदी सरकार को आड़े हाथों लेते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र ने पिछले साढ़े चार साल से पंजाब के आर.डी.एफ. (ग्रामीण विकास फंड) और वैट के बकाये रोके हुए हैं।
हैरान करने वाली बात यह है कि यह रोकावट इतने लंबे समय से जारी बताई जा रही है। उनका कहना है कि फंडों को इतने लंबे समय तक रोकना पंजाब के लोगों के साथ घोर अन्याय है। चिंता का विषय यह है कि इससे सूबे के जरूरी विकास और ग्रामीण बुनियादी ढांचे के काम प्रभावित होते हैं।
“पंजाब अपने जायज अधिकारों के अलावा और कुछ नहीं मांग रहा और केंद्र सरकार को राज्य के प्रति अपनी वित्तीय जिम्मेदारियां पूरी करनी चाहिए।” मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कोई भी सरकार पंजाब को उसके जायज संसाधनों से अनिश्चित समय के लिए वंचित नहीं रख सकती।
नशे का मुद्दा: अकाली-भाजपा पर दोगुना हमला
नशे के मुद्दे पर भगवंत मान का भाजपा पर हमला और भी तीखा हो गया। इस बार उन्होंने शिरोमणि अकाली दल को भी घेरा। उनका आरोप है कि अकालियों और भाजपा ने अपने शासनकाल के दौरान पूरे पंजाब में नशे का जाल बिछाया।
मुख्यमंत्री के मुताबिक अनगिनत परिवारों ने नशे के भावनात्मक और सामाजिक नतीजे भुगते हैं। नौजवानों को इन पार्टियों की नाकामियों की भारी कीमत चुकानी पड़ी है। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग सूबे के सामाजिक ताने-बाने को पहुंचाए गए नुकसान को भूले नहीं हैं।
दिलचस्प बात यह है कि इसी मुद्दे को आधार बनाकर उन्होंने दोनों पार्टियों के गठबंधन पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि अकाली और भाजपा अब मिलकर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं, जिससे उनकी राजनीतिक अवसरवादिता बेनकाब हो गई है।
| मुद्दा | मुख्यमंत्री मान का आरोप |
|---|---|
| पंजाब यूनिवर्सिटी | हड़पने की साजिश रचकर वोट मांगना |
| पानी | पंजाब का पानी छीनने की कोशिश |
| आर.डी.एफ.-वैट | साढ़े चार साल से बकाया रोके रखना |
| नशा | शासनकाल में नशे का जाल बिछाना |
| गठबंधन | चुनावी लाभ के लिए फिर हाथ मिलाना |
आप के लिए चट्टान जैसा समर्थन, विपक्ष में बौखलाहट
बयानों का तीसरा पहलू सियासी समीकरण से जुड़ा है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि लोग आम आदमी पार्टी (आप) के साथ चट्टान की तरह खड़े हैं, जिसके कारण विपक्षी पार्टियां बौखलाहट में हैं।
उन्होंने कहा, “आप के लिए लोगों के बढ़ते समर्थन से विपक्षी दल निराश और बौखलाहट में हैं। एक भरोसेमंद विकल्प पेश करने के बजाय विपक्ष आप के लिए लोगों के समर्थन को बर्दाश्त नहीं कर रहा।”
सरकार के कामों पर भरोसा जताते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सरकार पंजाब के हितों की रक्षा, सार्वजनिक सेवाओं को मजबूत करने और बेहतर अवसर पैदा करने के लिए काम कर रही है। किसानों, नौजवानों, मजदूरों और आम परिवारों के साथ सरकार डटकर खड़ी है।
चुनावी मौसम में ये आरोप कितने असरदार होंगे
अगर गौर करें तो भगवंत मान का भाजपा पर हमला उस वक्त आया है जब पंजाब में चुनावी हवा तेज हो चली है। खुद मुख्यमंत्री के बयानों में अकाली-भाजपा के मिलकर चुनाव लड़ने की बात शामिल है। यानी हर आरोप का एक साफ चुनावी संदेश जुड़ा हुआ है।
इन बयानों में पानी और यूनिवर्सिटी जैसे भावनात्मक मुद्दे सबसे आगे हैं। समझने वाली बात यह है कि ये मुद्दे पंजाब की जनभावनाओं से गहरे जुड़े हैं। ऐसे में ‘अधिकार छीनने’ वाली बहस आसानी से घर-घर पहुंचती है।
सवाल यह भी उठता है कि बकाये और सेवाओं के मुद्दों पर जवाबदेही की बहस कहां तक जाएगी। जो भी हो, इस बातचीत ने पंजाब की सियासत का तापमान बढ़ा दिया है। अब विपक्ष का जवाब देखना दिलचस्प होगा।
जानें पूरा मामला
पूरा सिलसिला पटियाला में मुख्यमंत्री की मीडिया बातचीत से जुड़ा है। इसी दौरे पर उन्होंने 100 नई मिनी बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और फिर मीडिया से बातचीत में केंद्र सरकार और विपक्ष पर हमला बोला।
बातचीत में मुख्यमंत्री ने पंजाब के योगदान को भी दोहराया। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोगों ने देश के लिए अपार कुर्बानियां दी हैं, खाद्य सुरक्षा में योगदान दिया है और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए डटकर पहरा दे रहे हैं। फिर भी सूबे को भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के हाथों बेइंसाफी का सामना करना पड़ रहा है।
आखिर में उन्होंने दोहराया कि पंजाब के अधिकार, गैरत और हित अटूट हैं। कोई भी राजनीतिक दबाव या चुनावी समीकरण उन्हें अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने और सूबे के जायज अधिकारों के लिए लड़ने से नहीं रोक सकता।
मुख्य बातें (Key Points)
- मुख्यमंत्री मान का आरोप: भाजपा पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ और पंजाब का पानी हड़पने के लिए वोट मांग रही है।
- मोदी सरकार पर आरोप: साढ़े चार साल से पंजाब का आर.डी.एफ. और वैट का बकाया रोका हुआ है।
- अकाली-भाजपा पर आरोप: शासनकाल में पंजाब को नशों की दलदल में धकेलना और अब मिलकर चुनाव लड़ना।
- मुख्यमंत्री का दावा: लोग आप के साथ चट्टान की तरह खड़े हैं, इसलिए विपक्ष बौखलाहट में है।












