Bhagwant Mann Akali Dal पर जबरदस्त हमला बोलते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने गुरुवार 10 अप्रैल को कहा कि शिरोमणि अकाली दल, जिसे पहले ही जनता की अदालत में खारिज किया जा चुका है, अब परमात्मा की अदालत में भी बेनकाब हो चुका है। चंडीगढ़ में मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने सुखबीर सिंह बादल के विरोधाभासी बयानों की कड़ी आलोचना की और श्री अकाल तख्त साहिब की गरिमा को कमजोर करने की कोशिशों पर तीखा तंज कसा।
‘अकाल तख्त पर माफी मांगी, बाहर आकर मुकर गए’
Bhagwant Mann Akali Dal Akal Takht विवाद पर सबसे तीखा हमला करते हुए कहा कि सुखबीर सिंह बादल श्री अकाल तख्त साहिब पर माफी मांगने गए थे, लेकिन बाहर आकर अपने बयान से ही मुकर गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब के लोग भली-भांति जानते हैं कि सुखबीर ने श्री अकाल तख्त साहिब के खिलाफ साजिश रची और वहां झूठ बोलने गए। यह सब पवित्र संस्था की गरिमा को कमजोर करने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि अगर सुखबीर से कोई गलती हुई है तो उन्हें स्थापित धार्मिक परंपराओं के अनुसार उसे स्वीकार करना चाहिए, न कि अकाल तख्त की प्राधिकार को चुनौती देने का प्रयास करना चाहिए।
‘अकाल तख्त सर्वोच्च है, हर सिख शीश झुकाता है’
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने Bhagwant Mann Akali Dal Akal Takht मुद्दे पर बेहद साफ और मजबूत रुख अपनाते हुए कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब सिख समुदाय की सर्वोच्च संस्था है। हर पंजाबी, विशेषकर हर सिख, इसके सामने शीश झुकाता है और इसके हर आदेश को अंतिम मानता है। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति, चाहे वह किसी भी पद पर हो, अकाल तख्त की प्राधिकरण को कमजोर करने का प्रयास नहीं कर सकता।
‘बैसाखी पर विशेष सत्र: बेअदबी पर 10 साल से उम्रकैद तक सजा’
Bhagwant Mann Akali Dal Akal Takht विवाद के बीच मुख्यमंत्री ने बेअदबी (Sacrilege) के खिलाफ निर्णायक कदम का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि गुरु ग्रंथ साहिब के सम्मान से जुड़े 2008 के कानून (जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सतकार एक्ट) में संशोधन के लिए पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र बैसाखी के पवित्र अवसर पर 13 अप्रैल को बुलाया गया है। इस संशोधन के बाद पवित्र ग्रंथ की बेअदबी की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति को कम से कम 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सख्त सजा का सामना करना पड़ेगा।
‘संत समाज और कानूनी विशेषज्ञों से विचार-विमर्श जारी’
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि प्रस्तावित संशोधनों को लेकर संत समाज और कानूनी विशेषज्ञों के साथ व्यापक विचार-विमर्श जारी है ताकि एक प्रभावी और सख्त कानून तैयार किया जा सके। यह बात इसलिए अहम है क्योंकि Bhagwant Mann Akali Dal Akal Takht विवाद के बीच सरकार दर्शाना चाहती है कि वह धार्मिक मामलों को राजनीति से ऊपर रखकर विधायी कार्रवाई कर रही है। पंजाब सरकार का मानना है कि यह कानून राज्य स्तरीय होगा और इसे राष्ट्रपति की मंजूरी की जरूरत नहीं होगी, जिससे यह तुरंत प्रभावी हो जाएगा।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा: अकाली दल जनता की अदालत में हार चुका, अब परमात्मा की अदालत में भी बेनकाब
- सुखबीर बादल पर आरोप: अकाल तख्त पर माफी मांगी, बाहर आकर मुकर गए
- बैसाखी पर 13 अप्रैल को विधानसभा का विशेष सत्र: बेअदबी पर 10 साल से उम्रकैद तक सजा का प्रावधान
- संत समाज और कानूनी विशेषज्ञों से विचार-विमर्श जारी, सख्त और प्रभावी कानून बनाने की तैयारी













