Bank Strike को लेकर 12 फरवरी को देशभर में बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर अखिल भारतीय स्तर पर हड़ताल बुलाई गई है। इस हड़ताल में सार्वजनिक, निजी, विदेशी, क्षेत्रीय ग्रामीण और सहकारी बैंकों के लाखों कर्मचारी और अधिकारी शामिल होने जा रहे हैं।
हालांकि Reserve Bank of India ने 12 फरवरी को आधिकारिक बैंक अवकाश घोषित नहीं किया है, लेकिन कर्मचारियों की हड़ताल के कारण शाखाओं में कामकाज प्रभावित होने की संभावना है।
क्यों बुलाई गई है हड़ताल?
बैंक कर्मचारियों के प्रमुख संगठनों—ऑल इंडिया बैंक एंप्लाइज एसोसिएशन, बैंक एंप्लाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया और ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन—ने संयुक्त रूप से यह हड़ताल घोषित की है।
यूनियनों का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित चार लेबर कोड में गंभीर खामियां हैं। उनका दावा है कि इन श्रम संहिताओं से कर्मचारियों के अधिकारों और हितों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
इसके अलावा बैंककर्मियों की एक प्रमुख मांग यह भी है कि सप्ताह में केवल पांच कार्यदिवस हों। उनका कहना है कि बड़े बैंकों में पहले से पांच दिन का कार्यकाल है, तो अन्य बैंकों पर छह दिन काम का दबाव क्यों डाला जा रहा है।
किन बैंकों पर पड़ेगा ज्यादा असर?
इस हड़ताल का सबसे ज्यादा असर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों पर पड़ने की संभावना है, क्योंकि यूनियनों की सदस्यता मुख्य रूप से वहीं अधिक है।
State Bank of India ने ग्राहकों को सूचित किया है कि सेवाएं सीमित रूप से प्रभावित हो सकती हैं। वहीं Bank of Baroda ने भी स्टॉक एक्सचेंज को जानकारी दी है कि हड़ताल के कारण शाखाओं और कार्यालयों में कामकाज प्रभावित हो सकता है।
IDBI Bank को भी हड़ताल का नोटिस मिला है।
निजी बैंकों में असर अपेक्षाकृत कम रहने की संभावना है, लेकिन कुल मिलाकर बैंकिंग प्रणाली पर प्रभाव पड़ सकता है।
क्या बैंक पूरी तरह बंद रहेंगे?
आरबीआई ने कोई आधिकारिक अवकाश घोषित नहीं किया है। इसलिए शाखाएं तकनीकी रूप से खुली रहेंगी। लेकिन यदि कर्मचारी हड़ताल पर जाते हैं, तो काउंटर सेवाएं, चेक क्लियरेंस, कैश ट्रांजैक्शन और अन्य बैंकिंग कार्य धीमे हो सकते हैं।
ऑनलाइन बैंकिंग और एटीएम सेवाएं सामान्य रूप से चालू रहने की उम्मीद है, लेकिन शाखा स्तर पर सेवाओं में कमी आ सकती है।
ग्राहकों के लिए क्या सलाह?
अगर आपको कैश निकालना, चेक जमा करना या कोई बड़ा लेनदेन करना है, तो बेहतर है कि 12 फरवरी से पहले ही अपना काम निपटा लें।
सरकारी बैंकों में विशेष रूप से भीड़ और देरी की संभावना अधिक है।
राजनीतिक और आर्थिक असर
बैंक हड़ताल का सीधा असर आम जनता, छोटे व्यापारियों और उद्योगों पर पड़ता है। वेतन, भुगतान और लेनदेन प्रभावित हो सकते हैं।
यूनियन का कहना है कि यह आंदोलन कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए जरूरी है। वहीं सरकार का पक्ष है कि लेबर कोड से कार्य प्रणाली में सुधार होगा।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार और यूनियनों के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है या नहीं।








