Bangladesh Hindu Mandir Attack की खबरों ने दुर्गा पूजा की तैयारियों के बीच हर किसी को स्तब्ध कर दिया है। पंडाल सज रहे हैं, तैयारियां जोरों पर हैं, लेकिन सरहद पार बांग्लादेश से जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, उसने सबको चौंका दिया है। महज चंद दिनों के भीतर मंदिरों पर हमले और मूर्तियों में तोड़फोड़ की 34 से ज्यादा वारदातें दर्ज हो चुकी हैं।
दिलचस्प बात यह है कि सबसे हैरान करने वाली बात सिर्फ ये हमले नहीं हैं। असली सनसनी तो उस एक घटना ने मचाई है, जहां उपद्रवियों ने खुद को खुफिया एजेंसी का बड़ा अफसर बताकर वारदात को अंजाम दिया।
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आधा दर्जन से ज्यादा जिलों में फैली नफरत की आग
ग्राउंड से आ रही रिपोर्टों को अगर सिलसिलेवार तरीके से देखें तो पैटर्न बेहद खौफनाक नजर आता है। ढाका से लेकर सिलहट, राजबाड़ी, पंचगढ़, नेत्रकोना और कुंगेल तक, आधा दर्जन से ज्यादा जिले इस वक्त इस आग में झुलसते नजर आ रहे हैं। कहीं आधी रात को निर्माणाधीन पंडालों में घुसकर मां दुर्गा की प्रतिमाओं को खंडित कर दिया जाता है, तो कहीं प्राचीन मंदिरों को निशाना बनाया जाता है।
फरीदपुर और सुनामगंज में सिर्फ तोड़फोड़ नहीं, लूट भी
फरीदपुर और सुनामगंज में जो हुआ उसने साफ कर दिया कि यह केवल धार्मिक उन्माद नहीं, बल्कि खुलेआम लूट और आतंक फैलाने की कोशिश है। फरीदपुर के ऐतिहासिक काली मंदिर में चारों ओर उपद्रवियों ने सेंध लगाई और मंदिर के कीमती सामान पर हाथ साफ किया। वहीं सुनामगंज में हालात और भी बदतर रहे, जहां सिर्फ मंदिरों पर पत्थर नहीं चले, बल्कि हिंदू समुदाय के रिहायशी घरों और दुकानों में घुसकर खुलेआम तोड़फोड़ और लूटपाट की गई।
फर्जी खुफिया अफसर बनकर डकैती, नौगांव में बड़ा ट्विस्ट
नौगांव जिले में जो डकैती हुई, उसने सुरक्षा एजेंसियों के भी कान खड़े कर दिए हैं। यहां कुछ लोग आते हैं, खुद को देश की टॉप खुफिया एजेंसी का अधिकारी बताते हैं, घरों और धार्मिक परिसरों में जबरन दाखिल होते हैं और फिर दिन दहाड़े लूटपाट करके फरार हो जाते हैं। सोचिए, अगर असामाजिक तत्व खुद को खुफिया अधिकारी बताकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं, तो वहां कानून-व्यवस्था का स्तर क्या रह गया होगा।
हिंदू संगठनों ने रखी 365 दिन सुरक्षा की मांग
यही वजह है कि इस बार बांग्लादेश के हिंदू संगठनों ने आर-पार की बात कह दी है। बांग्लादेश पूजा उद्यापन परिषद और दूसरे प्रमुख अल्पसंख्यक संगठनों ने प्रशासन के सामने दो टूक मांग रख दी है। परिषद के महासचिव संतोष शर्मा ने साफ लफ्जों में कहा कि धार्मिक त्योहार हर समुदाय को जोड़ने के लिए होते हैं, नफरत फैलाने के लिए नहीं।
संगठनों ने सीधे तौर पर कहा कि उन्हें सिर्फ पूजा के पांच दिनों की पहरेदारी का दिखावा नहीं चाहिए। अल्पसंख्यक समुदाय को साल के 365 दिन वैसी ही पुख्ता सुरक्षा मिलनी चाहिए जैसी हर आम नागरिक का हक है।
हर साल वही पुराना ढर्रा, कथनी-करनी में फासला
समझने वाली बात है कि हर साल त्योहार आते हैं, पुलिस की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात कर दी जाती हैं, कुछ दिन फ्लैग मार्च होता है और जैसे ही विसर्जन खत्म होता है, सब कुछ पुराने ढर्रे पर लौट आता है। फिर वही डर, वही बेबसी। हर बार अंतरिम सरकार और स्थानीय प्रशासन ने शांतिपूर्ण पूजा का भरोसा तो दिलाया, लेकिन जमीन पर 34 घटनाओं की लिस्ट यह साफ बता रही है कि कथनी और करनी में कितना फासला है।
भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर पड़ सकता है असर
इससे साफ होता है कि बांग्लादेश में जब भी अल्पसंख्यकों और हिंदू मंदिरों पर सुनियोजित हमले होते हैं, उसका सीधा असर भारत-बांग्लादेश के द्विपक्षीय रिश्तों पर पड़ता है। ढाका की मौजूदा राजनीतिक अस्थिरता के बीच ऐसे कट्टरपंथी तत्व माहौल को और जहरीला बनाने की फिराक में रहते हैं, ताकि दोनों देशों के बीच तनाव बढ़े और सीमावर्ती इलाकों में अस्थिरता पैदा हो। अगर प्रशासन ने इन 34 मामलों में त्वरित और कठोर कार्रवाई नहीं की, तो अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी बांग्लादेश की अंतरिम व्यवस्था की साख पर गहरे सवाल खड़े होने लगेंगे।
मुख्य बातें (Key Points)
- बांग्लादेश में दुर्गा पूजा से पहले 34 से ज्यादा मंदिरों पर हमले दर्ज।
- नौगांव में फर्जी खुफिया अधिकारी बनकर डकैती की घटना सामने आई।
- हिंदू संगठनों ने साल भर पुख्ता सुरक्षा की मांग उठाई।
- घटनाओं का सीधा असर भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर पड़ने की आशंका।











