Bangladesh election results Tarique Rahman Gen-Z ने एक बार फिर पड़ोसी देश की सियासत में हलचल मचा दी है। बांग्लादेश में हालिया आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने भारी बहुमत हासिल किया है और पार्टी के अध्यक्ष तारीक रहमान प्रधानमंत्री की दौड़ में सबसे आगे हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या सड़कों पर एक बार फिर Gen-Z (युवा वर्ग) उतरेगा? क्या बदलेंगे बांग्लादेश के सियासी समीकरण? तारीक रहमान, जिन्हें ‘डार्क प्रिंस’ के नाम से भी जाना जाता है, पर भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग समेत दर्जनों गंभीर आरोप हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जिस युवा वर्ग ने शेख हसीना के खिलाफ सड़कों पर आग लगा दी थी, क्या वही युवा अब तारीक रहमान को स्वीकार करेगा?
‘डार्क प्रिंस’ की वापसी: 17 साल बाद बांग्लादेश लौटे तारीक रहमान
तारीक रहमान, पूर्व राष्ट्रपति जिया उर रहमान के बेटे और तीन बार प्रधानमंत्री रहीं खालिदा जिया के इकलौते बेटे हैं। 20 नवंबर 1965 को ढाका में जन्मे तारीक को बचपन से ही राजनीति में रुचि थी। 1991 में उन्होंने अपनी मां को प्रधानमंत्री बनाने में अहम भूमिका निभाई थी।
लेकिन 2007 में सैन्य समर्थित अंतरिम सरकार ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। 18 महीने जेल में रहने के बाद 2008 में वह इलाज के नाम पर लंदन चले गए और फिर कभी वापस नहीं लौटे। 17 साल बाद, चुनाव से लगभग एक महीने पहले वह बांग्लादेश पहुंचे। हालांकि, उनके आने के कुछ ही दिनों में उनकी मां खालिदा जिया का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया, जिसके बाद पार्टी की पूरी कमान उनके हाथों में आ गई।
जब ‘डार्क प्रिंस’ और ‘Gen-Z’ की टकराहट तय करे बांग्लादेश का भविष्य
बांग्लादेश में पिछले एक साल में जो तस्वीरें देखने को मिलीं, वो किसी से छिपी नहीं हैं। शेख हसीना के खिलाफ छात्रों का विद्रोह, सड़कों पर आग, हिंसा और अंततः शेख हसीना का भारत आकर शरण लेना। यह सब उस युवा वर्ग की ताकत को दिखाता है जिसने सिर्फ सोशल मीडिया पर ही नहीं, बल्कि सड़कों पर भी अपनी आवाज बुलंद की। अब वही युवा वर्ग उस नेता को देख रहा है, जिस पर वही आरोप हैं जो शेख हसीना पर थे- भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग और सत्ता का दुरुपयोग। तारीक रहमान पर 84 से अधिक आपराधिक और भ्रष्टाचार के मामले दर्ज थे। हालांकि, मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने उन्हें ज्यादातर मामलों में बरी कर दिया, जिसमें 2018 में उम्रकैद की सजा वाला ग्रेनेड हमला मामला भी शामिल है। सवाल यह है कि क्या युवा वर्ग इस ‘क्लीन चिट’ को स्वीकार करेगा या फिर सड़कों पर उतरकर एक बार फिर सिस्टम को हिला देगा?
84 केस और बरी होने का सफर: क्या कहता है अतीत?
आवामी लीग के शासनकाल में तारीक रहमान पर भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग समेत कई गंभीर आरोप लगे। बांग्लादेशी कोर्ट ने उनकी अनुपस्थिति में कई मामलों में उन्हें दोषी ठहराया था। उन पर लगभग 84 मामले दर्ज थे, जिनमें 2004 में शेख हसीना की एक रैली पर हुए ग्रेनेड हमले का मामला भी शामिल था, जिसमें 2018 में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।
हालांकि, शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद, मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने कानूनी माहौल में बड़ा बदलाव किया। 2026 की शुरुआत तक ज्यादातर बड़े मामलों में उन्हें बरी कर दिया गया। तारीक ने हमेशा इन आरोपों को राजनीतिक दबाव में बनाया गया बताया।
Gen-Z का सवाल: क्या फिर सड़कों पर उतरेगा बांग्लादेश?
शेख हसीना के खिलाफ जो युवा विद्रोह हुआ, उसकी जड़ें भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और तानाशाही प्रवृत्ति में थीं। अब तारीक रहमान के सामने भी यही चुनौती है। उन पर भी भ्रष्टाचार के आरोप हैं और वह एक राजनीतिक विरासत से आते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तारीक रहमान की सरकार ने युवाओं की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा, तो एक बार फिर वही तस्वीरें देखने को मिल सकती हैं। तारीक रहमान ने चुनाव से पहले ‘नया बांग्लादेश’ बनाने का वादा किया था। अब देखना यह है कि क्या उनका ‘नया बांग्लादेश’ युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा कर पाता है या फिर वही पुरानी राजनीति दोहराई जाती है।
भारत के लिए क्या मायने रखती है तारीक रहमान की जीत?
भारत के लिए बांग्लादेश हमेशा से एक महत्वपूर्ण पड़ोसी रहा है। शेख हसीना के कार्यकाल में द्विपक्षीय संबंध बेहद मजबूत रहे। लेकिन मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के दौरान पाकिस्तान और चीन के साथ बढ़ते झुकाव ने भारत की चिंता बढ़ा दी थी। ऐसे में तारीक रहमान का सत्ता में आना भारत के लिए एक नई संभावना लेकर आया है। उन्होंने शुरुआती संकेतों में भारत के साथ अच्छे संबंधों की बात कही है। लेकिन यह देखना बाकी है कि वह अपने शब्दों को जमीन पर कितना उतार पाते हैं।
‘जानें पूरा मामला’
बांग्लादेश में 1971 में आजादी के बाद से ही राजनीति में खानदानी राज और विवादों का दौर चल रहा है। शेख मुजीबुर रहमान से लेकर शेख हसीना तक, और जिया उर रहमान से लेकर खालिदा जिया और अब तारीक रहमान तक, सियासत विरासत में मिलती रही है। तारीक रहमान पर भ्रष्टाचार के आरोपों और लंदन में रहकर निर्वासित जीवन जीने के बाद अब उनकी वापसी हुई है। उन्होंने दोनों सीटों से जीत दर्ज की है और उनकी पार्टी ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि क्या वह बांग्लादेश को स्थिरता दे पाएंगे या फिर देश एक बार फिर अस्थिरता की आग में झुलसेगा।
मुख्य बातें (Key Points)
तारीक रहमान के नेतृत्व वाली बीएनपी ने बांग्लादेश चुनाव में भारी बहुमत हासिल किया।
17 साल बाद देश लौटे तारीक रहमान पर भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग समेत 84 मामले दर्ज थे।
मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने उन्हें ज्यादातर मामलों में बरी कर दिया, जिसमें ग्रेनेड हमला केस भी शामिल है।
सवाल उठ रहे हैं कि जिस Gen-Z ने शेख हसीना के खिलाफ विद्रोह किया, क्या वह तारीक रहमान को स्वीकार करेगा?
भारत के लिए तारीक रहमान की जीत एक नई संभावना, लेकिन युवाओं के विद्रोह की आशंका भी बरकरार।








