Atal Tunnel Snowfall का ऐसा भयावह मंजर सामने आया है जिसने सैकड़ों पर्यटकों की मुश्किलें बढ़ा दीं। हिमाचल प्रदेश के मनाली में करीब 9 किलोमीटर लंबी अटल टनल के पास 15 मार्च को दोपहर में अचानक मौसम बदला और भारी बर्फबारी शुरू हो गई। सड़कों पर बर्फ जमने और फिसलन बढ़ने से रास्ता पूरी तरह बंद हो गया और देखते ही देखते 1,000 से ज्यादा गाड़ियां फंस गईं। पुलिस और BRO (Border Roads Organisation) की टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया, लेकिन कई गाड़ियां अभी भी फंसी हुई हैं। वहीं जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में सिंथन टॉप पर भी बर्फबारी से 214 टूरिस्ट फंसे, जिन्हें सेना और पुलिस ने जॉइंट ऑपरेशन चलाकर बचाया।
अटल टनल के पास कैसे फंसीं 1000 गाड़ियां: समझें पूरा हाल
Atal Tunnel Snowfall की यह घटना 15 मार्च को दोपहर में हुई जब अचानक मौसम का मिजाज बदल गया। बड़ी संख्या में टूरिस्ट अटल टनल पार करके लाहौल घाटी की तरफ जा रहे थे। दोपहर तक मौसम ठीक था, लेकिन शाम होते-होते नजारा पूरी तरह बदल गया। भारी बर्फबारी शुरू हो गई और सड़कों पर बर्फ की मोटी परत जम गई।
फिसलन इतनी बढ़ गई कि गाड़ियां न आगे बढ़ पा रही थीं और न पीछे हट पा रही थीं। देखते ही देखते गाड़ियों की लंबी कतार लग गई और 1,000 से ज्यादा वाहन फंस गए। सबसे बड़ी मुश्किल यह थी कि कई टूरिस्ट पहाड़ों पर भारी बर्फबारी के बीच अपनी गाड़ियों में ही फंसे रहे। ठंड और बर्फ के बीच परिवारों, बच्चों और बुजुर्गों की हालत खराब होने लगी।
पुलिस और BRO का रेस्क्यू ऑपरेशन, कई गाड़ियां अभी भी फंसी
Atal Tunnel Snowfall के बाद पुलिस और BRO की टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। सड़कों पर जमी बर्फ को हटाने का काम युद्धस्तर पर किया गया। कुछ लोगों को निकालने में सफलता मिली, लेकिन स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक कई गाड़ियां अभी भी फंसी हुई हैं। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कई टूरिस्ट अपनी गाड़ियां छोड़कर आना नहीं चाहते, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन में और मुश्किलें आ रही हैं। लोग अपनी गाड़ियों और सामान को छोड़ने को तैयार नहीं हैं, इसलिए वे अभी फिलहाल टनल इलाके में ही फंसे हैं और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।
DSP मनाली ने बताया: सड़कों पर मिट्टी और यूरिया खाद का होगा छिड़काव
Atal Tunnel Snowfall को लेकर DSP मनाली डी. शर्मा ने बताया कि बर्फबारी के कारण होने वाली फिसलन से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर सड़कों पर मिट्टी और यूरिया खाद का छिड़काव किया जाएगा ताकि फिसलन कम हो और आवाजाही सुरक्षित बनी रहे।
यह तरीका पहाड़ी इलाकों में बर्फ से ढकी सड़कों पर फिसलन कम करने के लिए अपनाया जाता है। यूरिया खाद बर्फ को पिघलाने में मदद करती है और मिट्टी का छिड़काव टायरों को ग्रिप देता है। प्रशासन की कोशिश है कि जल्द से जल्द सभी फंसे हुए वाहनों को सुरक्षित निकाला जाए।
पुणे से आए टूरिस्ट ने सुनाई आपबीती
Atal Tunnel Snowfall में फंसे पुणे के टूरिस्ट कार्तिक कुशवाहा ने अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि वे मनाली घूमने आए थे और अटल टनल के आगे जाना चाहते थे। लेकिन नीचे काफी जाम की वजह से दो घंटे से ज्यादा फंसे रहे और बहुत परेशान हुए।
कार्तिक ने बताया कि उन्होंने पार्किंग में गाड़ी छोड़ी और जिम्मी (जीप) से ऊपर पहुंचे। जब उन्होंने ड्राइवर से अटल टनल के आगे ले जाने को कहा तो ड्राइवर ने मना कर दिया कि आगे जाना संभव नहीं है। उन्होंने ज्यादा पैसे देने की भी पेशकश की, लेकिन ड्राइवर ने सुरक्षा कारणों से मना कर दिया। यह किस्सा बताता है कि पहाड़ों पर मौसम कितनी तेजी से बदल जाता है और टूरिस्ट को कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
शिमला में बारिश, सोलन-सिरमौर में बर्फबारी की चेतावनी
हिमाचल प्रदेश में Snowfall का असर सिर्फ मनाली तक सीमित नहीं है। राजधानी शिमला में भी बारिश की तस्वीरें सामने आई हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने सोलन और सिरमौर जिले में आंधी और ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
बर्फबारी की वजह से हिमाचल में टूरिस्ट फुटफॉल भी काफी बढ़ा है। बर्फ का लुत्फ उठाने के लिए बड़ी संख्या में सैलानी पहाड़ों की तरफ रुख कर रहे हैं। हालांकि प्रशासन की सलाह है कि टूरिस्ट बिना मौसम की जानकारी लिए पहाड़ी इलाकों की यात्रा न करें, क्योंकि अचानक मौसम बदलने से जानलेवा स्थितियां बन सकती हैं।
जम्मू-कश्मीर: सिंथन टॉप पर फंसे 214 लोगों को सेना ने बचाया
Snowfall का कहर सिर्फ हिमाचल तक नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर में भी भारी बर्फबारी हुई है। किश्तवाड़ जिले में सिंथन टॉप पर भारी बर्फबारी की वजह से बड़ी संख्या में टूरिस्ट पहाड़ पर फंस गए। सिंथन टॉप 12,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है, जहां बर्फबारी के बाद तापमान शून्य से नीचे चला जाता है।
19 राष्ट्रीय राइफल्स (Rashtriya Rifles) और पुलिस ने जॉइंट ऑपरेशन चलाकर 214 टूरिस्ट और स्थानीय लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू किया। इतनी ऊंचाई पर बर्फबारी के बीच रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना बेहद चुनौतीपूर्ण था, लेकिन सेना और पुलिस की मुस्तैदी से सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इसके अलावा मॉर्गन टॉप पर भी बर्फबारी हुई और वहां भी रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया।
17 मार्च से नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस, और बढ़ेगी बर्फबारी
IMD के अनुसार 17 मार्च की रात से एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) नॉर्थ-वेस्ट इंडिया को प्रभावित कर सकता है। इससे हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और उत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों में बारिश और बर्फबारी जारी रहने का अनुमान है।
इसका मतलब यह है कि आने वाले दिनों में पहाड़ों पर स्थिति और बिगड़ सकती है। जो टूरिस्ट इस समय हिमाचल, कश्मीर या उत्तराखंड में हैं या जाने का प्लान बना रहे हैं, उनके लिए यह जानकारी बेहद अहम है। प्रशासन ने साफ सलाह दी है कि लोग अपनी यात्रा वेदर अपडेट और रोड एडवाइजरी को ध्यान में रखते हुए ही प्लान करें।
पहाड़ों पर जाने से पहले ये सावधानियां जरूर बरतें
Atal Tunnel Snowfall और जम्मू-कश्मीर में फंसे टूरिस्ट की घटनाएं एक बार फिर यह सबक देती हैं कि पहाड़ों पर मौसम का कोई भरोसा नहीं होता। मार्च के महीने में जब मैदानी इलाकों में गर्मी शुरू हो जाती है, तब भी पहाड़ों पर अचानक भारी बर्फबारी हो सकती है। ऐसे में बिना तैयारी के ऊंचाई वाले इलाकों में जाना जानलेवा साबित हो सकता है।
टूरिस्ट को चाहिए कि वे यात्रा से पहले IMD का वेदर अपडेट जरूर चेक करें, स्थानीय प्रशासन की रोड एडवाइजरी का पालन करें, गर्म कपड़े और इमरजेंसी किट साथ रखें और अगर मौसम खराब होने की चेतावनी हो तो यात्रा टाल दें। जिंदगी किसी भी सेल्फी या बर्फ के आनंद से ज्यादा कीमती है।
मुख्य बातें (Key Points)
- Atal Tunnel मनाली के पास 15 मार्च को अचानक भारी Snowfall से 1,000 से ज्यादा गाड़ियां फंसीं, पुलिस और BRO का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी।
- जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में सिंथन टॉप (12,000 फीट) पर 214 टूरिस्ट फंसे, 19 राष्ट्रीय राइफल्स और पुलिस ने जॉइंट ऑपरेशन से बचाया।
- IMD ने शिमला, सोलन, सिरमौर में ऑरेंज अलर्ट जारी किया, 17 मार्च से नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस आने की चेतावनी दी।
- प्रशासन ने टूरिस्ट को सलाह दी कि वेदर अपडेट और रोड एडवाइजरी देखकर ही यात्रा प्लान करें, बिना तैयारी पहाड़ों पर न जाएं।







