Amit Shah Punjab NDA को लेकर इन दिनों सबसे बड़ा सियासी बयान सामने आया है। पंजाब दौरे के महज दो दिन बाद दिल्ली में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने साफ कह दिया कि 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद पंजाब में NDA की सरकार बनेगी। उनके इस बयान ने भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बीच दोबारा गठबंधन की अटकलों को हवा दे दी है।
दिलचस्प बात यह है कि शाह ने यह बयान किसी पंजाब की रैली में नहीं, बल्कि दिल्ली के मंच से दिया। और वहीं से निशाना साधा आम आदमी पार्टी (AAP) सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल पर।
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केजरीवाल पर सीधा हमला, पंजाब सीएम का जिक्र
शाह ने आरोप लगाया कि केजरीवाल पंजाब के मुख्यमंत्री को ठीक से काम नहीं करने दे रहे। उनके शब्दों में, “मैं परसों ही पंजाब गया था। पंजाब में AAP सरकार के नेतृत्व में जिस तरह नशे का व्यापार फला-फूला है, पंजाब की जनता ने तय कर लिया है। इस बार वहां NDA की सरकार होने वाली है।”
समझने वाली बात है कि यह कोई सामान्य बयान नहीं था। शाह ने सीधे तौर पर कहा, “केजरीवाल कान खोलकर सुन लो। बहाने की राजनीति लंबी नहीं चलती है। रिजल्ट लाने पड़ते हैं। दिल्ली से हार गए। पंजाब में डेरा जमाकर वहां के मुख्यमंत्री को काम नहीं करने देते हो।”
2029 तक नशामुक्ति का दोहराया वादा
गृहमंत्री ने एक बार फिर अपना पुराना दावा दोहराते हुए कहा कि 2029 तक पंजाब से नशे के व्यापार को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा। यह वादा उन्होंने इससे पहले भी कई मंचों से किया है, लेकिन इस बार इसे सीधे 2027 के चुनावी एजेंडे से जोड़ दिया गया है।
इससे साफ होता है कि भाजपा नशे के मुद्दे को पंजाब चुनाव में अपना सबसे बड़ा हथियार बनाने की तैयारी में है।
इस साल दो बार पहुंचे शाह, दोनों दौरों का मकसद अलग
| दौरा | तारीख | जगह | मकसद |
|---|---|---|---|
| पहला दौरा | 30 सितंबर | जालंधर (परागपुर) | नशा मुक्त पंजाब यात्रा का समापन, रैली |
| दूसरा दौरा | 20 अक्टूबर | गुरदासपुर, संगरूर, मानसा | नशा विरोधी पीड़ित परिवारों से मुलाकात |
पहले दौरे में शाह ने नशा मुक्त पंजाब यात्रा के समापन पर रैली की, जो 18 सितंबर को शुरू होकर 117 विधानसभा क्षेत्रों से गुजरते हुए करीब 4 हजार किलोमीटर का सफर तय कर चुकी थी। वहीं दूसरे दौरे में वे सीधे उन परिवारों से मिले, जिन्होंने नशे के खिलाफ आवाज उठाते हुए अपनों को खोया है।
2020 में टूटा था 24 साल पुराना गठबंधन
यहां ध्यान देने वाली बात है कि भाजपा और अकाली दल का साथ कोई नया रिश्ता नहीं रहा। दोनों दलों का गठबंधन करीब 24 साल पुराना था, जो 2020 में तीन कृषि कानूनों को लेकर हुए विवाद के कारण टूट गया।
| घटनाक्रम | विवरण |
|---|---|
| मुख्य कारण | 2020 के तीन कृषि कानूनों का विरोध |
| हरसिमरत कौर बादल का इस्तीफा | सितंबर 2020 में केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा |
| औपचारिक अलगाव | सुखबीर सिंह बादल ने NDA से अलग होने का ऐलान किया |
अकाली दल का जनाधार मुख्य रूप से ग्रामीण किसानों में था, इसलिए कृषि कानूनों के बढ़ते विरोध के बीच पार्टी के लिए NDA में बने रहना मुश्किल हो गया था। हरसिमरत कौर बादल, जो उस वक्त केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री थीं, ने सितंबर 2020 में इस्तीफा दे दिया। इसके बाद सुखबीर सिंह बादल ने औपचारिक रूप से गठबंधन तोड़ने का ऐलान कर दिया।
गठबंधन टूटने के बाद अलग-अलग रास्ते
गठबंधन टूटने के बाद दोनों दलों ने अलग राह पकड़ी। 2022 के विधानसभा चुनाव में अकाली दल ने बहुजन समाज पार्टी के साथ हाथ मिलाया, जबकि भाजपा ने कैप्टन अमरिंदर सिंह की पंजाब लोक कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) का साथ लिया।
वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले भी दोबारा गठबंधन की चर्चाएं चलीं, लेकिन सीटों के बंटवारे और किसानों से जुड़े मुद्दों पर सहमति न बनने के कारण दोनों दलों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा।
‘जानें पूरा मामला’
भाजपा-अकाली गठबंधन पंजाब की राजनीति में सिख-हिंदू एकता और सामाजिक संतुलन का प्रतीक माना जाता रहा है। अकाली दल का ग्रामीण क्षेत्रों में और भाजपा का शहरी क्षेत्रों में अपेक्षाकृत मजबूत आधार रहा है। अब अमित शाह के ताजा बयान के बाद यह सवाल फिर जोर पकड़ने लगा है कि क्या 2027 के चुनाव से पहले दोनों दल एक बार फिर साथ आएंगे।
मुख्य बातें (Key Points)
- Amit Shah Punjab NDA को लेकर दिल्ली में बड़ा बयान, 2027 में सरकार बनने का दावा।
- केजरीवाल पर पंजाब सीएम को काम न करने देने का आरोप लगाया।
- 2029 तक पंजाब से नशा खत्म करने का वादा दोहराया।
- 2020 में कृषि कानूनों के विवाद से टूटा था भाजपा-अकाली दल का 24 साल पुराना गठबंधन।












