Chabahar Port के पास अमेरिका ने बड़ा हमला किया है और इस खबर ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। ईरान के दक्षिण-पूर्वी सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत में पाकिस्तान की सीमा के पास स्थित चाबहार मुक्त व्यापार क्षेत्र के नजदीक अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने सैन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ बम बरसाए हैं। अमेरिकी प्रसारक वॉइस ऑफ अमेरिका (VOA) की फारसी सेवा के मुताबिक अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने चाबहार मुक्त व्यापार क्षेत्र के पास एक पहाड़ पर स्थित सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया और इस इलाके में भीषण विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। यह हमला भारत के लिए इसलिए बेहद चिंताजनक है क्योंकि भारत ने 2024 में ईरान के साथ 10 साल का कॉन्ट्रैक्ट साइन कर चाबहार में $370 मिलियन के निवेश का वादा किया है।
चाबहार के पास कहां और कैसे हुआ अमेरिकी हमला
Chabahar Port के पास अमेरिका का यह हमला ईरान-अमेरिका युद्ध के 17वें दिन किया गया है। VOA की फारसी भाषा सेवा के मुताबिक अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने चाबहार मुक्त व्यापार क्षेत्र के पास एक पहाड़ी इलाके में स्थित सैन्य ठिकानों पर हमला किया। इस इलाके के भीतरी हिस्सों में भीषण विस्फोटों की आवाजें गूंजीं।
यह हमला होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकाबंदी और मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरान की तरफ से लगातार होने वाले हमलों के जवाब में किया गया है। अमेरिका ने इस युद्ध में अब कई नए मोर्चे खोलने का फैसला कर लिया है और चाबहार के पास किया गया हमला इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
भारत के लिए क्यों है Chabahar Port इतना अहम
Chabahar Port भारत की भू-राजनीतिक और आर्थिक रणनीति की नींव है। यह बंदरगाह ओमान की खाड़ी के किनारे स्थित है, जिसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि ईरान को हिंद महासागर तक पहुंचने के लिए Strait of Hormuz से होकर गुजरने की जरूरत नहीं पड़ती। यानी होर्मुज बंद होने की स्थिति में भी चाबहार पोर्ट से व्यापार जारी रह सकता है।
भारत ने 2024 में ईरान के साथ 10 साल का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया। इसके तहत सरकारी कंपनी इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (IPGL) ने चाबहार में $370 मिलियन (करीब ₹3,100 करोड़) के निवेश का वादा किया। यह वादा इस बात को रेखांकित करता है कि चाबहार को लेकर भारत की योजनाएं दीर्घकालिक हैं।
इससे पहले 2021 में भी भारत ने चाबहार मुक्त व्यापार क्षेत्र में उद्योग स्थापित करने के लिए अरबों डॉलर के निवेश का वादा किया था। भारत का लक्ष्य अपनी अर्थव्यवस्था को तेजी से बढ़ाना है और इसके लिए विदेशी निवेश और स्थिर व्यापार मार्गों की जरूरत है। चाबहार भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक सीधी पहुंच देता है, बिना पाकिस्तान से होकर गुजरे।
चीन को काउंटर करने में चाबहार की भूमिका
Chabahar Port भारत के लिए सिर्फ व्यापारिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी बेहद अहम है। पाकिस्तान में चीन ने ग्वादर पोर्ट विकसित किया है, जो हिंद महासागर क्षेत्र में चीनी प्रभाव का प्रतीक है। चाबहार पोर्ट भारत का ग्वादर के मुकाबले सबसे बड़ा जवाब माना जाता है।
चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) को काउंटर करने के लिए चाबहार भारत की सबसे बड़ी परियोजना है। खासकर जब दुनिया में भू-राजनीतिक चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं, तो इस पोर्ट का महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है। अमेरिका के इस हमले से चाबहार पर कोई भी नुकसान भारत की रणनीतिक गणनाओं को बड़ा झटका दे सकता है।
बजट में चाबहार के लिए एक पैसा नहीं, विपक्ष ने उठाए सवाल
Chabahar Port को लेकर भारत में विपक्ष पहले से ही सरकार पर हमलावर रहा है। चिंता की एक बड़ी बात यह है कि इस बार के केंद्रीय बजट में चाबहार पोर्ट के विकास के लिए एक भी पैसा आवंटित नहीं किया गया, जबकि बीते कई सालों से सरकार इस पोर्ट के लिए अलग से बजट निर्धारित करती रही है।
कांग्रेस पार्टी ने सरकार से सवाल किया है कि “सरकार को चाबहार परियोजना को लेकर स्थिति साफ करनी चाहिए। बताना चाहिए कि क्या भारत अब भी इस परियोजना में शामिल है?” यह सवाल ऐसे समय उठा है जब अमेरिका ने चाबहार के पास ही बम बरसाए हैं, जिससे इस परियोजना का भविष्य और भी अनिश्चित हो गया है।
होर्मुज की नाकाबंदी का जवाब है चाबहार पर हमला?
Chabahar Port के पास अमेरिका का यह हमला Strait of Hormuz की नाकाबंदी के जवाब में माना जा रहा है। ईरान ने अमेरिका और इजराइल के हमलों के जवाब में होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है। दुनिया का 20% तेल इसी रूट से गुजरता है और इसके बंद होने से वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है।
अमेरिका ने चाबहार के पास हमला कर ईरान पर दबाव बनाने की कोशिश की है। अमेरिका चाहता है कि ईरान होर्मुज खोले, लेकिन ईरान झुकने को तैयार नहीं है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची ने स्पष्ट कहा है कि “Strait of Hormuz उनके दुश्मनों के अलावा सभी के लिए खुला है। इजराइल और अमेरिका के जहाजों को वहां से नहीं निकलने दिया जाएगा। किसी और देश का जहाज आसानी से जा सकता है।”
ट्रंप को झटका: कोई देश नहीं भेज रहा युद्धपोत
Chabahar Port के पास हमले के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप होर्मुज को खुलवाने में नाकाम हैं। ट्रंप ने चीन समेत कई देशों से अपील की है कि वे अपने युद्धपोतों को Strait of Hormuz भेजें और उसे खुलवाने में मदद करें। लेकिन किसी भी देश ने इसमें आगे आकर हामी नहीं भरी है।
NATO के सहयोगी देश, जापान, ऑस्ट्रेलिया सबने युद्धपोत भेजने से मना कर दिया है। यानी अमेरिका इस युद्ध में पूरी तरह अकेला पड़ गया है। ऐसे में अमेरिका ने नए मोर्चे खोलने शुरू कर दिए हैं और चाबहार के पास किया गया हमला इसी रणनीति का हिस्सा है।
भारत के सामने बड़ा सवाल: चाबहार पर नुकसान हुआ तो?
Chabahar Port के पास अमेरिकी हमले ने भारत सरकार के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अगर इस हमले में चाबहार पोर्ट को कोई नुकसान पहुंचा है तो यह भारत के लिए एक बड़ा झटका होगा। भारत ने इस पोर्ट में करोड़ों डॉलर का निवेश किया है और यह परियोजना भारत की मध्य एशिया नीति और चीन को काउंटर करने की रणनीति की रीढ़ है।
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि अमेरिका जो भारत का रणनीतिक साझेदार माना जाता है, उसी ने भारत की सबसे अहम विदेशी परियोजना के पास बमबारी की है। यह स्थिति भारत की विदेश नीति के लिए बेहद जटिल है। एक तरफ भारत को अमेरिका के साथ अपने रिश्ते संतुलित रखने हैं, दूसरी तरफ ईरान में उसकी अरबों डॉलर की परियोजना दांव पर लगी है।
भारत सरकार को अब स्पष्ट करना होगा कि चाबहार पोर्ट पर कोई नुकसान हुआ है या नहीं और भविष्य में इस परियोजना को लेकर उसकी क्या रणनीति है। मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव और अमेरिका-ईरान युद्ध भारत की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार रणनीति दोनों के लिए गंभीर चुनौती बन गया है।
मुख्य बातें (Key Points)
- अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने Chabahar Port के पास सैन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ बम बरसाए, VOA फारसी सेवा के मुताबिक पहाड़ी इलाके में भीषण विस्फोट हुए।
- भारत ने 2024 में ईरान के साथ 10 साल का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया, IPGL ने चाबहार में $370 मिलियन निवेश का वादा किया, लेकिन इस बार के बजट में एक पैसा नहीं दिया गया।
- ईरान के विदेश मंत्री अराक्ची ने कहा Strait of Hormuz दुश्मनों के अलावा सबके लिए खुला, ट्रंप को NATO, जापान, ऑस्ट्रेलिया सबने ठुकराया।
- चाबहार भारत के लिए चीन के ग्वादर पोर्ट का जवाब है और मध्य एशिया तक सीधी पहुंच का जरिया, कांग्रेस ने सरकार से चाबहार परियोजना पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।













