Air India Flights Cancel का सिलसिला थम नहीं रहा। मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच 28 फरवरी 2026 से शुरू हुई जंग ने वैश्विक विमानन सेक्टर की कमर तोड़ दी है और इसका सबसे बड़ा शिकार भारत की प्रमुख एयरलाइन एयर इंडिया बन रही है। एयर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन ने खुद माना है कि अब तक 2,500 से ज्यादा उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं, जेट ईंधन की कीमतें दोगुनी हो चुकी हैं और एयरलाइन इस रूट पर अपनी क्षमता के सिर्फ 30% हिस्से पर काम कर पा रही है।
इसका सीधा असर आम यात्रियों की जेब पर पड़ रहा है क्योंकि टिकटों पर फ्यूल सरचार्ज लगना शुरू हो गया है।
हजारों किलोमीटर दूर की जंग, लेकिन चोट आम आदमी की जेब पर
Air India Flights Cancel की वजह सीधे तौर पर मिडिल ईस्ट की जंग है। यह जंग अब सीमाएं पार करते हुए सीधे भारत के आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी पर हमला कर रही है। पहले एलपीजी गैस की किल्लत आई, फिर पेट्रोल-डीजल की कीमतों ने तोड़ा और अब फ्लाइट टिकट के दाम भी आसमान छूने लगे हैं।
तेल की बेतहाशा बढ़ती कीमतों और एक के बाद एक बंद होते हवाई रास्तों ने एयरलाइंस कंपनियों की हालत खराब कर दी है। ईरान, इराक, कुवैत, सीरिया, इजराइल, बहरीन, यूएई और कतर सहित मिडिल ईस्ट के बड़े हिस्से का हवाई क्षेत्र बंद या सख्त प्रतिबंधों के अधीन है, जिससे एयरलाइंस को लंबे और महंगे वैकल्पिक रास्ते अपनाने पड़ रहे हैं।
सीईओ विल्सन ने खोली हालात की पोल: पूरा नेटवर्क अस्थिर
Air India Flights Cancel पर बोलते हुए सीईओ कैंपबेल विल्सन ने कंपनी के कर्मचारियों को भेजे संदेश में बताया कि ब्रिटेन, यूरोप और उत्तरी अमेरिका जाने वाली उड़ानों को पहले से ही लंबे उड़ान मार्गों से और भी दूर ले जाया जा रहा है। विल्सन ने कहा कि जिन वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल पिछले साल पहलगाम घटना के बाद से हो रहा था, उन पर भी अब दबाव बढ़ गया है।
इसका नतीजा: अधिक ईंधन की खपत, अधिक उड़ान समय और भारी ऑपरेशनल लागत। विल्सन ने साफ शब्दों में माना कि मौजूदा हालात में एयर इंडिया का पूरा नेटवर्क और शेड्यूल पूरी तरह अस्थिर हो गया है और आने वाले समय में इसका असर और भी ज्यादा महसूस किया जा सकता है। अगर बढ़ती लागत और घटती यात्री मांग का सिलसिला जारी रहा तो उड़ानों में और कटौती करनी पड़ सकती है।
फ्यूल सरचार्ज: कितना बढ़ गया किराया
Air India Flights Cancel के साथ-साथ बढ़ती ईंधन लागत को संभालने के लिए एयर इंडिया ने 12 मार्च और 18 मार्च 2026 से चरणबद्ध तरीके से टिकटों पर फ्यूल सरचार्ज लगाना शुरू कर दिया है। एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) किसी भी एयरलाइन की कुल ऑपरेटिंग लागत का करीब 40% होता है और जब ईंधन के दाम दोगुने हो जाएं तो सरचार्ज लगाना मजबूरी बन जाती है।
किराये में कितनी बढ़ोतरी हुई, इसकी तस्वीर कुछ ऐसी है: डोमेस्टिक और SAARC रूट पर ₹399 प्रति टिकट, वेस्ट एशिया/मिडिल ईस्ट पर $10 अतिरिक्त, साउथईस्ट एशिया पर $40 से बढ़कर $60, अफ्रीका पर $60 से बढ़कर $90, यूरोप पर $100 से बढ़कर $125 और नॉर्थ अमेरिका व ऑस्ट्रेलिया पर $150 से बढ़कर $200 फ्यूल सरचार्ज लगा दिया गया है।
हालांकि कंपनी का भी मानना है कि किराए बढ़ाने की एक सीमा होती है। ज्यादा महंगे टिकट से यात्रियों की संख्या कम हो रही है, जो कंपनी के लिए ही नुकसानदायक है।
लंबे रास्ते, ज्यादा समय, ज्यादा खर्च: यात्रियों पर तिहरी मार
Air India Flights Cancel के अलावा जो उड़ानें चल भी रही हैं, उनकी हालत भी पहले जैसी नहीं है। हवाई क्षेत्र पर लगी पाबंदियों के कारण उड़ानों को सुरक्षित रास्तों से निकालने के लिए 1 से 3 घंटे तक लंबे वैकल्पिक रूट अपनाने पड़ रहे हैं। जो फ्लाइट्स पहले गल्फ कॉरिडोर से होकर जाती थीं, वे अब या तो उत्तर में कॉकेशस-अफगानिस्तान रूट से या दक्षिण में मिस्र-सऊदी अरब-ओमान रूट से भेजी जा रही हैं।
इसका मतलब: ज्यादा ईंधन, ज्यादा समय, ज्यादा लागत और अंत में ज्यादा महंगा टिकट। यात्रियों पर तिहरी मार पड़ रही है, पहले टिकट महंगा, फिर ऊपर से फ्यूल सरचार्ज और सफर भी पहले से लंबा। कैथे पैसिफिक, एयर फ्रांस-KLM और थाई एयरवेज जैसी अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने भी अपने किराए और फ्यूल सरचार्ज बढ़ा दिए हैं।
कुछ राहत भी: फंसे यात्रियों के लिए अतिरिक्त उड़ानें
Air India Flights Cancel के बीच एक राहत की बात यह है कि एयर इंडिया ने मिडिल ईस्ट में फंसे भारतीय यात्रियों को वापस लाने के लिए अतिरिक्त शेड्यूल्ड और नॉन-शेड्यूल्ड उड़ानें भी चलाई हैं। खासकर UAE, जेद्दा और मस्कट से अतिरिक्त फ्लाइट्स ऑपरेट की गई हैं और कुछ यूरोपीय और नॉर्थ अमेरिकन शहरों के लिए भी विशेष उड़ानें चलाई गई हैं।
हालांकि ये अतिरिक्त उड़ानें स्लॉट उपलब्धता, रेगुलेटरी अनुमतियों और बदलती सुरक्षा स्थिति पर निर्भर हैं। EASA (यूरोपीय विमानन सुरक्षा एजेंसी) ने कई मिडिल ईस्ट देशों के हवाई क्षेत्र से बचने की एडवाइजरी जारी की है, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है।
जानें पूरा मामला
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हवाई हमले शुरू किए, जिसके जवाब में ईरान ने इजराइल, अमेरिकी ठिकानों और मित्र देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इस जंग ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को बुरी तरह हिला दिया है। कच्चे तेल और जेट ईंधन की कीमतें $100 प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावित होने से ईंधन आपूर्ति पर गंभीर संकट आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष और लंबा खिंचा तो 2026 में यात्रा लागत ऊंची बनी रहेगी और वैश्विक पर्यटन उद्योग को भारी नुकसान होगा।
मुख्य बातें (Key Points)
- मिडिल ईस्ट जंग के कारण Air India की 2,500 से ज्यादा उड़ानें रद्द, एयरलाइन सिर्फ 30% क्षमता पर काम कर रही।
- जेट ईंधन की कीमतें दोगुनी हुईं, एयर इंडिया ने सभी रूट पर फ्यूल सरचार्ज लगाया: डोमेस्टिक ₹399 से लेकर नॉर्थ अमेरिका $200 तक।
- हवाई क्षेत्र बंद होने से उड़ानें 1-3 घंटे लंबे वैकल्पिक रास्तों से भेजी जा रहीं, यात्रा समय और लागत दोनों बढ़े।
- सीईओ कैंपबेल विल्सन ने माना कि एयरलाइन का पूरा नेटवर्क अस्थिर हो गया है, आगे और कटौती संभव।








