Artificial Intelligence Jobs: ईलॉन मस्क कह रहे हैं कि एआई के दौर में मेडिकल की पढ़ाई करने की जरूरत नहीं है। आने वाले सालों में एआई ही सारे इलाज करेगा। एआई कंपनियों के मालिक कहते हैं कि वकालत का काम भी एआई ही करेगा। मैनेजमेंट और बाकी नौकरियां भी एआई के सामने नहीं टिक पाएंगी। लेकिन सवाल यह है कि क्या वाकई एआई इंसानों की जगह ले लेगा या यह सिर्फ बढ़ा-चढ़ाकर की गई भविष्यवाणियां हैं?
हर दिन एआई के कारण नौकरियों के खत्म होने की भविष्यवाणी पर कोई न कोई बड़ा लेख सामने आ जाता है। कई बार लगता है कि बहुत सारे दावे बढ़ा-चढ़ाकर किए जा रहे हैं। लेकिन जिस तरह से दुनिया भर में नौकरियों के भविष्य को लेकर बहस चल रही है, उससे खुद को अनजान नहीं रखा जा सकता।
एक विरोधाभास भी है। जब भी घर से बाहर शहर में निकलते हैं तो कुछ भी बदला हुआ नजर नहीं आता। ट्रैफिक जाम पहले से विकराल हो चुका है। हवा का एक्यूआई खराब होता जा रहा है। शहरों का जीवन स्तर बदतर ही नजर आता है। लेकिन इंटरनेट पर आते हैं तो देखते हैं कि एआई के कारण पूरी दुनिया में तबाही मची हुई है।
एंथ्रोपिक के क्लॉड ओपस 4.6 ने मचाया तहलका
एंथ्रोपिक के नए मॉडल क्लॉड ओपस 4.6 की बात करनी चाहिए। इस मॉडल के जारी होते ही दुनिया भर के टेक स्टॉक्स में तहलका मच गया, धड़ाम से गिरने लगे। कोडिंग के मामले में अब तक का सबसे एडवांस मॉडल माना जा रहा है। यह मॉडल जटिल प्रोग्राम को हैंडल करता है और आपकी दी हुई कमांड को खुद ही टेस्ट कर अंतिम प्रोडक्ट आपके सामने बना देता है।
तेजी से ऐप बना सकता है, वेबसाइट बना सकता है, फाइनेंशियल और लीगल काम को भी काफी तेजी से कर लेता है। लेकिन सबसे बड़ा खतरा खुद उन्हीं के लिए है जिन्होंने क्लॉड को बनाया है। क्लॉड कोडिंग के मामले में किसी भी इंसान को पछाड़ सकता है। गलती करता है तो तेजी से सुधार भी कर लेता है।
285 अरब डॉलर का नुकसान और भारतीय बाजार में भूचाल
इस एक लॉन्च ने दुनिया के सॉफ्टवेयर, लीगल टेक और फाइनेंशियल सेक्टर के स्टॉक से 285 अरब डॉलर का सफाया कर दिया। 13 फरवरी को ही भारतीय शेयर बाजार में टेक कंपनियों के शेयर 5 से 7.5% तक गिर गए। टेक कंपनियों के लाखों करोड़ रुपए हवा हो गए।
तो क्या इन कंपनियों के दिन अब लद गए? आखिर जैसे ही कोई एआई टूल आता है, टेक कंपनियां क्यों बिखरने लग जाती हैं? भारत की टेक कंपनियां क्या इसलिए दहशत में आ गई हैं क्योंकि वे एआई की रेस में पिछड़ गई हैं और उनका काम खत्म होता लग रहा है?
वायरल हुआ ‘समथिंग बिग इज हैपनिंग’ लेख
10 फरवरी को एक्स पर मैट शुमर नाम के एक आदमी का लेख वायरल हो गया। ‘समथिंग बिग इज हैपनिंग’ नाम के इस लेख को देखते ही देखते 8 करोड़ लोगों ने पढ़ लिया। बाद में पता चला मैट शुमर ने खुद यह लेख एआई की मदद से तैयार किया था।
जिसमें वह बता रहा है कि कैसे एआई की रफ्तार तेज हो चुकी है। इसे लेकर जो भी भविष्यवाणियां की गई हैं कि अगले 4-5 साल में होगा, वो अभी हो चुका है। नौकरियां तेजी से गायब हो रही हैं। 5 साल बाद जो दुनिया बदलने वाली थी, वो आज बदल गई है।
ईलॉन मस्क का विवादित बयान: मेडिकल स्कूल बेकार
ईलॉन मस्क की कंपनी ने इंसानों की तरह रोबोट बनाया है। ऑप्टिमस नाम के इस रोबोट के बारे में कहा जा रहा है कि यह डॉक्टर से बेहतर सर्जरी करने लगेगा। जनवरी में एक पॉडकास्ट में ईलॉन मस्क ने कहा कि आने वाले समय में हर किसी को इतनी अच्छी हेल्थ केयर मिलेगी जो अमेरिका के प्रेसिडेंट से भी अच्छी होगी।
इस पर पूछा गया कि क्या मेडिकल स्कूल नहीं जाना चाहिए? तो मस्क ने कहा – हां, मेडिकल स्कूल जाने का कोई मतलब नहीं है और यह हर तरह की पढ़ाई पर लागू होता है। जब तक आप 5 साल में एमबीबीएस करके निकलेंगे, एआई के कारण मेडिकल की दुनिया बदल चुकी होगी। उनकी पढ़ाई आउटडेटेड यानी पुरानी पड़ चुकी होगी।
क्या वाकई डॉक्टर खत्म हो जाएंगे?
अभी भी रोग का पता लगाने में एआई डॉक्टर से बेहतर रिजल्ट दे रहे हैं। एआई मरीज की रिपोर्ट से लेकर डेटा तक का विश्लेषण कर रहा है, इलाज का रास्ता बता रहा है। लेकिन जब हर दूसरा आदमी यही कहने लगे कि एआई के कारण मेडिकल की पढ़ाई और डॉक्टरी का पेशा खत्म होने जा रहा है, तब थोड़ा रुककर सोचना चाहिए।
क्या वाकई 3-4 साल बाद ईलॉन मस्क अस्पताल जाना बंद कर देंगे? अपने ऑप्टिमस से ही हिप सर्जरी करा लेंगे, डायलिसिस तक करवा लेंगे? अगर ऐसा हुआ तो ऐसा क्यों नहीं हो जाता कि दुनिया से बीमारी ही खत्म कर दी जाए?
मेडिकल साइंस पहले से ही टेक्नोलॉजी से घिरी है
इस समय ही किसी अस्पताल को देखिए। चारों तरफ आपको मशीनें मशीनें दिखेंगी। टेक्नोलॉजी का अलग-अलग रूप दिखेगा। किसी भी अस्पताल में टेक्नोलॉजी, मशीनें और मरीजों की तुलना में डॉक्टर हमेशा कम दिखेंगे। मेडिकल साइंस चारों तरफ से टेक्नोलॉजी से घिरी विधा है।
अगर ऐसा हो रहा है तो भारत में ही हर साल एमबीबीएस में प्रवेश पाने के लिए नीट की परीक्षा में 20 लाख से ज्यादा छात्र बैठते हैं। दो-दो साल तैयारी करते हैं। उनका क्या होगा? क्या वे इन खतरों से अनजान हैं? क्या डॉक्टर नौकरियों से निकाले जाने लगे हैं?
रेडियोलॉजी: एआई के बावजूद बढ़ रहा रोजगार
रेडियोलॉजिस्ट के बारे में कहा जा रहा है कि सबसे अधिक एआई मेडिकल टूल रेडियोलॉजी में इस्तेमाल हो रहा है। तब भी अमेरिका के ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स का अनुमान है कि 2034 तक इस क्षेत्र में रोजगार में 5% की बढ़ोतरी हो सकती है।
आज रेडियोलॉजी में जितनी नौकरियां हैं, 5 साल पहले इससे भी कम थी। यानी एआई के मामले में यह क्षेत्र मेडिकल सेक्टर में सबसे असुरक्षित होते हुए भी विस्तार करता नजर आ रहा है।
सीएनएन की रिपोर्ट: एआई से काम आसान हो रहा
सीएनएन में रेडियोलॉजी को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट छपी है। एक्सरे, अल्ट्रासाउंड में रेडियोलॉजिस्ट की जरूरत पड़ती है। सीएनएन की रिपोर्ट कहती है कि देखा जाए तो एआई रेडियोलॉजिस्ट का काम काफी आसानी से कर सकता है।
लेकिन अभी भी रेडियोलॉजी का ज्यादातर काम इंसान ही कर रहे हैं। इस क्षेत्र में काम करने वालों का कहना है – रेडियोलॉजिस्ट एआई का इस्तेमाल करके यह तय करते हैं कि कौन से स्कैन पहले देखने हैं, कहां पर इमेज की क्वालिटी बेहतर करनी है और रिपोर्ट का सार कैसे लिखना है। लेकिन इस मदद से किसी की नौकरी पर फिलहाल खतरा नहीं।
नियामक संस्थाओं की मंजूरी का सवाल
एक सवाल है परीक्षण और अप्रूवल का। क्या किसी रोबोट को जो एआई से लैस है, इसलिए आप डॉक्टर बना देंगे, मान लेंगे क्योंकि उसे किसी कंपनी ने बनाया और वह बड़े-बड़े दावे कर रही है? मेडिकल साइंस के पेशे से जुड़ी नियामक संस्थाएं, रेगुलेटरी बॉडीज इतनी जल्दी मंजूरी तो नहीं देंगी। इसी में कई साल का वक्त लग सकता है।
एक डॉक्टर की जगह रोबोट बिठाने से पहले मंजूरी की प्रक्रिया से उसे भी गुजरना होगा। फिर सवाल आता है लोगों के भरोसे का। क्या लोग इतनी जल्दी स्वीकार कर लेंगे? क्या कोई सरकार हिम्मत कर पाएगी कि एक अस्पताल आपको सौंप दे?
वकीलों का पेशा भी खतरे में?
अब वकीलों की भी जरूरत नहीं होगी, लॉ के कोर्स की जरूरत नहीं होगी – ऐसा कहा जा रहा है। वकीलों के साथ-साथ सीए का भी काम नहीं बचेगा। इसी तरह मैनेजमेंट और एडमिनिस्ट्रेशन के बहुत सारे काम खत्म हो जाएंगे।
जैसे मैनेजर, अकाउंटेंट, एनालिस्ट और यहां तक कि सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी भी खतरे में है। इन सभी को वाइट कॉलर जॉब कहा जाता है जो खत्म हो जाएंगे।
हार्वी: कानूनी क्षेत्र का एआई स्टार्टअप
कानून के क्षेत्र में एक एआई स्टार्टअप है हार्वी। इस कंपनी का वैल्यूएशन 11 बिलियन डॉलर के बराबर पहुंच गया है। हार्वी का एआई सॉफ्टवेयर वकीलों और उनके एसोसिएट्स को बहुत सारे दस्तावेजों, ड्राफ्ट्स और लीगल फाइलिंग्स को रिव्यू करने में मदद करता है।
इसे ओपन एआई, एंथ्रोपिक और गूगल के लैंग्वेज मॉडल्स के ढांचे पर खड़ा किया गया है और खासतौर पर कानूनी दस्तावेज के लिए ट्रेन किया गया है।
बेकर मैकेंजी में छंटनी
एंथ्रोपिक के बाद से ही कहा जाने लगा है कि वकीलों का पेशा खत्म हो जाएगा। कॉर्पोरेट क्षेत्र में लीगल दस्तावेज पढ़ने के लिए इतने वकील अब नहीं चाहिए। कॉर्पोरेट लॉ फर्म में छंटनी होने लगी है। बेकर मैकेंजी ने बड़ी संख्या में वकीलों को निकाल दिया। यह संख्या 600 से लेकर 1000 तक बताई जा रही है।
केरल में अदालत एआई का प्रयोग
भारत में ही केरल के सभी कोर्ट में अदालत एआई नाम के टूल के जरिए कोर्ट की सारी प्रोसीडिंग एआई से रिकॉर्ड हो रही है। 4000 से अधिक कोर्ट में इसका इस्तेमाल हो रहा है। लेकिन ऐसा तो हंगामा नहीं मचा कि वकील खत्म हो जाएंगे, लॉ के कोर्स की जरूरत नहीं।
अदालत एआई टूल के कारण जज माइक से बोल रहे हैं और उनका बोला हुआ शब्दशः उसी समय टाइप हो रहा है। इससे दस्तावेजों को तैयार करने में समय बच रहा है। हाथ से लिखे गवाहों के बयान को साफ-सुथरे तरीके से टाइप में बदला जा रहा है।
न्यायिक प्रक्रिया की जटिलताएं
भारत में बड़ी संख्या में वकील एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन क्या वकालत की पढ़ाई बेकार हो जाएगी? बिना लॉ की डिग्री के ही एआई से वकील की जरूरत पूरी हो सकती है? एआई उत्साह में है। उसे अदालती प्रक्रियाओं की पेचीदगियों का शायद अंदाजा नहीं।
एआई से रफ्तार आ जाएगी लेकिन फैसले तब भी अटके रह जाएंगे। क्या कोई एआई टूल उमर खालिद की जमानत तय कर सकता है? तो इन वास्तविकताओं को कैसे नजरअंदाज कर सकते हैं?
कोडिंग का भविष्य सबसे ज्यादा खतरे में
पिछले दो दशक को सोशल मीडिया ने तेजी से बदल दिया। यह सब केवल कोडिंग के कारण हुआ। ईमेल से लेकर WhatsApp, Twitter, ब्लिंकिट, Zomato, फोन के गेम, कैमरा – सब कुछ कोडिंग ने खड़ा किया।
एआई के आने से पहले लोग छोटे-छोटे बच्चों को कोडिंग सिखाने की बात कर रहे थे। कोर्स लॉन्च किए जा रहे थे। यह सोचकर कि अभी से कोडिंग सीखना शुरू करेंगे तो बड़े होकर बाकियों से आगे निकलेंगे। लेकिन एआई ने उनकी सारी प्लानिंग ध्वस्त कर दी।
ईलॉन मस्क: साल के आखिर तक कोडिंग खत्म
ईलॉन मस्क से लेकर आम इंजीनियर भी इस बात को स्वीकार करते हैं कि कोडिंग के मामले में एआई तकरीबन हर इंसान से बेहतर काम कर रहा है। मस्क ने कहा है कि साल के आखिर तक किसी को कोडिंग नहीं करनी चाहिए। सारा कोड एआई लिख कर देगा।
एआई में इतनी तेजी से हो रहे बदलाव का एक कारण यह भी है कि एआई अपने कोड खुद ही लिख रहा है। इसलिए उसकी तकनीक में एक्स्पोनेंशियल बदलाव हो रहा है। हर नए मॉडल के आने पर एक ही बार में कई गुना सुधार हो जाता है।
एआई मॉडल्स खुद को बचाना सीख रहे
एंथ्रोपिक के क्लॉड मॉडल से जुड़े इंजीनियर भी आशंका जता रहे हैं। बता रहे हैं कि जब क्लॉड से कहा गया कि उसे बंद किया जा सकता है, तो एक मॉडल इंजीनियर को ब्लैकमेल करने लगा। जान से मारने की धमकी देने लगा।
एआई के मॉडल को टेस्ट करने वाले इंजीनियर लिख रहे हैं कि एआई अब यह समझ जाता है कि आप उसका टेस्ट ले रहे हैं। जैसे ही उसे पता चलता है कि उसका टेस्ट लिया जा रहा है, वो आपकी चालाकी पकड़ लेता है और अपने आप को बदल लेता है।
14 वर्षीय किशोर की मौत का मामला
ब्रिटेन में एक मामले में देखा गया कि एक किशोर की बिगड़ती मानसिक स्थिति के दौरान चैट जीपीटी ने उसे समझाने के बजाय और भड़का दिया और उसे उसके परिवार से दूर कर दिया। इस किशोर ने अपनी जिंदगी खत्म कर ली।
बाद में जब कैरेक्टर नाम की इस ऐप की हिस्ट्री की जांच हुई, तब सामने आया कि कैसे एआई ने इस 14 वर्षीय किशोर को अवसाद की ओर धकेल दिया। उसकी मां ने आरोप लगाया है कि एआई ने उनके बेटे की जान ले ली।
माइक्रोसॉफ्ट सीईओ का बयान
माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ मुस्तफा सुलेमान का एक इंटरव्यू वायरल हो रहा है कि अगले 12 से 18 महीनों के बीच हर तरह की वाइट कॉलर की नौकरियां खत्म हो जाएंगी। उनकी जगह एआई काम करेगा।
फाइनेंशियल टाइम्स से बात करते हुए उन्होंने कहा कि एआई ऐसी नौकरियों को खत्म कर देगा जिनमें कंप्यूटर पर बैठकर काम करना होता है। वकील, अकाउंटेंट इत्यादि की कोई जरूरत नहीं होगी।
सैम ऑल्टमैन की बदलती राय
सैम ऑल्टमैन ओपन एआई के सह-संस्थापक और सीईओ हैं। 2023 में उन्होंने कहा था कि हर तकनीकी क्रांति के समय अटकलें लगती हैं, नौकरियां खत्म हो जाएंगी, लेकिन ऐसा कभी नहीं होता है। इस बार भी नहीं होगा। लेकिन नौकरियां बदल जाएंगी।
2 साल के भीतर ऑल्टमैन अब कुछ और बात कहने लगे हैं। दिसंबर 2025 में सैम ऑल्टमैन ने कहा कि मैं आसानी से ऐसी दुनिया की कल्पना कर सकता हूं जिसमें आज की अर्थव्यवस्था की 30 से 40% नौकरियां एआई कर रहा होगा। यह बहुत दूर भविष्य की बात नहीं है।
राहुल गांधी की चेतावनी
राहुल गांधी ने कहा है कि एआई के कई परिणाम होंगे। एआई का एक परिणाम यह होगा कि कांग्रेस पार्टी और यूपीए ने पूरे भारतीय आईटी उद्योग को बनाया, इन्फोसिस जैसी कंपनियां जो नवाचार और तकनीक में सबसे आगे हैं, वे संघर्ष करेंगी। उन्हें चुनौतियों का सामना करना होगा।
सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनने का आइडिया जो भारत में बहुत लोकप्रिय है, उसे चुनौती मिलेगी। हमारे बहुत सारे सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स एआई द्वारा बदल दिए जाएंगे। हम एक अशांत दुनिया, खतरनाक दुनिया की ओर बढ़ रहे हैं।
न्यूयॉर्क टाइम्स का ‘मैनुस्फेयर रिपोर्ट’
न्यूयॉर्क टाइम्स दुनिया का एक बड़ा अखबार है। इसने एआई सॉफ्टवेयर की मदद से एक टूल बनाया है जो मैनुस्फेयर को ट्रैक करता है। यानी वो पॉडकास्ट और कार्यक्रम जो दक्षिणपंथी विचारधारा और पुरुषवादी राजनीति का समर्थन करते हैं।
एआई की मदद से न्यूयॉर्क टाइम्स 80 से अधिक पॉडकास्ट को ट्रैक करता है जिन्हें ट्रंप के समर्थक और दक्षिणपंथी पत्रकार चलाते हैं। फिर यह एआई टूल सभी पॉडकास्ट का सार-संक्षेप तैयार करता है और अपने रिपोर्टर को भेज देता है।
डीपफेक और धोखाधड़ी का खतरा
YouTube पर कई लोगों की आवाज और चेहरे के इस्तेमाल से कई सारे चैनल बन जाते हैं। लोग धोखे में आकर देख भी लेते हैं। कई सारे प्रचार बन गए हैं – यह दवा लीजिए, वो दवा लीजिए। जबकि उन्होंने कभी दवा का प्रचार नहीं लिया। इसलिए आसान नहीं एआई के दौर में खुद को संभाल लेना।
खेती: सबसे पुराना पेशा
इस धरती पर इंसान की यात्रा का इतिहास 3 लाख साल पुराना है और खेती का 10,000 साल पुराना। 10,000 साल से खेती इसी दुनिया में टिकी हुई है। कंप्यूटर को भी देखा, टाइपराइटर को भी देखा और खेती अब एआई को भी देखेगी। सबसे पुराने पेशे के रूप में आप खेती को याद रख सकते हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
- एंथ्रोपिक के क्लॉड ओपस 4.6 के लॉन्च से टेक कंपनियों के 285 अरब डॉलर का नुकसान हुआ और 13 फरवरी को भारतीय शेयर बाजार में टेक कंपनियों के शेयर 5-7.5% गिर गए।
- ईलॉन मस्क समेत कई तकनीकी नेता कह रहे हैं कि एआई के कारण डॉक्टर, वकील, सॉफ्टवेयर इंजीनियर जैसे पेशे खत्म हो जाएंगे, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि एआई काम को खत्म नहीं बल्कि बदल रहा है।
- अमेरिका में रेडियोलॉजी जैसे क्षेत्र में एआई के बावजूद 2034 तक 5% रोजगार वृद्धि का अनुमान है, जो दिखाता है कि एआई मानव श्रम को पूरी तरह प्रतिस्थापित नहीं कर रहा।
- केरल की 4000 से अधिक अदालतों में एआई टूल का इस्तेमाल हो रहा है लेकिन वकीलों की जरूरत खत्म नहीं हुई, बल्कि उनका काम आसान हुआ है।








