Acidity Gas Constipation Treatment : पेट फूलना, गैस बनना, एसिडिटी और कब्ज – ये समस्याएं आज हर दूसरे घर में देखने को मिलती हैं। घर का सादा खाना खाने के बाद भी पेट भारी लगता है, खट्टी डकारें आती हैं और सीने में जलन होती है। सर गंगाराम हॉस्पिटल दिल्ली के इंस्टीट्यूट ऑफ सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के चेयरपर्सन पद्मश्री डॉ. सौमित्र रावत ने पेट की इन सभी समस्याओं का विस्तार से इलाज बताया है।
खाना खाने के बाद पेट क्यों फूलता है?
डॉ. रावत बताते हैं कि आजकल लोगों की लाइफ इतनी फास्ट हो गई है कि वे जल्दी-जल्दी खाना खाते हैं और बिना चबाए ज्यादा खा लेते हैं। इससे पेट में भारीपन हो जाता है क्योंकि बॉडी को डाइजेशन के लिए उतना ही समय लगना है।
जब आप खाना खाते समय लैपटॉप या मोबाइल देख रहे होते हैं तो ब्रेन सही से काम नहीं कर पाता। ध्यान खाने पर नहीं, फोन पर होता है और आप जल्दी-जल्दी खाना खत्म करने की कोशिश करते हैं।
कई खाद्य पदार्थ ऐसे होते हैं जो गैस ज्यादा बनाते हैं जैसे होल वीट, राजमा, छोले और बींस। अगर इन्हें ज्यादा मात्रा में खा लिया तो ब्लोटिंग होती है। इसके अलावा फैटी और ग्रीसी फूड से भी पेट फूलता है।
गैस बनने पर क्या करें?
डॉ. रावत के अनुसार गैस से राहत पाने के कई तरीके हैं। सौंफ का पानी पीना बहुत फायदेमंद है। पेपरमिंट ऑयल और पेपरमिंट के कैप्सूल्स भी गैस कम करते हैं। एंटासिड ले सकते हैं लेकिन सबसे जरूरी है खाने के बाद 10-15 मिनट वॉक करना।
पुराने जमाने में लोग रात को खाना खाने के बाद वॉक करते थे जो पाचन के लिए बहुत अच्छा था। आज की दिक्कत यह है कि खाने के तुरंत बाद लोग लेट जाते हैं जिससे गैस और ब्लोटिंग होती है।
अगर आप खाने पर ध्यान देंगे और अच्छे से चबाएंगे तो पेट में अच्छे हॉर्मोंस बनते हैं जो डाइजेशन को बेहतर करते हैं।
एसिडिटी के चार S – याद रखें ये कारण
डॉ. रावत ने एसिडिटी के चार मुख्य कारण बताए जिन्हें “4 S” कहा जाता है:
पहला S – Spices (मसाले): अगर खाने में मिर्च बहुत ज्यादा है तो एसिडिटी होगी।
दूसरा S – Spirit (शराब): बहुत ज्यादा अल्कोहल पीने से पेट में एसिडिटी होती है।
तीसरा S – Smoking (धूम्रपान): रेगुलर स्मोकिंग करने वालों को एसिडिटी की समस्या ज्यादा होती है।
चौथा S – Stress (तनाव): स्ट्रेस लेंगे तो एसिडिटी होगी। वर्क प्रेशर जितना भी हो, तनाव मत लीजिए।
एसिडिटी का देसी इलाज
एसिडिटी से राहत पाने के लिए सौंफ का पानी बहुत अच्छा माना जाता है। कोल्ड मिल्क भी एसिडिटी कम करता है। तरबूज बहुत फायदेमंद है क्योंकि यह अल्कलाइन होता है। केला भी अच्छा है क्योंकि यह भी अल्कलाइन है।
एसिडिक पदार्थों से बचना चाहिए जैसे सिट्रस फ्रूट्स, नींबू और संतरा। कैफीन कम करें, गर्म पदार्थ जैसे चाय का सेवन सीमित मात्रा में करें। मिर्ची वाला खाना कम करें या छोड़ दें।
मोटापा भी एसिडिटी बढ़ाता है इसलिए रेगुलर एक्सरसाइज करें और वजन कंट्रोल में रखें।
एंटासिड के खतरनाक साइड इफेक्ट्स
डॉ. रावत चेतावनी देते हैं कि कोई भी दवाई हो, उसके साइड इफेक्ट्स होते हैं। एंटासिड में तीन मुख्य कंपोनेंट होते हैं – कैल्शियम, एलुमिनियम और मैग्नीशियम।
ज्यादा एंटासिड लेने से नोजिया और वोमिटिंग की फीलिंग आती है। ब्लोटिंग होती है और पेट में क्रैम्प्स आते हैं। लॉन्ग टर्म में कब्ज भी हो सकता है।
एंटासिड एक बार ले सकते हैं लेकिन रेगुलर यूज करने से पहले डॉक्टर से जरूर मिलें। डॉक्टर बताएंगे कि एसिडिटी का असली कारण क्या है।
खाना खाते ही टॉयलेट क्यों जाना पड़ता है?
डॉ. रावत बताते हैं कि इसे “गैस्ट्रोकोलिक रिफ्लेक्स” कहते हैं। जब आप खाना खाते हैं तो जैसे ही खाना पेट में जाता है, कोलन कॉन्ट्रैक्ट करती है।
नॉर्मली जो आप खाते हैं, उसे शरीर में 10 से 70 घंटे तक रहना चाहिए क्योंकि डाइजेशन और अब्सॉर्प्शन होता है। न्यूट्रिएंट्स अब्सॉर्ब होते हैं तभी एनर्जी मिलती है।
कुछ लोगों को लैक्टोस इनटॉलरेंस होता है जिससे दूध सूट नहीं करता। कई बार आंतों का इंफेक्शन भी इसकी वजह होता है। अगर ऐसा हो तो डॉक्टर के पास जाएं, स्टूल कल्चर टेस्ट होता है जिससे पता चलता है कौन सा ऑर्गेनिज्म ग्रो कर रहा है।
कब्ज की तीन मुख्य वजहें
डॉ. रावत के अनुसार कब्ज की सबसे बड़ी वजह लाइफस्टाइल है:
पहली वजह – फास्ट फूड: तली हुई और ग्रीसी चीजें जैसे फ्रेंच फ्राइज और पिज्जा में फाइबर नहीं होता जिससे कब्ज होता है।
दूसरी वजह – पानी कम पीना: कई लोग आधा लीटर ही पानी पीते हैं जिससे डिहाइड्रेशन होता है और कब्ज होता है। कम से कम डेढ़-दो लीटर पानी पीना जरूरी है।
तीसरी वजह – सिडेंट्री लाइफस्टाइल: कुर्सी पर बैठकर काम करना और वॉकिंग-एक्सरसाइज न करना कब्ज का बड़ा कारण है।
कब्ज से बचाव के लिए क्या खाएं?
रोज एक केला लीजिए, पपीता लीजिए – कब्ज नहीं होगा। सेब, पाइनएप्पल और कीवी डाइजेशन के लिए बहुत अच्छे हैं। होल वीट, दालें और बींस में फाइबर होता है।
ग्रीन वेजिटेबल्स जितनी ज्यादा खाएंगे उतना अच्छा। इसे रेगुलर अपनी डाइट में लाना है, सिर्फ कब्ज होने पर नहीं।
ईसबगोल (हस्क) भी नेचुरल है और कब्ज में फायदेमंद है। लेकिन ईसबगोल लेने के बाद खूब पानी पीजिए।
पेट के लिए फायदेमंद मसाले
डॉ. रावत बताते हैं कि भारत में कई मसाले हैं जो डाइजेशन में मदद करते हैं:
- जीरा – सबसे पहले जीरा बहुत अच्छा है
- सौंफ – डाइजेशन के लिए बेहतरीन
- इलायची – पाचन में मदद करती है
- धनिया – खाने में जरूर डालें
- अदरक – डाइजेशन के लिए बहुत अच्छा है
- हल्दी – पेट के लिए फायदेमंद है
इन मसालों का इस्तेमाल करेंगे तो पेट ठीक रहेगा।
इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) क्या है?
IBS में कोई बीमारी नहीं होती लेकिन आंतें ठीक से काम नहीं करतीं। कभी डायरिया होता है, कभी कब्ज। पेट फूलता है, डिसकंफर्ट और दर्द होता है।
IBS का एक लक्षण यह भी है कि लैट्रिन करने जाते हैं तो पूरी तरह नहीं होता, बार-बार जाना पड़ता है।
IBS का इलाज लाइफस्टाइल मॉडिफिकेशन से होता है। देखना होगा कौन सा खाना ट्रिगर कर रहा है – कुछ लोगों को दूध से, कुछ को बींस से, कुछ को ग्रीसी फूड से प्रॉब्लम होती है।
लेट डिनर के खतरे
डॉ. रावत के अनुसार खाना सुबह 7 बजे से रात 8 बजे के बीच खत्म कर लेना चाहिए। रात 8 बजे के बाद खाने से बचें।
रात को कुछ हॉर्मोंस कम मात्रा में होते हैं जिससे डाइजेशन ठीक से नहीं हो पाता। अगर लेट और हैवी डिनर किया तो ब्लोटिंग होगी, एसिड मुंह में आएगा, वेट गेन होगा और नींद अच्छी नहीं आएगी।
सुबह उठने पर एंजायटी होगी। हाइपरटेंशन और डायबिटीज बढ़ेगी। दिल की बीमारी का खतरा भी बढ़ जाता है।
नाश्ते, लंच और डिनर में क्या खाएं?
ब्रेकफास्ट: जो भी खाएं वह हेल्दी होना चाहिए। बहुत ज्यादा तेल और मिर्च नहीं होनी चाहिए। इडली, पोहा, खिचड़ी – जिसमें तेल कम हो वह बेहतर है।
लंच: मॉडरेशन में लीजिए।
डिनर: लाइट लीजिए। चावल खा सकते हैं लेकिन साथ में सब्जी और दाल भी रखिए। बैलेंस डाइट में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और अच्छा फैट होना चाहिए।
अच्छे फैट के लिए नट्स लीजिए जैसे अखरोट और बादाम। शुद्ध देसी घी बढ़िया है। ऑलिव ऑयल और सनफ्लावर ऑयल का इस्तेमाल करें।
खाली पेट चाय-कॉफी के नुकसान
डॉ. रावत बताते हैं कि खाली पेट कॉफी पीने से पेट की लाइनिंग डैमेज होती है क्योंकि ऊपर खाना नहीं होता। एसिड प्रोड्यूस होता है जिससे एसिडिटी, हार्टबर्न और एसिड रिफ्लक्स होता है।
10 घंटे से फास्टिंग के बाद कैफीन लेंगे तो शुरू में एनर्जी मिलेगी लेकिन कुछ समय बाद वह एनर्जी खत्म होकर डिप्रेशन में बदल जाएगी।
चार कप से ज्यादा कॉफी मत लीजिए – यह साइंटिफिकली प्रूवन है। कॉफी खाने के कुछ घंटे बाद लीजिए, खाली पेट नहीं। चीनी और शुगर फ्री टेबलेट्स से बचें।
पेट के कैंसर क्यों बढ़ रहे हैं?
डॉ. रावत बताते हैं कि पिछले 25-30 सालों में पेट के कैंसर नियरली डबल हो गए हैं। आज की तारीख में करीब 25-30% कैंसर GI और HPB से जुड़े हैं।
खाने की नली का कैंसर, पेट का कैंसर, बड़ी आंत का कैंसर, पैंक्रियाज का कैंसर, गॉल ब्लैडर का कैंसर, पित्त की नली का कैंसर और लिवर का कैंसर – ये सब बढ़ रहे हैं।
कोलोरेक्टल कैंसर इंग्लैंड-अमेरिका में ज्यादा था लेकिन वही लाइफस्टाइल अब भारत में आ गई है। प्रोसेस्ड फूड, फैटी और ग्रीसी फूड, रेड मीट – ये सब कोलोरेक्टल कैंसर के कारण हैं।
कैंसर से बचाव कैसे करें?
डॉ. रावत सलाह देते हैं कि खूब फल और सब्जियां खाएं। मीट खाना है तो वाइट मीट लीजिए – फिश और चिकन। उन्हें तलिए मत, बॉइल करके खाइए।
कैंसर के लक्षणों पर ध्यान दें:
- खाना गले में अटकना
- पेट में लगातार दर्द जो जा नहीं रहा
- बिना कारण वजन घटना (5-10 किलो 2-3 महीने में)
- थकान और कमजोरी
- लैट्रिन में खून आना
- पीलिया होना
अगर स्टेज वन में कैंसर पकड़ लिया तो 90% क्योर होने के चांस हैं। आजकल लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से बड़ा चीरा नहीं लगता, दूरबीन से कैंसर निकाल देते हैं।
टॉयलेट में 10 मिनट से ज्यादा न बैठें
डॉ. रावत एक महत्वपूर्ण बात बताते हैं कि टॉयलेट में मोबाइल फोन लेकर जाना गलत है। कई लोग लैपटॉप भी ले जाते हैं।
स्टडीज कहती हैं कि अगर आप 10 मिनट के अंदर टॉयलेट से बाहर नहीं आते तो जो अर्ज होती है वह खत्म हो जाती है। मोबाइल देखने से ध्यान भटकता है और जोर लगाने से पाइल्स और फिशर हो सकता है।
साथ ही मोबाइल फोन में बैक्टीरियल कंटैमिनेशन हो जाता है।
क्या है पृष्ठभूमि?
आज के दौर में बदलती लाइफस्टाइल, फास्ट फूड का बढ़ता चलन, स्ट्रेस और व्यस्त जीवनशैली ने पेट की समस्याओं को आम बना दिया है। लोग खाने पर ध्यान नहीं देते, जल्दी-जल्दी खाते हैं और लेट डिनर करते हैं। पद्मश्री डॉ. सौमित्र रावत जो सर गंगाराम हॉस्पिटल में GI और HPB सर्जरी के विशेषज्ञ हैं, ने इस इंटरव्यू में पेट की हर समस्या का सरल और व्यावहारिक इलाज बताया है जिसे हर कोई अपने रोजमर्रा के जीवन में अपना सकता है।
विश्लेषण (Analysis)
डॉ. रावत की सलाह में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ज्यादातर पेट की समस्याएं लाइफस्टाइल से जुड़ी हैं। दवाइयां तुरंत राहत दे सकती हैं लेकिन असली इलाज खानपान और जीवनशैली में बदलाव है। चार S – Spices, Spirit, Smoking और Stress को याद रखना बहुत जरूरी है। देसी नुस्खे जैसे सौंफ का पानी, अदरक, हल्दी और इलायची बहुत कारगर हैं। सबसे बड़ी बात – खाने पर ध्यान दें, धीरे-धीरे चबाकर खाएं और खाने के बाद वॉक जरूर करें।
मुख्य बातें (Key Points)
- गैस और एसिडिटी से राहत के लिए सौंफ का पानी, कोल्ड मिल्क और तरबूज फायदेमंद हैं
- चार S याद रखें – Spices, Spirit, Smoking, Stress एसिडिटी के मुख्य कारण हैं
- ज्यादा एंटासिड लेने से कब्ज और पेट में क्रैम्प्स हो सकते हैं
- खाना 7 से 8 बजे के बीच खत्म करें, लेट डिनर से बचें
- टॉयलेट में 10 मिनट से ज्यादा न बैठें और मोबाइल साथ न ले जाएं






