नई दिल्ली, 3 मई (The News Air) रायबरेली में राहुल गांधी का मुकाबला बीजेपी के दिनेश प्रताप सिंह से है, जिन्हें माना जाता है कि इस सीट पर उनका काफी मजबूत पक्ष है। पिछले चुनाव में जब दिनेश प्रताप सिंह ने सोनिया गांधी के खिलाफ उतरा था, तो उन्होंने जीत का अंतर कम किया था। रिकॉर्ड्स के मुताबिक, 2014 में सोनिया गांधी ने लगभग 3.52 लाख वोटों से जीत हासिल की थी, जबकि 2019 में इस वोटों की संख्या कम हो गई थी।
दिनेश प्रताप सिंह: कांग्रेस से बीजेपी में शामिल हुए रायबरेली के योद्धा
दिनेश प्रताप सिंह ने साल 2018 में लोकसभा चुनाव से कुछ समय पहले ही कांग्रेस से बीजेपी में शामिल हुए थे। उनका परिवार रायबरेली की जमीनी पॉलिटिक्स में भी शामिल है।
रायबरेली: कांग्रेस का अटूट गढ़
रायबरेली हमेशा से कांग्रेस का गढ़ रहा है, जहां कांग्रेस ने 17 बार जीत हासिल की है। यहां बीजेपी को सिर्फ दो बार ही जीत मिली है, और एक बार जनता पार्टी के उम्मीदवार को भी यहां पर जीत मिली है।
अमेठी लोकसभा सीट
अमेठी सीट पर गांधी परिवार से हटकर एक नया उम्मीदवार उतारा गया है, केएल शर्मा, जिन्हें सोनिया गांधी का चाणक्य कहा जाता है। राहुल गांधी को अमेठी सीट पर दो बार से हार का सामना करना पड़ा है, जिसमें स्मृति ईरानी ने उन्हें 2019 में हरा दिया था।
दिनेश प्रताप सिंह की चुनौती: क्या वापस ला पाएंगे कांग्रेस की खोई हुई सीट?
अब बात यहां तक पहुंचती है कि क्या दिनेश प्रताप सिंह एक बार फिर कांग्रेस की खोई हुई सीट रायबरेली को वापस ला पाएंगे? इस बार चुनाव में दोनों ही सीटों पर वोटिंग 20 मई को होगी, जब पांचवे चरण के चुनाव आयोजित किए जाएंगे।








