Cyclone Murasu को लेकर भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपनी आखिरी प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी है। यह भीषण चक्रवाती तूफान 31 अक्टूबर से 4 नवंबर 2026 के बीच दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी के ऊपर दर्ज किया गया। अब इसके बचे हुए हिस्से यानी रेम्नेंट के असर से तेलंगाना, उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश, दक्षिणी छत्तीसगढ़ और दक्षिणी ओडिशा में भारी बारिश से नुकसान की आशंका जताई गई है।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत आने वाले IMD ने साफ किया है कि यह तूफान से जुड़ी आखिरी प्रेस विज्ञप्ति है। लेकिन राष्ट्रीय मौसम पूर्वानुमान केंद्र और संबंधित मौसम केंद्रों से इस सिस्टम के नियमित बुलेटिन आगे भी आते रहेंगे।
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‘Cyclone Murasu: किन इलाकों में क्या नुकसान की आशंका’
IMD के मुताबिक भारी बारिश का सबसे पहला असर खेतों पर पड़ सकता है। खड़ी फसलों, बागानों और बगीचों को नुकसान की आशंका है। केला, पपीता और सहजन के पेड़ भी इस सूची में शामिल हैं। बागवानी और तटीय इलाकों की फसलों को भी नुकसान पहुंच सकता है।
सड़कों और रेल पर भी असर का अंदेशा है। कच्ची सड़कों में बाढ़ से कुछ जगह दरारें पड़ सकती हैं। बाहर निकलने के रास्ते पानी में डूब सकते हैं। निचले इलाकों में जलभराव और सड़कों पर पानी भरने से बड़े शहरों में ट्रैफिक बाधित होने और सफर में ज्यादा समय लगने की बात कही गई है।
विज्ञप्ति में पीने के पानी, साफ-सफाई और इंसानों व पशुओं की सेहत को भी असर वाली श्रेणियों में गिना गया है। इसके साथ ही नदियों में बाढ़, शहरी बाढ़, तटीय बाढ़ और पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन जैसे दूसरे खतरे भी बताए गए हैं।
| क्षेत्र | आशंकित नुकसान |
|---|---|
| खेती | खड़ी फसलें, बागान, केला, पपीता, सहजन के पेड़, तटीय फसलें |
| सड़क और रेल | कच्ची सड़कों में दरारें, निकासी के रास्तों में पानी, जलभराव, बड़े शहरों में ट्रैफिक बाधा |
| पानी और सेहत | पीने का पानी, साफ-सफाई, इंसानों और पशुओं की सेहत |
| दूसरे खतरे | नदियों में बाढ़, शहरी बाढ़, तटीय बाढ़, पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन |
‘लोगों के लिए IMD की सलाह’
प्रभावित इलाकों के लोगों से घरों के अंदर रहने को कहा गया है। कमजोर ढांचों में रुकने से बचने की सलाह है। रेल और सड़क यातायात को समझदारी से नियंत्रित करने और जारी होने वाली ट्रैफिक एडवाइजरी का पालन करने को कहा गया है।
जिन जगहों पर अक्सर जलभराव होता है, वहां जाने से बचने की सलाह भी दी गई है। यात्रा से निकलने से पहले अपने रास्ते पर जाम की स्थिति जांचना भी जरूरी बताया गया है। पर्यटन गतिविधियां 4 नवंबर तक सोच-समझकर तय करने को कहा गया है।
’24 घंटे की बारिश: कहां सबसे ज्यादा दर्ज हुई’
3 नवंबर की सुबह 8:30 बजे से 4 नवंबर की सुबह 8:30 बजे तक के 24 घंटों के आंकड़े बताते हैं कि भारी बारिश सबसे ज्यादा तेलंगाना और तटीय आंध्र प्रदेश में दर्ज हुई। तेलंगाना के मुलकलपल्ले (बी. कोठागुडेम) में आंकड़ा 24 रहा, जो सूची में सबसे ऊपर है। उसके बाद खम्मम जिले के सत्तुपल्ली में 22 दर्ज हुआ।
तटीय आंध्र में पश्चिम गोदावरी के पालाकोडेरु में 21 और अंबेडकर कोनसीमा के अमलापुरम में 20 का आंकड़ा रहा। NTR जिले के तिरुवुरु और पश्चिम गोदावरी के तणुकु में 19-19 दर्ज हुआ। (ये आंकड़े IMD की तालिका के हैं, जिसमें इकाई नहीं दी गई।)
| राज्य | सबसे ऊपर के आंकड़े |
|---|---|
| तेलंगाना | मुलकलपल्ले (बी. कोठागुडेम) 24, सत्तुपल्ली (खम्मम) 22, जुलूरपाड़ और अश्वारावपेट (बी. कोठागुडेम) 18-18 |
| तटीय आंध्र प्रदेश और यानम | पालाकोडेरु (पश्चिम गोदावरी) 21, अमलापुरम (कोनसीमा) 20, तिरुवुरु (NTR) और तणुकु (पश्चिम गोदावरी) 19-19 |
| तमिलनाडु | थलगुनी (इरोड) 9, कुन्नथुर (तिरुप्पुर), थिंगलूर (इरोड), करमदई (कोयंबटूर) 8-8 |
| छत्तीसगढ़ | पखांजूर (कांकेर) 8, सुकमा 7 |
‘फिशरमैन वार्निंग और रडार तस्वीरें’
विज्ञप्ति के साथ मछुआरों के लिए चेतावनी के ग्राफिक्स भी जारी हुए हैं। इनमें दिन-1 (4 नवंबर, 11:30 AM से 5 नवंबर, 5:30 AM), दिन-2 (5 से 6 नवंबर), दिन-3 (6 से 7 नवंबर) और दिन-5 (8 से 9 नवंबर) की अवधि दिखाई गई है।
कुछ नक्शों पर “नो फिशरमैन वार्निंग” लिखा है, जबकि कुछ पर समुद्री इलाकों के कोड हैं। किस दिन कौन सा इलाका प्रभावित रहेगा, इसका साफ ब्योरा उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा मछलीपट्टनम और विशाखापत्तनम के डॉप्लर वेदर रडार की तस्वीरें और “वेल मार्क्ड लो प्रेशर एरिया” का नक्शा भी साझा किया गया है। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के लिए जिलावार चेतावनी वाले ग्राफिक्स भी जारी हुए हैं।
‘आखिरी विज्ञप्ति का मतलब क्या है’
समझने वाली बात यह है कि “आखिरी प्रेस विज्ञप्ति” का मतलब खतरा खत्म होना नहीं है। IMD ने खुद कहा है कि सिस्टम के नियमित बुलेटिन जारी रहेंगे। यानी निगरानी चल रही है, बस तूफान के रूप में अलग से प्रेस विज्ञप्ति का सिलसिला रुक रहा है।
अगर गौर करें तो ध्यान अब हवा से हटकर बारिश के नतीजों पर है: फसल, सड़क, जलभराव और भूस्खलन। इससे साफ होता है कि अब असली चुनौती तेज बारिश के बाद के हालात संभालने की है।
दिलचस्प बात यह है कि चेतावनी वाले राज्यों में ओडिशा का नाम है, पर 24 घंटे की बारिश की सूची में ओडिशा के आंकड़े शामिल नहीं हैं। छत्तीसगढ़ के दर्ज आंकड़े (8 और 7) भी तेलंगाना और आंध्र की तुलना में काफी कम हैं। यानी फिलहाल सबसे ज्यादा बारिश तेलंगाना और तटीय आंध्र के जिलों में दर्ज हुई है।
आम आदमी के लिए इसका मतलब सीधा है। जो लोग इन इलाकों में रहते हैं या सफर करने वाले हैं, उन्हें रास्ते की स्थिति देखकर ही निकलना चाहिए। किसानों और बागवानों के लिए खड़ी फसल का नुकसान बड़ी चिंता का विषय है।
‘क्या है पृष्ठभूमि’
भीषण चक्रवाती तूफान “मुरासु” का रास्ता 31 अक्टूबर से 4 नवंबर 2026 के बीच दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी के ऊपर दर्ज किया गया। IMD ने इस तूफान और उसके बचे हिस्से के लिए अब तक जारी होने वाली प्रेस विज्ञप्तियों की कड़ी में यह आखिरी विज्ञप्ति जारी की है, जबकि नियमित बुलेटिन आगे भी जारी रहेंगे।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- IMD ने भीषण चक्रवाती तूफान “मुरासु” और उसके रेम्नेंट पर आखिरी प्रेस विज्ञप्ति जारी की। नियमित बुलेटिन आगे भी आएंगे।
- तेलंगाना, उत्तरी तटीय आंध्र, दक्षिणी छत्तीसगढ़ और दक्षिणी ओडिशा में फसलों, सड़कों और निचले इलाकों को नुकसान की आशंका है।
- 24 घंटे की बारिश में सबसे ऊपर तेलंगाना का मुलकलपल्ले (24) और सत्तुपल्ली (22) रहे, उसके बाद आंध्र के पालाकोडेरु (21) और अमलापुरम (20)।
- लोगों को घर के अंदर रहने, जलभराव वाले इलाकों से बचने और ट्रैफिक एडवाइजरी मानने की सलाह दी गई है।











